फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Sri Lanka: People did not like Rajapaksa move to shield Wickremesinghe Opposition also reject to support know the whole matter

श्रीलंकाः लोगों को पसंद नहीं आई विक्रमसिंघे को ढाल बनाने की राजपक्षे की चाल, जानें पूरा मामला 

Fri, 13 May 2022 08:55 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 13 May 2022 08:55 PM IST
सार

विक्रमसिंघे की यूएनपी पार्टी को पिछले संसदीय चुनाव में 225 में से सिर्फ एक सीट मिली थी। इसलिए उनका चयन बहुत से लोगों को रास नहीं आया है। उन्होंने राय जताई कि अब राष्ट्रपति ने जनता की तरफ से ठुकराए गए एक नेता की आड़ लेने की कोशिश की है।

विज्ञापन
Sri Lanka: People did not like Rajapaksa move to shield Wickremesinghe Opposition also reject to support know the whole matter
रानिल विक्रमसिंघे - फोटो : ANI

विस्तार

यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाने के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के फैसले से सरकार विरोधी आंदोलनकारियों की भावनाएं शांत नहीं हुई हैं। कोलंबो में जमे आंदोलनकारियों की इस पर पहली प्रतिक्रिया नाराजगी भरी रही। वे यह पूछते सुने गए कि राजपक्षे या विक्रमसिंघे के पास देश की बुनियादी समस्याओं को हल करने का क्या फॉर्मूला है।  

विज्ञापन


बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादातर आंदोलनकारी राष्ट्रपति की ताजा घोषणा से प्रभावित नजर नहीं आए। बीबीसी रिपोर्टर से बातचीत में कविंद्या थेन्नकून नाम के एक कार्यकर्ता ने विक्रमसिंघे को संबोधित करते हुए पूछा कि पिछले 30 दिन से आप कहां थे। लोगों के पास न दवाएं हैं, ना खाना। पूरा देश ठप है। आंदोलनकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति जिन सुधारों की बात कर रहे हैं, उनकी हमें जरूरत नहीं है। हम यह चाहते हैं कि पहले राष्ट्रपति इस्तीफा दें। हम यह देख कर हैरत में हैं कि इतनी साधारण बात गोटबया नहीं समझ पा रहे हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


विक्रमसिंघे की यूएनपी पार्टी को पिछले संसदीय चुनाव में 225 में से सिर्फ एक सीट मिली थी। इसलिए उनका चयन बहुत से लोगों को रास नहीं आया है। उन्होंने राय जताई कि अब राष्ट्रपति ने जनता की तरफ से ठुकराए गए एक नेता की आड़ लेने की कोशिश की है। 73 वर्षीय विक्रमसिंघे पहले भी चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के मौके पर जन आक्रोश भड़कने के डर से मीडिया को भी नहीं बुलाया गया। 

विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की राष्ट्रपति की घोषणा के तुरंत बाद बौद्ध भिक्षु ओमाल्पे सोबिता थेरो और कैथोलिक चर्च के प्रमुख कार्डिनल मैल्कम रंजीत ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ये नियुक्ति वैसा समाधान नहीं है, लोग जिसकी मांग कर रहे हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक हालांकि राजपक्षे और विक्रमसिंघे अलग-अलग पार्टियों के नेता हैं, लेकिन दोनों को राजनीतिक सहयोगी माना जाता है। विक्रमसिंघे पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। उधर राजपक्षे परिवार पर मानव अधिकारों के हनन और कुछ अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप हैं। सियासी हलकों में आम राय रही है कि दोनों ने सत्ता में रहते हुए एक दूसरे को संरक्षण दिया है।


वकील और मानव अधिकार कार्यकर्ता अंबिका सतुकुनानाथन ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- इस नियुक्ति से यह जाहिर हुआ है कि विरोध प्रदर्शनों और लोगों की मांग के बावजूद गोटबया राजपक्षे अपना पद ना छोड़ने पर अड़े हुए हैँ। उन्होंने कहा- विक्रमसिंघे के साथ उन्होंने अपने स्वार्थ में सौदेबाजी की है। मार्क्सवादी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना के नेता अरुणा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि विक्रमसिंघे की नियुक्ति कर गोटबया ने अपने को बचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा- रानिल हमेशा ही राजपक्षे परिवार की ढाल रहे हैं। इसके पहले विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने कहा था कि अगर राष्ट्रपति चार शर्तें मान लें, तो वे प्रधानमंत्री बनने को तैयार हैं। इन शर्तों में यह एक भी थी कि गोटबया एक निश्चिय समयसीमा के भीतर राष्ट्रपति पद छोड़ देंगे। 

विपक्ष ने भी खारिज की प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे की नियुक्ति
श्रीलंका में प्रधानमंत्री की शपथ के बाद कार्यभार संभालते ही रानिल विक्रमसिंघे की नियुक्ति को विपक्ष ने खारिज कर दिया। विपक्षी पार्टी एसजेपी और जेवीपी ने घोषणा की कि वे नए पीएम को कोई समर्थन नहीं देंगे क्योंकि उनकी नियुक्ति के दौरान लोगों की आवाज का सम्मान नहीं किया गया। देश के अधिकांश विपक्षी दलों ने कहा, वे अंतरिम सरकार में शामिल नहीं होंगे लेकिन कर्ज में डूबे देश के हालात सुधारने में मदद के लिए बाहर से आर्थिक नीतियों का समर्थन करेंगे। निर्दलीय समूह के सांसद विमल वीरवांसा बोले, हम इस राजपक्षे-विक्रमसिंघे सरकार का हिस्सा नहीं बन सकते। जेवीपी ने कहा, वे भी सरकार का हिस्सा नहीं होंगे वहीं मुख्य विपक्षी दल एसजेबी ने कहा कि यूएनपी नेता विक्रमसिंघे की कोई वैधता नहीं है क्योंकि वह संसदीय चुनाव में भी नहीं निर्वाचित हुए थे। जेवीपी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने विक्रमसिंघे को पीएम बनाने के फैसले का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति की कोई वैधता नहीं है और इसका कोई लोकतांत्रिक मूल्य नहीं है। वह पिछले आम चुनाव में एक सीट भी नहीं जीत सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed