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Sri lanka Crisis: हालात पूरे दक्षिण एशिया में एक जैसे, तो फिर श्रीलंका में ही क्यों आया संकट?

Thu, 09 Jun 2022 07:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 09 Jun 2022 07:19 PM IST
सार

विश्लेषकों के मुताबिक श्रीलंका के संकटग्रस्त होने का एक प्रमुख कारण यह रहा कि राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की सरकार समय पर संकट का अंदाजा लगाने और उसे टालने के लिए जरूरी कदम उठाने में नाकाम रही। उसका नतीजा हुआ कि विदशी मुद्रा भंडार चूक गया...

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sri lanka crisis: The kind of economic conditions that Lanka had to face, the situation is similar in many other South Asian countries also
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे - फोटो : Social media

विस्तार

श्रीलंका को जिस तरह की आर्थिक स्थितियों का सामना करना पड़ा, वैसे हालात कई दूसरे दक्षिण एशियाई देशों में भी हैं। लेकिन वहां श्रीलंका जैसी अफरातफरी नहीं फैली है, तो उसकी वजह वहां की सरकारों की सतर्कता है। इसके बावजूद आम राय है कि दक्षिण एशिया के लिए आने वाले दो महीने चुनौती भरे हैं।

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स्वीडन की इन्वेस्टमेंट कंपनी टुंड्रा फॉन्डर के मुख्य निवेश अधिकारी मैतियास मार्टिनसन ने कहा है कि दक्षिण एशिया के सामने एक बड़ा तूफान खड़ा है। टुंड्रा फॉन्डर कंपनी पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में निवेश करती रही है। मैतियास को इन देशों में बने हालात की प्रत्यक्ष जानकारी है। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘दक्षिण एशियाई बाजारों के लिए अगले दो महीने पीड़ादायक होंगे। इस बात की पूरी संभावना है कि वहां हमें ऊंची महंगाई, ब्याज दरों में वृद्धि, और मुद्राओं का अवमूल्यन देखने को मिलेगा।’

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सरकार की दूरदर्शिता हुई फेल

विश्लेषकों के मुताबिक श्रीलंका के संकटग्रस्त होने का एक प्रमुख कारण यह रहा कि राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की सरकार समय पर संकट का अंदाजा लगाने और उसे टालने के लिए जरूरी कदम उठाने में नाकाम रही। उसका नतीजा हुआ कि विदशी मुद्रा भंडार चूक गया। इस कारण ईंधन, खाद्य पदार्थों, दवाओं आदि की देश में भारी कमी हो गई। विदेशी मुद्रा के अभाव के कारण ही श्रीलंका कर्ज डिफॉल्टर भी हो गया।

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अब पाकिस्तान, नेपाल, और मालदीव में भी आर्थिक मुश्किलें बढ़ने की खबर मिल रही हैं। बाजार की खास निगाह पाकिस्तान के अगले बजट पर है। उधर मालदीव के सरकारी बॉन्ड जल्द ही मैच्योर होने वाले हैं, जिन्हें वहां की सरकार को चुकाना होगा। मालदीव और श्रीलंका में एक समानता यह है कि दोनों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। कोरोना महामारी के दौर में पर्यटन लगभग ठप हो गया था, जिसका इन दोनों देशों के विदेशी मुद्रा भंडार पर बहुत बुरा असर पड़ा। अब यूक्रेन युद्ध के कारण विश्व बाजार में ईंधन और दूसरी चीजों की महंगाई ने श्रीलंका के साथ-साथ पाकिस्तान, नेपाल, और मालदीव जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

श्रीलंका के बारे में कई किताबें लिख चुके रोहन गुणारत्ने ने कहा है कि उनका देश ‘पहला डोमिनो बना, जो गिर पड़ा।’ दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ समझे जाने वाले गुणारत्ने ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘श्रीलंका की कमजोर अर्थव्यवस्था पर्यटन क्षेत्र में हुए नुकसान, विदेशों से कमा कर भेजी जाने वाली रकम में गिरावट, और ऊर्जा की महंगाई का शिकार हो गई।’

कोविड से ध्वस्त हुआ पर्यटन

वैसे कई विशेषज्ञों की राय है कि श्रीलंका में ये मुसीबत इसलिए भी पैदा हुई, क्योंकि देश की सरकार दूरदृष्टि दिखाने में विफल रही। मार्टिसन ने कहा- ‘2019 में गोटबया राजपक्षे के नया राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद नई सरकार ने टैक्स दरें घटा कर अर्थव्यवस्था में गति लाने की कोशिश की। ये उपाय कारगर हो सकता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण पर्यटन क्षेत्र ध्वस्त हो गया। इससे श्रीलंका की कर्ज चुकाने की क्षमता खत्म हो गई।’



विश्लेषकों का कहना है कि जब ये हालत बन रही थे, तभी राजपक्षे सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जाना चाहिए था। मार्टिनसन ने कहा- ‘लेकिन सरकार आईएमएफ के पास नहीं जाना चाहती थी, क्योंकि तब उसे आईएमएफ की कठिन शर्तें माननी पड़तीं। उन्होंने पर्यटन के उठ खड़ा होने की उम्मीद में जोखिम मोल लिया, जो उलटा पड़ गया।’ विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे दूसरे दक्षिण एशियाई देशों ने सीख ली है। इसलिए संभव है कि श्रीलंका जैसी चुनौती होने के बावजूद वे श्रीलंका जैसे संकट से बच जाएं।

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