फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   South Africa president says persecution of whites 'false narrative' as Musk repeats genocide claim

South Africa: सिरिल रामाफोसा ने खारिज किया श्वेत लोगों के उत्पीड़न का दावा, ट्रंप और मस्क ने लगाया था आरोप

Tue, 25 Mar 2025 05:19 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, केप टाउन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, केप टाउन। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 25 Mar 2025 05:19 AM IST
सार

South Africa: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने श्वेत अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के दावे को पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क और कुछ श्वेत समूहों के आरोपों के जवाब में आया, जिन्होंने सरकार पर भेदभाव और हिंसा बढ़ाने का आरोप लगाया था।

विज्ञापन
South Africa president says persecution of whites 'false narrative' as Musk repeats genocide claim
सिरिल रामाफोसा - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने सोमवार कहा कि उनके देश में श्वेत लोगों के उत्पीड़न का दावा एक पूरी तरह से झूठी कहानी है। इस बयान के जरिए रामाफोसा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अरबपति कारोबारी एलन मस्क और देश के कुछ श्वेत अल्पसंख्यक समूहों की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन करने की कोशिश की। 

विज्ञापन


मस्क अक्सर दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत-नेतृत्व वाली सरकार पर श्वेत लोगों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं। इस सप्ताहांत में एक सोशल मीडिया पोस्ट में मस्क ने दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका के कुछ राजनेता सक्रिय रूप से श्वेत लोगों के नरसंहार को बढ़ावा दे रहे हैं। 
विज्ञापन


राष्ट्रपति रामाफोसा ने अपने साप्ताहिक संदेश में कहा, दक्षिण अफ्रीका के लोगों को किसी भी बाहरी घटनाओं को हमें बांटने या एक-दूसरे के खिलाफ भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। खासकर, हमें इस झूठे दावे को चुनौती देनी चाहिए कि हमारे देश में एक विशेष नस्ल या संस्कृति के लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


रामाफोसा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा ट्रंप, मस्क और अन्य लोगों के आरोपों की ओर था। जिनका आरोप था कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार जानबूझकर अफ्रीकानेर नामक एक श्वेत अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रही है और उनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए एक कानून ला रही है। 

ये भी पढ़ें: US: ट्रंप प्रशासन को एक और कोर्ट से झटका, दो ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने पर लगाई अस्थायी रोक


ट्रंप ने पिछले महीने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती की गई थी और अफ्रीकानेरों को अमेरिका में शरण देने की पेशकश की गई थी। अफ्रीकानेर मुख्य रूप से डच और फ्रांसीसी उपनिवेशियों के वंशज हैं, जो 300 साल पहले दक्षिण अफ्रीका आए थे। ये वही समूह था, जिसने रंगभेद करने वाली सरकार समर्थन किया था, जो अश्वेतों के साथ भेदभाव करती थी। हालांकि, 1994 में रंगभेद खत्म होने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने नस्लीय समूहों के बीच सामंजस्य बनाने में काफी हद तक सफलता हासिल की है। 

दक्षिण अफ्रीका में जन्मे मस्क ने अपने सोशल मीडिया खाते पर बीते शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका की एक सियासी रैली का हवाला दिया, जिसमें एक वामपंथी विपक्षी दल के अश्वेत नेताओं ने एक गीत गाया, जिसमें 'बूअर (अफ्रीकानेर किसानों) को मारो' जैसी पंक्तियां थीं। मस्क ने लिखा था, बहुत कम लोग जानते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में एक प्रमुख सियासी दल सक्रिय रूप से श्वेत नरसंहार को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने इस रैली का वीडियो भी साझा किया था। 

संबंधित वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed