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Sri Lanka: विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनते ही सख्ती शुरू, उखाड़े गए प्रदर्शनकारियों के तंबू, 50 से ज्यादा घायल

Fri, 22 Jul 2022 09:09 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 22 Jul 2022 09:09 AM IST
सार

सशस्त्र बलों की कार्रवाई के बीच एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि रानिल विक्रमसिंघे हमें खत्म करना चाहते हैं लेकिन हम कभी हार नहीं मानेंगे। हम अपने देश को ऐसी घिनौनी राजनीति से मुक्त बनाना चाहते हैं।

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Sri Lanka Crisis Army Action Against Protesters People Removed From  President's Secretariat
विरोध कर रहे लोगों के शिविरों को किया नष्ट - फोटो : ANI

विस्तार

श्रीलंका में नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के पदभार संभालने के ठीक एक दिन बाद शुक्रवार तड़के पुलिस और सेना ने साझा रूप से कोलंबो के सरकार विरोधी प्रदर्शन शिविर पर छापेमारी की और 9 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में कई लोग घायल भी हुए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सेना पर उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए। अब राष्ट्रपति सचिवालय की कमान पूरी तरह से सुरक्षाबलों के हाथ में आ गई है।

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प्रदर्शनकारी यहां पिछले 105 दिनों से सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे। जबकि सुरक्षाबलों ने यहां उनके तंबू तक नष्ट कर दिए। ये लोग गोतबाया के इस्तीफा देने के बाद से ही विक्रमसिंघे को उनका दोस्त होने का आरोप लगाते हुए उनसे भी पद छोड़ने की मांग पर अड़े थे।
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शुक्रवार को सुरक्षाबलों की कार्रवाई में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की उम्र 26 से 58 वर्ष बताई गई है। पुलिस और सेना की टीम बिना किसी चेतावनी के वहां पहुंचीं और प्रदर्शनकारियों को डंडों व राइफलों से मारना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई में करीब 50 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें हैं। इनमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं।




सशस्त्र बलों की कार्रवाई के बीच एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि रानिल विक्रमसिंघे हमें खत्म करना चाहते हैं लेकिन हम कभी हार नहीं मानेंगे। हम अपने देश को ऐसी घिनौनी राजनीति से मुक्त बनाना चाहते हैं। साथ ही कहा कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति सचिवालय के परिसर के बाहर सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के टेंटों को तोड़ा जा रहा है।



कतार में इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में न खाना है, न ईंधन है और न पैसा है। हम क्या करेंगे और हम कैसे जीवित रहेंगे? मैं यहां अपना पासपोर्ट लेने और नौकरी के लिए कतर जाने के लिए आया हूं। लोग यहां केवल इसके लिए हैं।

विक्रमसिंघे ने सहपाठी रहे दिनेश गुणवर्धने को नियुक्त किया पीएम
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने वरिष्ठ नेता और अपने सहपाठी रहे दिनेश गुणवर्धने को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। गुणवर्धने (73) को अप्रैल में, पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के कार्यकाल में गृहमंत्री बनाया गया था। वह विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 1949 में जन्मे गुणवर्धने महाजन एमईपी के नेता हैं, जो सत्तारूढ़ एसएलपीपी का घटक दल है। 1979 में नीदरलैंड से लौटने के बाद दिनेश ने अपने पिता फिलिप गुणवर्धने की जगह पार्टी का नेतृत्व किया। उनके पिता 1948 में देश की आजादी से पहले ब्रिटिश काल में वामपंथी आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। पीएम पद पर दिनेश की नियुक्ति प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन के पास से हटाने के बाद हुई।

मंत्रिमंडल के 18 सदस्यों ने ली शपथ
श्रीलंकाई मंत्रिमंडल में राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने दिनेश गुणवर्धने की पीएम पद पर नियुक्ति समेत 18 सदस्यों को मंत्री नियुक्त किया। मंत्रिमंडल में पीएम के अलावा 17 सदस्यों ने शुक्रवार को शपथ ली। वित्तमंत्री रहे अली साबरी को विदेश मंत्री बनाया गया है। लोक प्रशासन गृह मामले, प्रांतीय परिषद व स्थानीय सरकार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार गुणवर्धने को सौंपा गया है। अन्य मंत्रियों को उनके पुराने मंत्रालय ही सौंपे गए हैं। वित्त मंत्रालय का प्रभार विक्रमसिंघे के पास है। राष्ट्रपति ने कहा, वह देश में मौजूद सबसे खराब आर्थिक संकट को दूर करने के लिए सर्वदलीय सरकार के गठन का कदम उठा रहे हैं। 

संयुक्त राष्ट्र का समावेशी विचार-विमर्श पर जोर
श्रीलंका में विश्व निकाय के शीर्ष अधिकारी हैना सिंगर हामदी ने देश में सभी पक्षकारों से मौजूदा आर्थिक संकट और लोगों की शिकायतों का हल करने के लिए व्यापक तथा समावेशी रूप से विचार-विमर्श करने का आह्वान किया है। महासचिव एंतोनियो गुटेरस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा, हामदी ने नए राष्ट्रपति को सत्ता का सांविधानिक रूप से हस्तांतरण करने को मान्यता दी है।

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