Sri Lanka Crisis: किस बूते पूर्व सेनाध्यक्ष फोंसेका ने राष्ट्रपति पद के लिए उछाला अपना नाम?
पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की तरह ही फील्ड मार्शल फोंसेका की भी नायक जैसी छवि रही है। 2009 में जब अलगाववादी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को कुचला गया था, तो उस समय श्रीलंका की सेना का नेतृत्व फोंसेका ने किया था। उसके बाद 2010 में उन्होंने महिंदा राजपक्षे को सियासी चुनौती दी, लेकिन तब वे इस कोशिश में नाकाम रहे...
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श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल सरत फोंसेका ने अपना दावा पेश कर दिया है। फोंसेका ने कहा है कि वे मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। इसलिए अगर संसद का बहुमत इसे स्वीकार करे, तो वे राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार हैं। पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की तरह ही फील्ड मार्शल फोंसेका की भी नायक जैसी छवि रही है। 2009 में जब अलगाववादी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को कुचला गया था, तो उस समय श्रीलंका की सेना का नेतृत्व फोंसेका ने किया था। उसके बाद 2010 में उन्होंने महिंदा राजपक्षे को सियासी चुनौती दी, लेकिन तब वे इस कोशिश में नाकाम रहे।
अब देश में जारी उथल-पुथल के बीच फोंसेका ने फिर से खुद को आगे किया है। कुछ रोज पहले उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी दल समगी जना बुलावेगया (एसजेपी) के नेता सजित प्रेमदासा के नाम का समर्थन किया था। लेकिन अब उन्होंने खुद अपना नाम आगे बढ़ाया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक 71 वर्षीय फोंसेका की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं पहले भी जाहिर रही हैं। वे फिलहाल संसद के सदस्य भी हैं। इसीलिए उनकी ताजा पेशकश को गंभीरता से लिया जा रहा है। देश जिस अभूतपूर्व अस्थिरता में है, उसके बीच सेना के रुख को लेकर लगातार कयास लगाए गए हैं। समझा जाता है कि अगर सेना ने उनका पक्ष लिया, तो राष्ट्रपति के लिए उनके नाम पर सहमति बन सकती है।
फोंसेका उन विपक्षी सांसदों में हैं, जो हाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने उस दौरान जिन दो सांसदों पर हमले नहीं किए, उनमें एक 71 वर्षीय फोंसेका भी हैं। इसे बात का संकेत माना गया है कि सरकार विरोधी जन समूहों में फोंसेका को लेकर आदर का भाव बना हुआ है।
फोंसेका ने अब कहा है कि अगर उन्हें राष्ट्रपति पद दिया गया, तो वे उन्हें पूरा भरोसा है कि वे देश को मौजूदा संकट से निकाल लेंगे। उन्होंने कहा- ‘इस संकट से देश को निकालना कोई असंभव काम नहीं है। अगर मुझे राष्ट्रपति बनाया गया, तो अवश्य ही मैं आम जनता की बात सुनूंगा। जब मैं सेनाध्यक्ष बना था, तो यह बात तब की सरकार और कई जनरलों को भी पसंद नहीं आई थी। लेकिन तब मैंने उसकी परवाह नहीं की, क्योंकि तब मुझे मालूम था कि अगर मैंने अच्छा काम किया, तो मैं टिकूंगा और अगर ऐसा मैंने नहीं किया, तो मुझे घर वापस लौटना होगा।’
श्रीलंका की संसद अगले राष्ट्रपति का चुनाव 20 जुलाई को करेगी। गुरुवार को गोटाबया राजपक्षे ने ई-मेल के जरिए राष्ट्रपति पद से अपना इस्तीफा संसद के स्पीकर को भेज दिया। इससे बिना किसी दिक्कत के नए राष्ट्रपति के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही अगले राष्ट्रपति के लिए संभावित नामों की चर्चा जोर पकड़ गई है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर गहरे मतभेद हैं।
समझा जाता है कि संसद में बहुमत के कारण राजपक्षे की एसएलपीपी पार्टी की नया राष्ट्रपति चुनने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रहेगी। एसएलपीपी में फील्ड मार्शन फोंसेका को लेकर विरोध भाव रहा है। क्या अब उनके मामले में पार्टी का रुख बदलेगा, इस पर पर्यवेक्षकों की नजर है।