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सिंगापुर : डेढ़ दशक में भारतीय पेशेवरों की तादाद दोगुनी

Wed, 07 Jul 2021 07:20 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, सिंगापुर
एजेंसी, सिंगापुर Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 07 Jul 2021 07:20 AM IST
सार

सिंगापुर के श्रम मंत्री तान सी लेंग ने बताया कि 2005 से 2020 के दौरान रोजगार पास (ईपी) धारक भारतीय पेशेवरों का अनुपात 13 फीसदी से 26 फीसदी हो गया है।

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Singapore: Number of Indian professionals doubled in a decade and a half
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

सिंगापुर में बीते डेढ़ दशक के दौरान भारतीय पेशेवरों की तादाद बढ़कर दोगुनी हो गई है या अनुवाद किसी विशेष तवज्जो के चलते नहीं बल्कि तकनीकी प्रतिभा की मांग आपूर्ति के वैश्विक रुझान के चलते बढ़ा है। 

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तकनीकी प्रतिभा की मांग के चलते बढ़ा अनुपात
सिंगापुर के श्रम मंत्री तान सी लेंग ने बताया कि 2005 से 2020 के दौरान रोजगार पास (ईपी) धारक भारतीय पेशेवरों का अनुपात 13 फीसदी से 26 फीसदी हो गया है। गौरतलब है कोरोना महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई है और बढ़ती हुई बेरोजगारी के लिए स्थानीय लोग भारत सिंगापुर के बीच 2005 में हुए व्यापक आर्थिक सहयोग समझोते (सीईए) को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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उनका आरोप है कि इस मुक्त व्यापार समझौते के कारण भारतीय पेशेवर सिंगापुर के लोगों की नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं, लेकिन तान का कहना है, सिंगापुर की डिजिटल अर्थव्यवस्था व वित्तीय स्थिति में तेज विकास और तकनीकी भारतीय पेशेवरों की मांग के चलते उनकी हिस्सेदारी में उछाल आया है।
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उन्हें सीईसीए के तहत कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, अगर भारतीय इस तरह की नौकरियां नहीं लेंगे, तो स्थानीय लोगों के खाते में चली जाएगी। अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए अच्छी प्रतिभा और कौशल को जगह देनी ही होगी।

  • 26% हिस्सेदारी 2020 में हुई भारतीयों की 
  • 13% हिस्सेदारी थी वर्ष 2005 में 

अच्छी प्रतिभा और कौशल
श्रम मंत्री लेंग ने कहा कि तकनीकी कौशल वाले भारतीय हमेशा से देशों का रुख करते रहे हैं। इसमें उन्हें अंग्रेजी बोलने का भी फायदा मिलता है। यह सच है कि सिंगापुर में भी प्रतिभाएं हैं। लेकिन यहां भी निवेश कर रही कंपनियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है।

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