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Sri Lanka: नाकाम हो गया है राष्ट्रपति विक्रमसिंघे का सर्वदलीय सरकार बनाने का दांव

Thu, 04 Aug 2022 04:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 04 Aug 2022 04:13 PM IST
सार

Sri lanka: मुख्य विपक्षी दल समागी जना बलावेगया (एसजेबी) ने एसएलपीपी का ये प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा कि इस समय जब देश आर्थिक संकट में है, तब 40 सदस्यीय विशाल मंत्रिमंडल का गठन करना उचित नहीं होगा। इससे सार्वजनिक कोष पर बेवजह बोझ बढ़ेगा...

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Sri Lanka: President Ranil Wickremesinghe's bid to form an all-party government has failed
Sri lanka: राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका की सत्ताधारी पार्टी श्रीलंका पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) ने अब राष्ट्रीय सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा है। पार्टी ने कहा है कि संकट की मौजूदा घड़ी में यह जरूरी है कि सभी पार्टियों के प्रतिनिधि सरकार में शामिल हों। लेकिन इस पेशकश पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक नहीं है। बल्कि आरोप लगाया गया है कि मौजूदा आर्थिक संकट से देश को निकालने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ पाने के कारण एसएलपीपी ने अब ये नया दांव चला है। मुख्य विपक्षी दल समागी जना बलावेगया (एसजेबी) ने एसएलपीपी का ये प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा कि इस समय जब देश आर्थिक संकट में है, तब 40 सदस्यीय विशाल मंत्रिमंडल का गठन करना उचित नहीं होगा। इससे सार्वजनिक कोष पर बेवजह बोझ बढ़ेगा। समझा जाता है कि एसजेबी की इस राय के बाद सत्ताधारी दल की पेशकश के आगे बढ़ने की संभावना कमजोर हो गई है।

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एसएलपीपी के सांसद जगत कुमारा ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सर्वदलीय सरकार के गठन का विचार सामने रखा था। उन्होंने कहा- मुझे ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे व्यापक आम सहमति के साथ सर्वदलीय सरकार बनाएंगे। उन्होंने कहा- ‘पार्टियों को इस इंतजार में रहने के बजाय कि उनका नेता राष्ट्रपति बनेगा, उन्हें देश को बचाने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। इसके लिए हम उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं। ऐसा होने पर देश में ऐसा माहौल बनेगा, जिससे हमारे प्रिय देशवासियों की जिंदगी आसान होगी।’ समझा जाता है कि राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने इस संबंध सभी पार्टियों के सांसदों को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने इतिहास के सबसे बुरे संकट से देश को निकालने के लिए सभी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया है।

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लेकिन एसजेबी ने इस पहल को लेकर संदेह जताया है। पार्टी के सांसद एसएम मारिक्कर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी आर्थिक सुधार कार्यक्रम का समर्थन करेगी। लेकिन वह सरकार में पद हासिल करना नहीं चाहती। उन्होंने कहा- ‘एक राजनीतिक दल के रूप में हम अवश्य ही वैसी पहल का समर्थन करेंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट सके। ऐसा संसदीय समिति प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि हम सर्वदलीय सरकार में शामिल हों और मंत्री पद की सुविधाएं प्राप्त करें। हम इस पहल का समर्थन नहीं करते।’

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एसजेबी ने कहा है कि सभी दलों को नुमाइंदगी देने के लिए अगर 40 कैबिनेट मंत्री बनाए गए, तो 40 उपमंत्री भी नियुक्त करने होंगे। उनके साथ मंत्रालयों में अफसरों की तैनाती भी करनी होगी। इस तरह सर्वदलीय सरकार की आड़ में जनता पर ऐसा बोझ डाला जाएगा, जिसे सह सकने की स्थिति में वह नहीं है। इस बीच देश में असहमति के दमन के आरोप के कारण भी विक्रमसिंघे सरकार दबाव में है। अमेरिकी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि विक्रमसिंघे सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया की निगरानी बढ़ा दी है। यह गलत दिशा में उठाया गया कदम है। इस संगठन ने श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से कहा है कि उन्हें एक ऐसी सरकार से ही सहयोग करना चाहिए, जो मानवाधिकारों का सम्मान करती हो।

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