Sri Lanka: मानवाधिकार परिषद में पारित प्रस्ताव को स्वीकार करने में मूड में नहीं है श्रीलंका
Sri Lanka: श्रीलंका की तमिल आबादी के मानवाधिकारों के कथित हनन के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में 20 देशों ने मतदान किया। सात देशों ने इसका विरोध किया। 20 देश मतदान से गैर-हाजिर रहे...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में श्रीलंका खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बाद रानिल विक्रमसिंघे सरकार देशवासियों को दोस्त और दुश्मन देशों के बारे में जानकारी देने में जुट गई है। जिन देशों प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और जो मतदान के दौरान गैर-हाजिर रहे, उन्हें श्रीलंका सरकार खास शुक्रिया अदा कर रही है। श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी पहले ही कह चुके हैं कि इस प्रस्ताव का मानवाधिकारों के संरक्षण से कोई संबंध नहीं है, बल्कि इसका पारित होना बदली भू-राजनीति का परिणाम है।
श्रीलंका की तमिल आबादी के मानवाधिकारों के कथित हनन के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में 20 देशों ने मतदान किया। सात देशों ने इसका विरोध किया। 20 देश मतदान से गैर-हाजिर रहे। जिन सात देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया, उनमें श्रीलंका के अलावा चीन और पाकिस्तान शामिल हैं। जो 20 देश गैर-हाजिर रहे, उनमें भारत, जापान, इंडोनेशिया, कतर, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
मतदान का नतीजा आने के बाद श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम को फोन पर दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि मतदान का नतीजा अनुमान के मुताबिक ही है। कई देशों पर प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालने के लिए भारी दबाव डाला गया। उन्होंने कहा- ‘इसीलिए हमें परिमाण पहले से मालूम था। यूएनएचआरसी की संरचना बदल गई है। हमारे कई मित्र देश अब इस संस्था में मौजूद नहीं हैं।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक गुरुवार को पारित हुए प्रस्ताव में श्रीलंका के खिलाफ जैसी सख्त भाषा का इस्तेमाल हुआ है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। वैसे श्रीलंका के खिलाफ यूएनएचआरसी में 2009 से ही प्रस्ताव पेश होता रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक ये प्रस्ताव पारित हो जाने से श्रीलंका के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी दिक्कत पेश आ सकती है। यूरोपियन यूनियन (ईयू) जैसे व्यापार भागीदार कारोबार में संबंधित देश के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भी ध्यान देते हैं। ईयू पहले ही धमकी दे चुका है कि कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन ना करने के कारण वह श्रीलंका को दी गई व्यापार रियायतों से उसे वंचित कर सकता है।
प्रस्ताव ‘श्रीलंका में मेलमिलाप, जवाबदेही और मानव अधिकारों को प्रोत्साहन’ शीर्षक से पेश किया गया। इसे पेश करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा, मलावी, मोन्टेनेगरो और उत्तर मेसिडोनिया शामिल हैं। 2009 में श्रीलंका में 26 साल तक चला गृह युद्ध खत्म हुआ था। उसके बाद से यूएनएचआरसी में श्रीलंका के खिलाफ कुल सात प्रस्ताव पारित हुए हैं।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि श्रीलंका को उन मूल समस्याओं को हल करना चाहिए, जिसकी वजह से वहां अभूतपूर्व आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। इसमें कहा गया है कि मानवाधिकारों को प्रोत्साहन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण एक दूसरे से जुड़े हुए उद्देश्य हैं। यूएनएचआरसी में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने श्रीलंका के खिलाफ एक रिपोर्ट पेश की। उसमें श्रीलंका को सलाह दी गई है कि वह अपना सैनिक खर्च घटाए, भ्रष्टाचार का निर्णायक ढंग से मुकाबला करे, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा में निवेश बढ़ाए।
लेकिन विदेश मंत्री अली साबरी ने साफ कर दिया है कि श्रीलंका में मानवाधिकारों के हनन संबंधी साक्ष्य जुटाने के किसी विदेशी प्रयास का श्रीलंका सरकार समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा है कि इसकी इजाजत देना श्रीलंका के संविधान का उल्लंघन होगा।