South Africa: सिरिल रामाफोसा ने खारिज किया श्वेत लोगों के उत्पीड़न का दावा, ट्रंप और मस्क ने लगाया था आरोप
South Africa: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने श्वेत अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के दावे को पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क और कुछ श्वेत समूहों के आरोपों के जवाब में आया, जिन्होंने सरकार पर भेदभाव और हिंसा बढ़ाने का आरोप लगाया था।
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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने सोमवार कहा कि उनके देश में श्वेत लोगों के उत्पीड़न का दावा एक पूरी तरह से झूठी कहानी है। इस बयान के जरिए रामाफोसा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अरबपति कारोबारी एलन मस्क और देश के कुछ श्वेत अल्पसंख्यक समूहों की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन करने की कोशिश की।
मस्क अक्सर दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत-नेतृत्व वाली सरकार पर श्वेत लोगों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं। इस सप्ताहांत में एक सोशल मीडिया पोस्ट में मस्क ने दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका के कुछ राजनेता सक्रिय रूप से श्वेत लोगों के नरसंहार को बढ़ावा दे रहे हैं।
राष्ट्रपति रामाफोसा ने अपने साप्ताहिक संदेश में कहा, दक्षिण अफ्रीका के लोगों को किसी भी बाहरी घटनाओं को हमें बांटने या एक-दूसरे के खिलाफ भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। खासकर, हमें इस झूठे दावे को चुनौती देनी चाहिए कि हमारे देश में एक विशेष नस्ल या संस्कृति के लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
रामाफोसा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा ट्रंप, मस्क और अन्य लोगों के आरोपों की ओर था। जिनका आरोप था कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार जानबूझकर अफ्रीकानेर नामक एक श्वेत अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रही है और उनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए एक कानून ला रही है।
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ट्रंप ने पिछले महीने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती की गई थी और अफ्रीकानेरों को अमेरिका में शरण देने की पेशकश की गई थी। अफ्रीकानेर मुख्य रूप से डच और फ्रांसीसी उपनिवेशियों के वंशज हैं, जो 300 साल पहले दक्षिण अफ्रीका आए थे। ये वही समूह था, जिसने रंगभेद करने वाली सरकार समर्थन किया था, जो अश्वेतों के साथ भेदभाव करती थी। हालांकि, 1994 में रंगभेद खत्म होने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने नस्लीय समूहों के बीच सामंजस्य बनाने में काफी हद तक सफलता हासिल की है।
दक्षिण अफ्रीका में जन्मे मस्क ने अपने सोशल मीडिया खाते पर बीते शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका की एक सियासी रैली का हवाला दिया, जिसमें एक वामपंथी विपक्षी दल के अश्वेत नेताओं ने एक गीत गाया, जिसमें 'बूअर (अफ्रीकानेर किसानों) को मारो' जैसी पंक्तियां थीं। मस्क ने लिखा था, बहुत कम लोग जानते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में एक प्रमुख सियासी दल सक्रिय रूप से श्वेत नरसंहार को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने इस रैली का वीडियो भी साझा किया था।
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