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South Korea: अभियोजकों ने यून पर मार्शल लॉ के आरोप में लगाया अभियोग, दक्षिण कोरियाई समाचार पत्रों की रिपोर्ट

Sun, 26 Jan 2025 04:30 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 26 Jan 2025 04:30 PM IST
सार

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक येओल की तरफ से लगाए अल्पकालीन मॉर्शल लॉ के बाद से देश की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिली है। वहीं इस मामले में कोर्ट में ये बहस चल रही है कि क्या राष्ट्रपति यून पर मॉर्शल लॉ लगाने के लिए अभियोग चलाना चाहिए या नहीं?

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South Korean prosecutors indict impeached President Yoon Suk Yeol over his martial law, reports say
यून सुक योल - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण कोरियाई अभियोक्ताओं ने रविवार को महाभियोग लगाए गए राष्ट्रपति यून सुक येओल पर पिछले महीने मार्शल लॉ लागू करने के लिए अभियोग लगाया। दक्षिण कोरिया की प्रमुख समाचार एजेंसी योनहाप ने बताया कि सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट अभियोक्ताओं के कार्यालय ने राष्ट्रपति यून सुक येओल पर 3 दिसंबर को देश में बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल मचाने वाले उनके आदेश के संबंध में विद्रोह करने का आरोप लगाया है। अन्य दक्षिण कोरियाई मीडिया प्रकाशनों ने भी इसी तरह की रिपोर्ट की है।
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मार्शल लॉ आदेश के लिए गिरफ्तार किए गए हैं यून
इससे पहले मार्शल लॉ आदेश के लिए राष्ट्रपति यून सुक येओल पर महाभियोग लगाया गया था और उन्हें गिरफ्तार किया गया था। संवैधानिक न्यायालय अलग से विचार-विमर्श कर रहा है कि यून सुक येओल को राष्ट्रपति के रूप में औपचारिक रूप से बर्खास्त किया जाए या उन्हें बहाल किया जाए।
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यून ने मार्शल लॉ को शासन का एक वैध कार्य बताया
वहीं राष्ट्रपति यून सुक येओल ने किसी भी गलत काम से दृढ़ता से इनकार किया है, उन्होंने अपने मार्शल लॉ को शासन का एक वैध कार्य बताया है जिसका उद्देश्य उदार-नियंत्रित नेशनल असेंबली के खतरे के बारे में लोगों को जागरूक करना है जिसने उनके एजेंडे में बाधा डाली और शीर्ष अधिकारियों पर महाभियोग लगाया। बता दें कि, मार्शल लॉ की घोषणा के दौरान, यून सुक येओल ने असेंबली को 'अपराधियों का अड्डा' कहा और 'बेशर्म उत्तर कोरिया के अनुयायियों और राज्य विरोधी ताकतों' को खत्म करने की कसम खाई।
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जबकि इस मामले में उच्च पदस्थ अधिकारियों के भ्रष्टाचार जांच कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ घोषित करके और नेशनल असेंबली को सील करने के लिए सेना और पुलिस अधिकारियों को भेजकर 'दंगा' किया और संविधान को कमजोर करने की कोशिश की। राष्ट्रपति यून सुक येओल पर विद्रोह, सत्ता का दुरुपयोग और संसद में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था।
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