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Sri Lanka Crisis: आर्थिक मुसीबत के मारे लोगों ने शुरू की राष्ट्रपति राजपक्षे को हटाने की मुहिम

Sat, 02 Apr 2022 01:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 02 Apr 2022 01:46 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने भी इस राय से सहमति जताई है कि वर्तमान दुर्दशा राजपक्षे सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है। उनके मुताबिक कोरोना महामारी के समय से ही राजपक्षे सरकार हालात को संभालने में नाकाम रही है। महामारी के दौरान पर्यटन ठहर जाने से सरकार का खजाना खाली हो गया...

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Sri Lanka Crisis: People started campaign to remove President Gotabaya Rajapaksa due to financial crisis
श्रीलंका में विरोध करतीं महिलाएं - फोटो : Agency

विस्तार

अत्यंत गहरा चुकी आर्थिक मुसीबत के कारण श्रीलंका में भड़के जनाक्रोश के सामने राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की सरकार लाचार नजर आ रही है। गुजरे महीनों में आर्थिक संकट से राहत पाने के लिए श्रीलंका सरकार ने जो भी हाथ-पांव मारे, वे नाकाम साबित हुए हैं। खाने-पीने की चीजों के भी लाले पड़ने की वजह से पहले खबर आई कि बड़ी संख्या में लोग श्रीलंका से समुद्र के रास्ते भाग कर भारत के तमिलनाडु राज्य में जा रहे हैं। इस बीच देश भर में सड़कों पर विरोध जताए जाने की खबरें भी आती रही हैं। गुरुवार को संकेत मिला कि अब हालात बेकाबू हो रहे हैं।

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बिजली न होने से टल रहे ऑपरेशन

विश्लेषज्ञों के मुताबिक श्रीलंका की मुख्य समस्या विदेशी मुद्रा भंडार का खाली हो जाना है। इसकी वजह से सरकार जनता की जरूरत के मुताबिक ईंधन, खाद्य पदार्थों, और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात नहीं कर पा रही है। ईंधन की कमी के कारण कई पेट्रोल पंपों पर लोगों को 12 से 13 घंटो तक कतार में खड़ा रहना पड़ा है। इस बीच कई सरकारी अस्पतालों में बिजली न होने के कारण रूटीन सर्जरी को टाला जा रहा है।

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राहत पाने के लिए राजपक्षे सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का दरवाजा खटखटाया है। इसके अलावा उसने भारत और चीन से भी वित्तीय मदद ली है। खबर है कि भारत और चीन अतिरिक्त वित्तीय मदद देने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे श्रीलंका को तीन बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। खबरों के मुताबिक श्रीलंका को दोनों देशों में प्रत्येक से 1.5 बिलियन डॉलर की मदद का आश्वासन मिला है।
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लेकिन अब आम जनता का सब्र टूटने के संकेत मिल रहे हैं। गुरुवार को राजधानी कोलंबो में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। उस दौरान कुछ लोगों ने छिटपुट हिंसा की। प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजपक्षे के आवास की तरफ बढ़ने लगे। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके संवाददाता से कई लोगों ने कहा कि राष्ट्रपति आवास की तरफ जाने का फैसला अचानक लिया गया। लोगों ने बताया कि ईंधन की कमी और बिजली में कटौती के कारण उनका जीना मुहाल हो गया है। इसीलिए अब वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैँ।

पर्यटन बंद होने से नुकसान

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आम लोगों में राष्ट्रपति राजपक्षे के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोग अपनी मौजूदा मुश्किलों के लिए गोटबया राजपक्षे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दूरदराज के इलाकों से प्रदर्शन में शामिल होने आए एक नौजवान ने अल-जजीरा से कहा- ‘हालत इतनी खराब है कि हम दो वक्त का खाना भी नहीं खा पा रहे हैं। ये सारी मुसीबतें राष्ट्रपति ने पैदा की हैं। उन्हें अपनी गद्दी छोड़नी ही होगी।’



विशेषज्ञों ने भी इस राय से सहमति जताई है कि वर्तमान दुर्दशा राजपक्षे सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है। उनके मुताबिक कोरोना महामारी के समय से ही राजपक्षे सरकार हालात को संभालने में नाकाम रही है। महामारी के दौरान पर्यटन ठहर जाने से सरकार का खजाना खाली हो गया। जब इसके संकेत मिले, सरकार को तभी आईएमएफ के पास जाना चाहिए था। लेकिन वह अनिर्णय की अवस्था में रही, जिसकी बहुत महंगी कीमत श्रीलंका के लोगों को चुकानी पड़ रही है।

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