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21वीं सदी की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा में बचा पेड़, विश्व फोटोग्राफी दिवस पर लोगों का जीता दिल

Sun, 19 Aug 2018 12:44 PM IST
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला Updated Sun, 19 Aug 2018 12:44 PM IST
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single tree survived in worst calamity of 21st century,loved on world photography day
सुनामी से बचा पेड़

जापान में आने वाली सुनामी ने अब तक सैकड़ों जिंदगी लील ली है। लेकिन प्राकृतिक आपदा के बीच करिश्में में भी देखने को मिले हैं जिसमें जिंदगी मौत को हरा मुस्कुराती नजर आती है। ऐसी तस्वीर विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सबसे खास लगती हैं जो लोगों का दिल जीत रही है। जापान में मार्च 2011 में आये सुनामी में ज्यादातर घर, इमारत ढह गये थे, तबाही में 15,894 लोग मारे गए थे। 2,500 से अधिक लोगों का अभी तक पता नहीं चल सका है। । इस भयंकर सुनामी में 70 हजार से ज्यादा पेड़ भी धाराशायी हो गये थे। इतने बड़े प्रकृतिक आपदा के बाद भी रिकुजेन्ताकाता कस्बे में सिर्फ यह एक पेड़ सुरक्षित बच गया था।

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जिस तरह के सुनामी को झेल ये चीड़ का पेड़ सही सलामत खड़ा रहा वो किसी चमत्कार से कम नहीं। रिकुजेन्ताकाता कस्बे के लोग इसे कुदरत का करिश्मा और सुनामी के बाद ईश्वर का आशीर्वाद मानते हैं। सबसे आश्चर्य की बात ये है कि राहत का काम पूरा होने तक ये पेड़ सुरक्षित रहा और जापान प्रशासन ने भी इस पेड़ को बचाने के लिए सभी उपाय किए। इसके आसपास लोहे का जाल बनाया दिया गया था, ताकि मशीनों के प्रभाव से पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।
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इस जीवट पेड़ को जीवन देने के लिए जापानी विशेषज्ञयों ने 27 मीटर ऊंचे इस पेड़ की जड़ों और तने का अध्ययन किया तो पता लगा कि ये पेड़ कई साल पुराना है। शोध किया गया कि 250 साल पुराने इस पेड़ में ऐसा क्या था, जिसके चलते यह सुनामी का कहर भी सह गया और टूटा नहीं। जापान सरकार ने ये तय किया कि इस पेड़ का संरक्षण किया जायेगा । चीड़ के इस पुरातन वृक्ष को सुरक्षित रखने के काम में करीब 9 करोड़ रुपए खर्च हुए और इस खर्च को लेकर काफी विवाद भी हुआ।
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दरअसल रिकुजेन्ताकाता कस्बे के लोगों ने देश और बाहर से इस पेड़ को बचाने के लिए आर्थिक मदद मांगी थी। जापान ने इतनी बड़ी आपदा से इस पेड़ को बचा लिया और आज भी बड़ी संख्या में लोग इस पेड़ को देखने आते हैं। सत्तर हजार पेड़ के नष्ट होने के बाद अकेले बचा ये पेड़ म्यूजियम में तब्दील हो गया है।

 

भूकंप के बाद 30 फीट ऊंची लहरें उठी थीं। 11 मार्च 2011 को जापान के ओशिका से 70 किमी दूर 9 तीव्रता का भूकंप आया। 20 मिनट बाद सुनामी लहरें होक्काइदो और दक्षिण के ओकिनावा द्वीप से टकराईं और वहां भारी तबाही मचाई थी। 2500 लोग अब भी लापता हैं। सुनामी लहरें फुकुशिमा दाइची परमाणु बिजली संयंत्र में घुसीं। रिएक्टर पिघलने लगे और धमाके होने लगे। इस तबाही में 15,894 लोग मारे गए। 2,500 से अधिक लोगों का अभी तक पता नहीं चल सका है। 

 

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