क्या लक्षण न दिखने के बाद भी मास्क पहनना जरूरी है, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से बचने के लिए सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है, क्या लक्षण नहीं दिखने पर भी हमें मास्क पहनने की जरूरत है? प्रारंभिक दिशानिर्देशों के मुताबिक इसका जवाब है नहीं। अमेरिका में आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की सबसे अहम एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के प्रारंभिक दिशानिर्देशों के अनुसार फेस मास्क केवल उन लोगों को पहनना चाहिए जो बीमार हैं। या फिर वो किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं जो बीमार है।
लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि 3 अप्रैल के बाद से सीडीसी (CDC) ने मास्क को लेकर दिए गए प्रारंभिक दिशानिर्देशों में बदलाव किया है। ये बदलाव उस शोध के बाद आया है जिसके अनुसार करीब 25 प्रतिशत ऐसे मरीज हैं जिनमें कोरोना के किसी भी तरह के लक्षण दिखाई नहीं दिए। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ऐसे मरीज दूसरों तक संक्रमण फैलाने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।
अमेरिकी सरकार ने सावधानी बरतते हुए लोगों को बाहर जाने पर मास्क पहनने की सलाह देते हुए उस शोध का हवाला दिया कि कोरोना वायरस महज सांस लेने से भी फैल सकता है। यानी अब अमेरिका में हर किसी को मास्क पहनना अनिवार्य है। हालांकि ये मास्क नॉन मेडिकल मास्क हो सकते हैं जिसे घर पर बनाना संभव है।
अन्य देशों की स्थिति
दुनिया के अन्य हिस्सों में सरकारों ने शुरू से ही इस सवाल के अलग-अलग जवाब दिए हैं। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार यदि आप किसी ऐसी जगह पर हों जहां पर कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज रहता हो, तभी आपको मास्क पहनना जरूरी है। वर्तमान में चीन के दिशानिर्देश आम लोगों के लिए उनके स्वास्थ्य जोखिमों और व्यवसायों के आधार पर विभिन्न प्रकार के फेस मास्क की सलाह देते हैं। वहीं दूसरी तरफ सीडीसी ने सिफारिश की है कि अमेरिकी साधारण कपड़े का मास्क पहन सकते हैं जो या तो ऑनलाइन खरीदा गया हो या घर पर बना हो।
कैसे बदल गया मास्क पहनने का नजरिया
दरअसल अमेरिका में हुए एक अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 वायरस छींक के जरिए 6-8 मीटर की दूरी तक जा सकता है। अगर आप बात कर रहे हैं या सांस भी ले रहे हैं तो ये वायरस स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। क्योंकि हाल ही में हुआ शोध यह कहता है कि करीब 25 प्रतिशत ऐसे मरीज मिले हैं जो कोरोना से संक्रमित तो थे लेकिन उनमें किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं दिए थे। चीन ने शुरुआत में इस बात को छुपाने की कोशिश की।
मौजूदा निर्देश में क्या हो सकते हैं बदलाव
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक संक्रमित होने से बचने के लिए खांसने या छींकने वाले व्यक्ति से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखनी चाहिए। लेकिन ताजा शोध में ये बात सामने आई है कि खांसते या छींकते से निकलने वाली बूंदें काफी दूर तक जा सकती हैं। ऐसे में जो बीमार नहीं है उसे भी मास्क पहनने की सलाह दी जाएगी। अमेरिका इसकी घोषणा पहले ही कर चुका है।
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डब्ल्यूएचओ उन्हीं लोगों को मास्क पहनने की सलाह देता है जिन्हें या तो संक्रमण की आशंका हो या वो संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हों। साथ ही मास्क पहनते हुए खास सावधानियां बरती जाए। मास्क को डिस्पोज किया जाए और बार-बार हाथ धोया जाए। लेकिन जल्द ही इसपर बदलाव किया जाएगा।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व निदेशक प्रोफेसर हेमैन के मुताबिक नई रिसर्च से ये सामने आया है कि मास्क पहनना सोशल डिस्टेंसिंग से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। बशर्ते मास्क ठीक तरीके से पहना गया हो।
इन खास बातों का रखें ख्याल
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मास्क को इस तरह से पहनें कि आपका मुंह, नाक और ठोढ़ी ढक रहे वहां से वायु का कण अंदर न आने पाए।
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अगर आपने मास्क पहना है तो इसे बार-बार न छुएं।
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मास्क पहनने के दौरान कभी इसे नाक मुंह पर से हटाकर गले पर न लटकाएं।
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मास्क में नाक वाले हिस्से पर एक सील होनी चाहिए क्योंकि अगर वो हिस्सा नम हो गया तो बूंदें अंदर जा सकती हैं।
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मास्क को उतारने वक्त भी सावधानी बरतनी होगी ताकि हाथों के संक्रमण न पहुंच जाए।
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घर पर बनाया गया मास्क भी आप सावधानी से पहन सकते हैं।