श्रीलंका में विवाद: ईस्टर हमलों को लेकर मंत्री ने ही लगाया आरोप, संदिग्धों को बचाने की कोशिश कर रही सरकार
श्रीलंका में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टी एनएफएफ के एक नेता और मंत्री ने देश की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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एनएफएफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आरोप लगाया कि सरकार कई जांचों को कमजोर कर रही है। उनमें ईस्टर संडे के हमले भी शामिल हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस को राज्यमंत्री जयंत समरावीरा ने संबोधित किया। उन्होंने डॉ. शफी को नौकरी पर बहाल करने और उन्हें वेतन के भुगतान का आदेश देने के लिए श्रीलंका के लोक सेवा आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय की कड़ी आलोचना की।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 17 दिसंबर को ही ये साफ कर दिया था कि डॉ. शफी को नौकरी पर बहाल नहीं किया गया है। सिर्फ पिछले वेतन के भुगतान का आदेश दिया गया है। ऐसे में समरावीरा ने मंत्री रहते हुए ऐसे आरोप क्यों लगाए, इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। डॉ. शफी पहले कुरुनेगला अस्पताल के निदेशक थे।
कछुए की रफ्तार से चल रही है डॉ. शफी के खिलाफ जांच
एनएफएफ के श्रीलंका की संसद में छह सदस्य हैं। समरावीरा एनएफएफ संसदीय दल के नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. शफी शाहबदीन के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई कछुए की रफ्तार से चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. शफी को बचाने की कोशिश हो रही है। इसीलिए आरोप लगने के बाद उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजा गया था। जबकि जरूरत इस बात की थी कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती।
समरावीरा ने ये इल्जाम दोहराया कि डॉ. शफी का संबंध 2019 में हुए ईस्टर संडे आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड जहरान हाशिम से रहा है। उन्होंने हाशिम के एक सहयोगी को 44 करोड़ रुपए दिए थे। समरावीरा ने कहा कि ये बात ईस्टर संडे हमलों से जुड़े मामले में हुई एक गिरफ्तारी से सामने आई थी। ईस्टर संडे हमलों में दो सौ से अधिक लोग मारे गए थे। समरावीरा ने कहा कि डॉ. शफी के कुरुनेगला अस्पताल का निदेशक रहने के समय वहां आठ हजार महिलाओं के परिवार नियोजन संबंधी ऑपरेशन किए गए। उनमें से 601 महिलाओं ने अपने बयान में कहा था कि इस ऑपरेशन के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर दिया आरोपों का जवाब
समरावीरा के आरोपों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जून 2019 में डॉ. शफी को एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के मुताबिक लंबी छुट्टी पर भेजा गया था। उस समिति ने सिंहला महिलाओं के परिवार नियोजन ऑपरेशन से जुड़े आरोप की जांच की थी। इस बीच डॉ. शफी ने कोर्ट से जमानत हासिल कर ली। इसके बावजूद उन्हें लंबी छुट्टी पर ही रखा गया। लेकिन कानून के तहत उन्हें उनके वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।