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US: थरूर बोले- आबादी के आधार पर हुआ परिसीमन तो दक्षिण भारत के अधिकारों पर होगा असर; अन्नामलाई ने किया पलटवार
Mon, 11 May 2026 08:18 AM IST
निर्मल कांत
एएनआई, सैन फ्रांसिस्को।
एएनआई, सैन फ्रांसिस्को।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 11 May 2026 08:18 AM IST
सार
अमेरिका के स्टेनफर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित एक चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि अगर आबादी के आधार पर सीटों का बंटवारा होता है, तो इससे दक्षिण भारत के राज्य ऐसा महसूस कर सकते हैं कि उनके अधिकार किए गए हैं। हालांकि, भाजपा ने के अन्नामलाई ने जनसंख्या के आधार पर सीटों के बंटवारे को स्वाभाविक बताया। पढ़िए रिपोर्ट-
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर, भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या और के अन्नामलाई
- फोटो : एक्स/एएनआई/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने चेतावनी दी कि अगर संसद की सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो दक्षिण भारत के राज्यों को ऐसा लग सकता कि उनके अधिकार कम हो गए हैं। वहीं, भाजपा नेता के अन्नामलाई ने कहा कि जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत को स्वाभाविक रूप से ज्यादा सांसद मिलने चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिका के स्टेनफर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित 'स्टेनफर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस' के दौरान कही। चर्चा का विषय 'इंडिया यानी भारत: विकास, प्रशासन और पहचान' था।
शशि थरूर ने क्या कहा?
शशि थरूर ने कहा कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बढ़ते अंतर के कारण भविष्य में कुछ लोग हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की मांग कर सकते हैं, जिसका तमिल लोग विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के राज्यों की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, इसलिए वहां के एक सांसद पर ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी है, जबकि दक्षिण भारत में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सीटों का बंटवारा केवल आबादी के हिसाब से हुआ, तो उत्तर भारत के राज्यों के पास संसद में इतना बहुमत हो सकता है कि वे अपनी राय दक्षिण भारत पर थोप सकें।
थरूर ने यह भी कहा कि बहुत बड़े राज्यों के बंटवारे पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 28 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का इतना बड़ा होना सही नहीं लगता। उन्होंने याद दिलाया कि जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं, तब उन्होंने राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था।
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जवाब में अन्नामलाई ने क्या कहा?
इस पर जवाब देते हुए अन्नामलाई ने कहा, आम लोग अपने सांसद को केवल अखबारों में या फीता काटने वाले कार्यक्रमों में ही देखते हैं। देश को इस मुद्दे का समाधान चाहिए। उन्होंने कहा, अगर 2011 की जनगणना के हिसाब से सीटों का बंटवारा हो, तो तमिलनाडु को 50 सीटें मिलतीं। लेकिन नए मॉडल में उसे 59 सीटें मिल रही हैं, यानी नौ सीटें ज्यादा।
अन्नामलाई ने कहा, जनगणना के आधार पर उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा सांसद मिलना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा, अगर हर राज्य केवल यह सोचता रहेगा कि उसे फायदा हो रहा है या नुकसान, तो इस समस्या का हल नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ऐसा समाधान चाहती है, जिसमें किसी राज्य को नुकसान न हो।
ये भी पढ़ें: रिपोर्ट: महिलाओं के लिए अफगानिस्तान सबसे असुरक्षित देश, भारत की स्थिति में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार
बहस के दौरान शशि थरूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। इसे परिसीमन विधेयक से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, मौजूदा संसद में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण ही दिया जा सकता है।
17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। इसके बाद सरकार ने कहा कि वह परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करना था, जिसमें महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान रखा गया था। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाना था। विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन किया। लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण मौजूदा लोकसभा सीटों में ही दिया जाए।
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शशि थरूर ने क्या कहा?
शशि थरूर ने कहा कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बढ़ते अंतर के कारण भविष्य में कुछ लोग हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की मांग कर सकते हैं, जिसका तमिल लोग विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के राज्यों की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, इसलिए वहां के एक सांसद पर ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी है, जबकि दक्षिण भारत में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सीटों का बंटवारा केवल आबादी के हिसाब से हुआ, तो उत्तर भारत के राज्यों के पास संसद में इतना बहुमत हो सकता है कि वे अपनी राय दक्षिण भारत पर थोप सकें।
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थरूर ने यह भी कहा कि बहुत बड़े राज्यों के बंटवारे पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 28 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का इतना बड़ा होना सही नहीं लगता। उन्होंने याद दिलाया कि जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं, तब उन्होंने राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था।
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जवाब में अन्नामलाई ने क्या कहा?
इस पर जवाब देते हुए अन्नामलाई ने कहा, आम लोग अपने सांसद को केवल अखबारों में या फीता काटने वाले कार्यक्रमों में ही देखते हैं। देश को इस मुद्दे का समाधान चाहिए। उन्होंने कहा, अगर 2011 की जनगणना के हिसाब से सीटों का बंटवारा हो, तो तमिलनाडु को 50 सीटें मिलतीं। लेकिन नए मॉडल में उसे 59 सीटें मिल रही हैं, यानी नौ सीटें ज्यादा।
अन्नामलाई ने कहा, जनगणना के आधार पर उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा सांसद मिलना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा, अगर हर राज्य केवल यह सोचता रहेगा कि उसे फायदा हो रहा है या नुकसान, तो इस समस्या का हल नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ऐसा समाधान चाहती है, जिसमें किसी राज्य को नुकसान न हो।
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बहस के दौरान शशि थरूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। इसे परिसीमन विधेयक से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, मौजूदा संसद में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण ही दिया जा सकता है।
17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। इसके बाद सरकार ने कहा कि वह परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करना था, जिसमें महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान रखा गया था। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाना था। विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन किया। लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण मौजूदा लोकसभा सीटों में ही दिया जाए।
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