फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Sri Lanka PM Mahinda Rajpaksa presented a resolution to curb the powers of the President amid financial and political crisis news in Hindi

श्रीलंका: प्रधानमंत्री राजपक्षे ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाने से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया, झड़प के बाद रामबुक्काना में लगा कर्फ्यू

Wed, 20 Apr 2022 03:32 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 20 Apr 2022 03:32 AM IST
सार

श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजाद होने के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में विदेशी मुद्रा की भारी कमी हो गई है, जिससे वह खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है। देश में इसको लेकर कई दिनों से प्रदर्शन जारी है और लगातार राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

विज्ञापन
Sri Lanka PM Mahinda Rajpaksa presented a resolution to curb the powers of the President amid financial and political crisis news in Hindi
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाने और संसद को सशक्त बनाने के लिए संविधान में 19वें संशोधन को बहाल करने का एक प्रस्ताव मंगलवार को पेश किया। यह प्रस्ताव ऐसे समय में पेश किया गया है, जब श्रीलंका अप्रत्याशित आर्थिक संकट से जूझ रहा है और लोग लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

विज्ञापन


पारंपरिक सिंहली और तमिल नव वर्ष के बाद संसद को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री राजपक्षे ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक आधार पर विभिन्न संकटों का समाधान खोजा जाए। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि संविधान में संशोधन जरूर होना चाहिए। इसकी शुरुआत के तौर पर, 19वें संशोधन को आवश्यक एवं समयबद्ध परिवर्तनों के साथ लागू करना, देश की मौजूदा स्थिति के लिए सबसे अच्छा अल्पकालिक समाधान है। प्रधानमंत्री ने संसद से कहा, ‘मेरा मानना है कि 19ए को कुछ संशोधनों के साथ एक अल्पकालिक समाधान के रूप में बहाल किया जा सकता है।’ साल 2015 में अपनाया गया 19ए राष्ट्रपति की शक्तियों को कम करता है और संसद को कार्यकारी राष्ट्रपति से अधिक शक्तियां देता है।
विज्ञापन


विक्रमसिंघे ने किया समर्थन
पूर्व प्रधानमंत्री एवं यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए कहा, "मैं 19वें संशोधन को बहाल करने को लेकर खुश हूं। मेरा अनुरेाध है कि सम्मानजनक तरीके से 20वें संशोधन को जल्द से जल्द समाप्त कर दें, ताकि 19वें संशोधन को बहाल किया जा सके।" विक्रमसिंघे की सरकार ने ही 19वां संशोधन पेश किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


संकट के समाधान के लिए सोमवार को हुई थी विशेष बैठक
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के आशीर्वाद से हमें भविष्य में व्यापक संवैधानिक सुधार की ओर बढ़ना चाहिए। वहीं, संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धना ने सदन को बताया कि मौजूदा राजनीतिक संकट को दूर करने को लेकर अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान तलाशने के लिए कल एक विशेष बैठक की गई थी।

अभयवर्धना ने कहा, ‘कई पार्टी नेताओं ने एक दीर्घकालिक उपाय के रूप में एक नए संविधान का मसौदा तैयार करने और संविधान में 21वें संशोधन को एक अल्पकालिक समाधान के रूप में लाकर संसद को मजबूत करने का आह्वान किया है।’

सदन की बैठक मंगलवार को जब शुरू हुई, तो सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य रहे लगभग 41 सांसद विपक्षी दलों के स्थान पर बैठे नजर आए। उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग होने की घोषणा की थी। 

राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने स्वीकार कीं अपनी गलतियां
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने स्वीकार किया है कि उन्होंने गलतियां कीं, जिसके कारण देश दशकों के सबसे खराब आर्थिक संकट से घिर गया। राष्ट्रपति ने अपनी गलतियां सुधारने का संकल्प भी किया। राष्ट्रपति ने सोमवार को 17 मंत्रियों की नई कैबिनेट का गठन करके उसके समक्ष अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा, गत ढाई साल में हमने कई चुनौतियों का सामना किया है। कोविड-19, ऋण का बोझ तथा कुछ गलतियां हमारी रहीं। उन्हें सुधारे जाने की जरूरत है। हमें उन्हें सुधारना होगा और आगे बढ़ना होगा। हमें लोगों का भरोसा पुन: जीतना होगा। उन्होंने अपने कई फैसलों पर अफसोस जताया।

राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने 2020 में रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध लगाने, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से देरी से संपर्क करने जैसी अपनी गलतियों को सोमवार को भी स्वीकार किया, जिस कारण देश सबसे खराब आर्थिक संकट से घिर गया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी सरकार को राहत के लिए बहुत पहले ही आईएमएफ से पास जाना चाहिए था और ऐसा न करना गलती थी।

राजपक्षे ने 2020 के मध्य में जैविक उर्वरक के साथ हरित कृषि नीति लागू करने के लिए उर्वरकों के आयात और उनके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। किसानों ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा था कि इससे फसलों को नुकसान होगा और उत्पादन में कमी आएगी। इसके बावजूद, सरकार ने इस फैसले को आगे बढ़ाया और मुख्य खाद्य पदार्थों की जमाखोरी की खबरों के बाद दुकानदारों और व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की। राजपक्षे ने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा, 'मैं लोगों की नाराजगी को समझ सकता हूं... उन्हें आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।'

सरकारी तेल कंपनी ने बढ़ाए ईंधन के दाम
श्रीलंका की सरकारी तेल कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (सीपीसी) ने सोमवार आधी रात से ईंधन की कीमत बढ़ा दी हैं। इससे पहले इंडियन ऑयल के स्थानीय परिचालन ने कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। सीपीसी ने 92 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 84 रुपये बढ़ाकर 338 रुपये प्रति लीटर कर दी है। यह कीमत अब श्रीलंकाई-भारतीय तेल कंपनी (एलआईओसी) की प्रति लीटर कीमत के बराबर हो गई है। सीपीसी एक महीने में दो बार दाम बढ़ा चुकी है।


झड़प के बाद रामबुक्काना में लगा कर्फ्यू
श्रीलंकाई पुलिस ने मंगलवार को पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद रामबुक्काना पुलिस डिवीजन में कर्फ्यू लगा दिया। स्थानीय अखबार कोलंबो पेज ने पुलिस प्रवक्ता एसएसपी निहाल थलडुवा के हवाले से बताया कि रामबुकाना पुलिस क्षेत्र में अगली सूचना तक पुलिस कर्फ्यू लगा दिया गया है और कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती से कानून लागू किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed