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राजनीति: शेर बहादुर देउबा ने ली नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ, पांचवीं बार बने पीएम
Tue, 13 Jul 2021 08:57 PM IST
प्रशांत कुमार
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 13 Jul 2021 08:57 PM IST
सार
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शेर बहादुर देउबा पांचवीं बार प्रधानमंत्री बने हैं।राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
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शेर बहादुर देउबा, पीएम नेपाल
- फोटो : dna
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विस्तार
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा मंगलवार को पांचवीं बार देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने मंगलवार देर शाम पीएम पद की शपथ ले ली। वहीं प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद ही देउबा ने लघु मंत्रिमंडल का गठन कर दिया है। इस मंत्रिमंडल में केवल पांच मंत्री रहेंगे।
बता दें कि इससे पहले राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा (74) ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा सोमवार को दिए गए फैसले के अनुरूप है। जिसने के पी शर्मा ओली को हटाते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए उनके दावे पर मुहर लगाई थी।
देउबा को एक महीने के भीतर विश्वास मत साबित करना होगा
संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है।
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बता दें कि इससे पहले राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा (74) ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा सोमवार को दिए गए फैसले के अनुरूप है। जिसने के पी शर्मा ओली को हटाते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए उनके दावे पर मुहर लगाई थी।
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देउबा को एक महीने के भीतर विश्वास मत साबित करना होगा
संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है।
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