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होर्मुज में तनाव से सहमा श्रीलंका: ईंधन बचाने के लिए कड़े नियम लागू, अब हफ्ते में चार दिन ही काम, जानिए सबकुछ
Tue, 17 Mar 2026 09:11 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 17 Mar 2026 09:11 AM IST
सार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईंधन संकट के खतरे को देखते हुए श्रीलंका ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू कर दिया है। सरकार ने ईंधन राशनिंग भी लागू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक देश का ईंधन भंडार लगभग छह सप्ताह का है, लेकिन आपूर्ति बाधित होने पर हालात गंभीर हो सकते हैं।
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श्रीलंका में होगा हफ्ते में चार दिन काम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्रीलंका की सरकार ने देश में काम के दिनों को घटाकर हफ्ते में केवल चार दिन करने का फैसला लिया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के लंबे समय तक चलने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का मुख्य मकसद देश में मौजूद ईंधन (फ्यूल) के सीमित भंडार को बचाना है।
क्यों लिया गया ये फैसला?
दरअसल, अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे युद्ध के जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। शांति के समय में दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है। युद्ध अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इस रास्ते के बंद होने से तेल की सप्लाई पूरी तरह रुक गई है।
क्या बोले अधिकारी?
आवश्यक सेवाओं के कमिश्नर-जनरल प्रभात चंद्रकीर्ति ने सोमवार को बताया कि बुधवार से सभी सरकारी संस्थान हफ्ते में केवल चार दिन ही काम करेंगे। यह नया नियम स्कूलों और यूनिवर्सिटी पर भी लागू होगा और अनिश्चित काल तक जारी रहेगा। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद सरकार ने निजी क्षेत्र से भी अनुरोध किया है कि वे हर बुधवार को छुट्टी घोषित करें।
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ये भी पढ़ें: Israel: मौत की अफवाहों के बीच नेतन्याहू ने ईरान के लोगों को दी नवरोज की शुभकामनाएं, वीडियो जारी कर भेजा संदेश
राष्ट्रपति ने दिया निर्देश
राष्ट्रपति दिसानायके ने अधिकारियों से कहा कि हमें सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अस्पताल, बंदरगाह और इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से चलती रहेंगी। सरकार ने सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों पर भी रोक लगा दी है। सरकारी कर्मचारियों से कहा गया है कि जहां तक संभव हो, वे ईधन बचाने के लिए घर से ही काम करें।
शुरू हुई तेल की राशनिंग
श्रीलंका अपनी जरूरत का सारा तेल और बिजली बनाने के लिए कोयला दूसरे देशों से खरीदता है। देश में रविवार से ही तेल की राशनिंग शुरू कर दी गई है। अब आम वाहन मालिकों को एक हफ्ते में सिर्फ 15 लीटर पेट्रोल या डीजल ही मिल सकेगा। वहीं, बस और अन्य सार्वजनिक वाहनों के लिए 200 लीटर की सीमा तय की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, देश के पास अभी लगभग छह हफ्ते का तेल बचा है, लेकिन अगर नई सप्लाई नहीं आई तो हालात बहुत गंभीर हो सकते हैं।
श्रीलंका सरकार को डर है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से उसकी अर्थव्यवस्था फिर से पटरी से उतर सकती है। साल 2022 में श्रीलंका आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया था और वह अपना विदेशी कर्ज नहीं चुका पाया था। फिलहाल देश आईएमएफ से मिले 2.9 अरब डॉलर के पैकेज की मदद से संभलने की कोशिश कर रहा है।
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क्यों लिया गया ये फैसला?
दरअसल, अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे युद्ध के जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। शांति के समय में दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है। युद्ध अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इस रास्ते के बंद होने से तेल की सप्लाई पूरी तरह रुक गई है।
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क्या बोले अधिकारी?
आवश्यक सेवाओं के कमिश्नर-जनरल प्रभात चंद्रकीर्ति ने सोमवार को बताया कि बुधवार से सभी सरकारी संस्थान हफ्ते में केवल चार दिन ही काम करेंगे। यह नया नियम स्कूलों और यूनिवर्सिटी पर भी लागू होगा और अनिश्चित काल तक जारी रहेगा। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद सरकार ने निजी क्षेत्र से भी अनुरोध किया है कि वे हर बुधवार को छुट्टी घोषित करें।
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राष्ट्रपति ने दिया निर्देश
राष्ट्रपति दिसानायके ने अधिकारियों से कहा कि हमें सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अस्पताल, बंदरगाह और इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से चलती रहेंगी। सरकार ने सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों पर भी रोक लगा दी है। सरकारी कर्मचारियों से कहा गया है कि जहां तक संभव हो, वे ईधन बचाने के लिए घर से ही काम करें।
शुरू हुई तेल की राशनिंग
श्रीलंका अपनी जरूरत का सारा तेल और बिजली बनाने के लिए कोयला दूसरे देशों से खरीदता है। देश में रविवार से ही तेल की राशनिंग शुरू कर दी गई है। अब आम वाहन मालिकों को एक हफ्ते में सिर्फ 15 लीटर पेट्रोल या डीजल ही मिल सकेगा। वहीं, बस और अन्य सार्वजनिक वाहनों के लिए 200 लीटर की सीमा तय की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, देश के पास अभी लगभग छह हफ्ते का तेल बचा है, लेकिन अगर नई सप्लाई नहीं आई तो हालात बहुत गंभीर हो सकते हैं।
श्रीलंका सरकार को डर है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से उसकी अर्थव्यवस्था फिर से पटरी से उतर सकती है। साल 2022 में श्रीलंका आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया था और वह अपना विदेशी कर्ज नहीं चुका पाया था। फिलहाल देश आईएमएफ से मिले 2.9 अरब डॉलर के पैकेज की मदद से संभलने की कोशिश कर रहा है।
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