ग्वादार में वो चमक नहीं, जो पाकिस्तान और चीन बताते हैं?
रिफाइनरी की जगह बदले जाने का एलान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक ताबिश गौहर ने पिछले दो जून को किया था। उन्होंने कहा था कि अब ये रिफाइनरी कराची के करीब बनेगी...
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ये सवाल अब गहन चर्चा का विषय बन गया है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के ग्वादार में बनने वाली तेल रिफाइनरी की जगह बदलने का क्यों फैसला किया। गौरतलब है कि ग्वादार पाकिस्तान में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। लेकिन सऊदी अरब के इस फैसले से इस चर्चा को बल मिला है कि इस क्षेत्र में असल में बुनियादी ढांचे का वैसा विकास नहीं हुआ है, जिसका प्रचार किया गया है। 10 अरब डॉलर की लागत से बनने वाली इस रिफाइनरी को सऊदी अरब ने कराची में बनाने का फैसला किया है, जहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर माना जाता है।
रिफाइनरी की जगह बदले जाने का एलान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक ताबिश गौहर ने पिछले दो जून को किया था। उन्होंने कहा था कि अब ये रिफाइनरी कराची के करीब बनेगी। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई थी कि पाकिस्तान में एक और रिफाइनरी अगले पांच साल के अंदर बनाई जाएगी, जिसकी उत्पादन क्षमता दो लाख बैरल तेल प्रतिदिन की होगी। सऊदी अरब ने ग्वादार में रिफाइनरी बनाने के करार पर फरवरी 2019 में दस्तखत किए थे, जब वहां के युवराज सलमान ने पाकिस्तान की यात्रा की थी।
टोक्यो की वेबसाइट निक्कई एशिया से बातचीत में एक पाकिस्तानी अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि ग्वादार में तेल रिफाइनरी बनना संभव ही नहीं था। वहां तभी रिफाइनरी बन सकती है, अगर पहले वहां से कराची तक 600 किलोमीटर की एक तेल पाइपलाइन बने। कराची पाकिस्तान में तेल सप्लाई का केंद्र है। बिना पाइपलाइन के ग्वादार में रिफाइनरी लगाने का मतलब होता वहां से सड़क मार्ग से उपभोग के केंद्रों तक तेल को ले जाना, जो बहुत महंगा पड़ता। अधिकारी ने कहा कि अभी ग्वादार में जो हालात हैं, उसे देखते हुए नहीं लगता कि अगले 15 साल तक वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में कोई ज्यादा सुधार होगा।
कुछ जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए रूस से जो बातचीत चला रहा है, उसमें ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। इसका असर भी सऊदी अरब के फैसले पर पड़ा हो सकता है। फरवरी 2019 में रूसी तेल कंपनी गाजप्रोम ने पाकिस्तान की अलग-अलग ऊर्जा परियोजनाओं में 14 अरब डॉलर के निवेश के वादा किया था। इनमें पाइनलाइनों का निर्माण भी था। लेकिन अब तक उनमें से किसी परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ है।
राजनीतिक जोखिम का अंदाजा लगाने वाली न्यूयॉर्क स्थित कंसल्टिंग फर्म वाइजियर के अध्यक्ष आरिफ रफीक के मुताबिक सऊदी अरब ने जो फिजिबिलिटी स्टडी (संभाव्यता अध्ययन) कराई, उससे भी यही सामने आया कि ग्वादार में रिफाइनरी लगाना फायदे का सौदा नहीं होगा। इसकी वजह वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। रफीक ने कहा कि सऊदी अरब का ये फैसला बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिए एक झटका है। उन्होंने कहा- ‘पाकिस्तान का इरादा ग्वादार को ऊर्जा और औद्योगिक केंद्र की एक मिसाल बनाने का है। लेकिन वह ग्वादार के विकास के लिए उचित रणनीति अपनाने में मुश्किलों का सामना कर रहा है।’ गौतलब है कि चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर पाकिस्तान में 50 अरब डॉलर खर्च कर रहा है।