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रिपोर्ट: महिलाओं के लिए अफगानिस्तान सबसे असुरक्षित देश, भारत की स्थिति में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार
Mon, 11 May 2026 06:13 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला, नई दिल्ली/काबुल।
अमर उजाला, नई दिल्ली/काबुल।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 11 May 2026 06:13 AM IST
सार
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे असुरक्षित देश बना हुआ है। तालिबान शासन के बाद वहां शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकारों पर पाबंदी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस सूची में यमन दूसरे और सीरिया चौथे स्थान पर है। भारत 177 देशों की सूची में किस स्थान पर है? जानिए...
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woman safety
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुनिया में महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से अफगानिस्तान सबसे असुरक्षित देश माना गया है। इसमें पांच शीर्ष देशों की सूची में यमन दूसरे पायदान पर है। ग्लोबल वुमन सेफ्टी इंडेक्स के हालिया आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे असुरक्षित देश बन गया है।
अत्यधिक जोखिम में कई देशों में महिलाओं का जीवन
युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी सामाजिक मानदंडों के कारण कई देशों में महिलाओं का जीवन अत्यधिक जोखिम में है। महिला सुरक्षा सूचकांक में अफगानिस्तान 0.279 के स्कोर के साथ सबसे नीचे है। यहां महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी न के बराबर है और उन पर सामाजिक प्रतिबंध लागू हैं। शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकार भी क्षेत्र की स्थानीय नीतियों पर निर्भर करते हैं, जिससे उनकी स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस सूची में दूसरे स्थान पर यमन (0.323) है, जहां लंबे समय से जारी गृहयुद्ध ने स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। इसके बाद सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (0.362) और सीरिया (0.364) का स्थान है।
सीरिया में वर्षों से जारी संघर्ष ने महिलाओं को विस्थापन और मनोवैज्ञानिक तनाव की ओर धकेला है। इसके बाद कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (0.384) का नंबर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये रैंकिंग केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लाखों महिलाओं के वास्तविक संघर्ष को दर्शाती हैं जो हर दिन डर, विस्थापन और असुरक्षा के बीच जी रही हैं। सूडान (0.397) और दक्षिण सूडान (0.411) जैसे देशों में भी राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट ने महिलाओं के लिए जीवन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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यह भी पढ़ें: सोमनाथ अमृतपर्व: पहली बार शिखर पर 11 पवित्र तीर्थों के जल से होगा कुंभाभिषेक; आयोजन के साक्षी बनेंगे PM मोदी
177 देशों की सूची में भारत 131वें स्थान पर
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की स्थिति इन युद्धग्रस्त देशों की तुलना में काफी बेहतर है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड, मिशन शक्ति और सख्त पॉक्सो कानूनों जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। वहीं, अफगानिस्तान या यमन जैसे देशों के विपरीत, भारत में महिलाओं को सांविधानिक रूप से शिक्षा, कार्य और अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है। भारत के लिए मुख्य चुनौतियां सामाजिक धारणाएं, कार्यस्थल पर सुरक्षा और घरेलू हिंसा से निपटना है। बता दें कि 177 देशों की सूची में भारत 131वें स्थान पर है। पिछले साल के सुधार के संकेत में यह 0.595 से बढ़कर 0.607 हुआ।
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अत्यधिक जोखिम में कई देशों में महिलाओं का जीवन
युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी सामाजिक मानदंडों के कारण कई देशों में महिलाओं का जीवन अत्यधिक जोखिम में है। महिला सुरक्षा सूचकांक में अफगानिस्तान 0.279 के स्कोर के साथ सबसे नीचे है। यहां महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी न के बराबर है और उन पर सामाजिक प्रतिबंध लागू हैं। शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकार भी क्षेत्र की स्थानीय नीतियों पर निर्भर करते हैं, जिससे उनकी स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस सूची में दूसरे स्थान पर यमन (0.323) है, जहां लंबे समय से जारी गृहयुद्ध ने स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। इसके बाद सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (0.362) और सीरिया (0.364) का स्थान है।
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सीरिया में वर्षों से जारी संघर्ष ने महिलाओं को विस्थापन और मनोवैज्ञानिक तनाव की ओर धकेला है। इसके बाद कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (0.384) का नंबर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये रैंकिंग केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लाखों महिलाओं के वास्तविक संघर्ष को दर्शाती हैं जो हर दिन डर, विस्थापन और असुरक्षा के बीच जी रही हैं। सूडान (0.397) और दक्षिण सूडान (0.411) जैसे देशों में भी राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट ने महिलाओं के लिए जीवन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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177 देशों की सूची में भारत 131वें स्थान पर
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की स्थिति इन युद्धग्रस्त देशों की तुलना में काफी बेहतर है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड, मिशन शक्ति और सख्त पॉक्सो कानूनों जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। वहीं, अफगानिस्तान या यमन जैसे देशों के विपरीत, भारत में महिलाओं को सांविधानिक रूप से शिक्षा, कार्य और अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है। भारत के लिए मुख्य चुनौतियां सामाजिक धारणाएं, कार्यस्थल पर सुरक्षा और घरेलू हिंसा से निपटना है। बता दें कि 177 देशों की सूची में भारत 131वें स्थान पर है। पिछले साल के सुधार के संकेत में यह 0.595 से बढ़कर 0.607 हुआ।
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