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सोशल मीडिया के बगैर भी युवा खुश, जिन देशों में प्रतिबंध वहां ज्यादा संतुष्टि; फिनलैंड फिर बना सबसे खुशहाल देश
Fri, 20 Mar 2026 04:30 AM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/हेलसिंकी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/हेलसिंकी
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 20 Mar 2026 04:30 AM IST
सार
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खुशहाली केवल आर्थिक समृद्धि पर निर्भर नहीं करती। नॉर्डिक देशों की सफलता के पीछे मजबूत कल्याणकारी प्रणाली, समानता और उच्च जीवन प्रत्याशा है। वहीं, दूसरी ओर अफगानिस्तान, सिएरा लियोन और मलावी जैसे देश रैंकिंग में सबसे नीचे हैं।
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विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2026
- फोटो : PTI
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विस्तार
दुनियाभर के देशों में युवा सोशल मीडिया के बगैर भी ज्यादा खुश हैं। डिजिटल दुनिया के शोर से दूर रहने या सोशल मीडिया का बेहद सीमित उपयोग करने वाले 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं का जीवन स्तर उन लोगों की तुलना में कहीं बेहतर है, जो घंटों स्क्रीन पर बिताते हैं।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा बृहस्पतिवार को प्रकाशित विश्व खुशहाली रिपोर्ट-2026 में बताया गया है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से युवाओं के खुशहाली स्तर में भारी गिरावट आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कॉलेज छात्र अब निजी तौर पर यह मानने लगे हैं कि वे सोशल मीडिया के बिना एक बेहतर और शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं। वे इन प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल एक सामाजिक मजबूरी के तहत कर रहे हैं। रिपोर्ट में फिनलैंड को लगातार नौवें वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश पाया गया है। वहीं, कुल 147 देशों की सूची में भारत 116वें स्थान पर है। हालांकि भारत अभी भी रैंकिंग में काफी नीचे है, लेकिन 2025 की 118वीं रैंक की तुलना में दो रैंक का सुधार देखा गया है।
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सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर क्या बोले विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी डिजिटल खपत और सामाजिक संबंधों के बीच असंतुलन खुशहाली के स्तर को प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग दुनिया भर के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुष्टि के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन देशों में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध है, वहां के युवा वास्तविक सामाजिक संबंधों, परिवार और शारीरिक गतिविधियों को समय देने वाले युवा मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ और संतुष्ट हैं। एजेंसी
डिजिटल दुनिया से युवाओं का मोहभंग : रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और अन्य देशों के कॉलेज छात्र अब सोशल मीडिया से दूरी बनाना चाहते हैं। कई छात्र यह मानते हैं कि वे इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग केवल दबाव में कर रहे हैं, जबकि वे ऐसी दुनिया को प्राथमिकता देंगे जहां इन एप का अस्तित्व ही न हो।
अमेरिका-कनाडा में गिरावट
रिपोर्ट में आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन व नॉर्वे जैसे देश शीर्ष-10 में शामिल रहे। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में 25 वर्ष से छोटे युवाओं के जीवन मूल्यांकन में गत एक दशक में काफी गिरावट आई है। यह अध्ययन 140 देशों और क्षेत्रों के लगभग एक लाख लोगों के दिए गए उत्तरों पर आधारित थी, जिनसे उनके जीवन का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया था।
केवल आर्थिक समृद्धि ही सब कुछ नहीं
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खुशहाली केवल आर्थिक समृद्धि पर निर्भर नहीं करती। नॉर्डिक देशों की सफलता के पीछे मजबूत कल्याणकारी प्रणाली, समानता और उच्च जीवन प्रत्याशा है। वहीं, दूसरी ओर अफगानिस्तान, सिएरा लियोन और मलावी जैसे देश रैंकिंग में सबसे नीचे हैं।
फिनलैंड और कोस्टारिका का उदाहरण
फिनलैंड (शीर्ष 1) और कोस्टा रिका (नंबर चार) जैसे देशों के लोग तकनीक से ज्यादा सामाजिक समानता, प्रकृति और आपसी भाईचारे को महत्व देते लगे हैं। ऑक्सफोर्ड के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जान-इमैनुअल डी नेवे ने कहा, यह उनके सामाजिक जीवन की गुणवत्ता और मौजूदा स्थिरता के कारण है।
अन्य वीडियो
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा बृहस्पतिवार को प्रकाशित विश्व खुशहाली रिपोर्ट-2026 में बताया गया है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से युवाओं के खुशहाली स्तर में भारी गिरावट आई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कॉलेज छात्र अब निजी तौर पर यह मानने लगे हैं कि वे सोशल मीडिया के बिना एक बेहतर और शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं। वे इन प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल एक सामाजिक मजबूरी के तहत कर रहे हैं। रिपोर्ट में फिनलैंड को लगातार नौवें वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश पाया गया है। वहीं, कुल 147 देशों की सूची में भारत 116वें स्थान पर है। हालांकि भारत अभी भी रैंकिंग में काफी नीचे है, लेकिन 2025 की 118वीं रैंक की तुलना में दो रैंक का सुधार देखा गया है।
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सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर क्या बोले विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी डिजिटल खपत और सामाजिक संबंधों के बीच असंतुलन खुशहाली के स्तर को प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग दुनिया भर के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुष्टि के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन देशों में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध है, वहां के युवा वास्तविक सामाजिक संबंधों, परिवार और शारीरिक गतिविधियों को समय देने वाले युवा मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ और संतुष्ट हैं। एजेंसी
डिजिटल दुनिया से युवाओं का मोहभंग : रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और अन्य देशों के कॉलेज छात्र अब सोशल मीडिया से दूरी बनाना चाहते हैं। कई छात्र यह मानते हैं कि वे इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग केवल दबाव में कर रहे हैं, जबकि वे ऐसी दुनिया को प्राथमिकता देंगे जहां इन एप का अस्तित्व ही न हो।
अमेरिका-कनाडा में गिरावट
रिपोर्ट में आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन व नॉर्वे जैसे देश शीर्ष-10 में शामिल रहे। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में 25 वर्ष से छोटे युवाओं के जीवन मूल्यांकन में गत एक दशक में काफी गिरावट आई है। यह अध्ययन 140 देशों और क्षेत्रों के लगभग एक लाख लोगों के दिए गए उत्तरों पर आधारित थी, जिनसे उनके जीवन का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया था।
केवल आर्थिक समृद्धि ही सब कुछ नहीं
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खुशहाली केवल आर्थिक समृद्धि पर निर्भर नहीं करती। नॉर्डिक देशों की सफलता के पीछे मजबूत कल्याणकारी प्रणाली, समानता और उच्च जीवन प्रत्याशा है। वहीं, दूसरी ओर अफगानिस्तान, सिएरा लियोन और मलावी जैसे देश रैंकिंग में सबसे नीचे हैं।
फिनलैंड और कोस्टारिका का उदाहरण
फिनलैंड (शीर्ष 1) और कोस्टा रिका (नंबर चार) जैसे देशों के लोग तकनीक से ज्यादा सामाजिक समानता, प्रकृति और आपसी भाईचारे को महत्व देते लगे हैं। ऑक्सफोर्ड के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जान-इमैनुअल डी नेवे ने कहा, यह उनके सामाजिक जीवन की गुणवत्ता और मौजूदा स्थिरता के कारण है।
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