स्पेस एक्स पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को भेजेगा अंतरिक्ष में, लॉन्च के दौरान मौजूद रहेंगे राष्ट्रपति ट्रंप

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 24 May 2020 10:34 AM IST
विज्ञापन
नासा के अंतरिक्ष यात्री
नासा के अंतरिक्ष यात्री - फोटो : SpaceX

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
स्पेस एक्स की शुरुआत में बहुत से लोगों को इस कंपनी की कामयाबी को लेकर संशय था। लेकिन एलन मस्क की स्पेस एक्स उम्मीदों पर खरी उतरी और यह बुधवार को नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाते ही इतिहास रच देगी। अमेरिकी जमीन से यह नौ साल में पहली चालक दल उड़ान होगी। 
विज्ञापन

इस ऐतिहासिक घड़ी का साक्षी बनने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अन्य दर्शकों के साथ फ्लोरिडा के कैनिडी स्पेस सेंटर में मौजूद होंगे। सेंटर ने कोरोना वायरस के कारण महीनों के लॉकडाउन के बाद इस उड़ान को हरी झंड़ी दी है। 
वायरस प्रतिबंधों के चलते, सामान्य लोगों से कहा गया है कि वह लाइव स्ट्रीम के जरिए इस लॉन्च को देखें। बता दें कि, क्रू ड्रैगन को फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की ओर लॉन्च किया जाएगा। 

अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए निजी अंतरिक्ष यान विकसित करने के उद्देश्य से नासा के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इस कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में की गई थी। 

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप इसे अंतरिक्ष में अमेरिका के वर्चस्व के लिए अपनी रणनीति के प्रतीक के रूप में देखते हैं। फिर वो चाहें, अंतरिक्ष सेना का निर्माण हो या सामान्य सेना को मजबूत करना। उन्होंने नासा को चंद्रमा पर 2024 तक फिर से पहुंचने का आदेश दिया है। जो एक असंभव समय सारिणी है, लेकिन जिसने अंतरिक्ष एजेंसी को एक बढ़ावा दिया है।

आईएसएस के पहले घटकों को लॉन्च किए जाने के बाद से 22 वर्षों में, अंतरिक्ष यान को नासा द्वारा विकसित किया जाता रहा है और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी वहां दल को भेजती रही है। 

नासा अलस्ट्रीयस शटल प्रोग्राम की मदद से पिछले तीन दशकों में दर्जनों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेज चुका है।  

लेकिन उसके ऐसा करने में अब तक 135 फ्लाइट्स के लिए 200 बिलियन डॉलर का खर्च आ चुका है। इसके अलावा दो दुर्घटनाओं के बाद से इस पर रोक लगा दी गई। आखिरी बार, अटलांटिस शटल 21 जुलाई, 2011 को लैंड किया था। 

इसके बाद, नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने रूसी भाषा सीखी और कजाकिस्तान से रूसी सोयूज रॉकेट में आईएसएस की यात्रा की। यह अमेरिका और रूस के बीच एक ऐसी साझेदारी है, जो दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव से बची रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X