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स्वागत: एयर इंडिया की बिक्री भारत के निजीकरण प्रयासों में मील का पत्थर, आईएमएफ ने किया फैसले का समर्थन
Mon, 18 Oct 2021 06:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 18 Oct 2021 06:38 PM IST
सार
भारी घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने की दौड़ में टाटा समूह अव्व्ल रहा है। उसकी बोली केंद्र सरकार ने स्वीकार कर ली है। समूह को 11 अक्तूबर को आशय पत्र (LoI) जारी कर दिया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने भारत की सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया की बिक्री को देश के निजीकरण प्रयासों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया है। भारी घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने की दौड़ में टाटा समूह अव्व्ल रहा है। उसकी बोली केंद्र सरकार ने स्वीकार कर ली है। समूह को 11 अक्तूबर को आशय पत्र (LoI) जारी कर दिया गया है।
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सरकार ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की इकाई टैलेस प्राइवेट लि. की एयर इंडिया की खरीदी के लिए पेशकश को स्वीकार कर लिया था। इसके लिए टाटा द्वारा 2,700 करोड़ रुपये का नकद भुगतान किया जाएगा, जबकि वह एयरलाइन का 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज भी चुकाएगी।
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आईएमएफ-एसटीआई क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक और आईएमएफ इंडिया मिशन के पूर्व प्रमुख अल्फ्रेड शिप्के ने टाटा समूह के साथ भारत सरकार के करार को लेकर कहा कि 'हम एयर इंडिया की बिक्री के लिए हालिया समझौते का स्वागत करते हैं, जो एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।'
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शिप्के ने भारत को लेकर मुद्राकोष की वार्षिक रिपोर्ट जारी करने के मौके पर कहा कि आमतौर पर निजीकरण से अधिकतम लाभ पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव मध्यम अवधि की निजीकरण योजनाओं, ठोस नियामक ढांचे और प्रतिस्पर्धी बाजारों के महत्व पर जोर देते हैं।
वार्षिक रिपोर्ट में मोदी सरकार के 130 नीतिगत फैसलों का जिक्र
वार्षिक रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था को उदार बनाने और सुधार के लिए पिछले एक साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए गए 130 से अधिक प्रमुख नीतिगत कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है। ये कार्य देश की अर्थव्यवस्था को उदार बनाने से संबंधित हैं।
वित्तीय मोर्चे का जिक्र करते हुए शिप्के ने कहा कि दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों का यहां जिक्र करना महत्वपूर्ण है। इनमें से एक है कम आय वर्ग के लोगों की तेजी से मदद करना। उन्होंने कहा कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को कोरोना महामारी काल में जिस तरह से कई बार बढ़ाया गया और बाद में 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' के रूप में इसका सुधार किया गया, इससे लोगों को गुजर बसर करने में बहुत मदद मिली।
शिप्के ने कहा कि दूसरा नीतिगत कार्य नई निजीकरण नीति व संपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन है। यदि इसका सफलतापूर्वक अमल किया गया तो सराकर को संपत्तियों से अच्छा रिटर्न मिलेगा और बुनियादी ढांचे के लिए सरकार को आवश्यक पैसा मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति के मोर्चे पर रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती कर उल्लेखनीय, व्यापक आधार वाली और उपयुक्त रियायतें दी हैं।
भारत ने महामारी के बाद भी सर्वाधिक एफडीआई आकर्षित किया
निवेश को लेकर उदारवादी रवैये और ढांचागत सुधारों के दम पर भारत ने कोरोनाकाल में भी 81.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड विदेशी निवेश हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सोमवार को कहा कि महामारी खत्म होने के बाद वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिसमें नीतिगत सुधारों की बड़ी भूमिका होगी।
आईएमएफ के निदेशक अल्फ्रेड शिप्के ने कहा, भारत ने हाल में कृषि, रक्षा, दूरसंचार सेवाओं और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर उदार रुख अपनाया है। इन क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई नीतियों में बदलाव भी किया। इसका लाभ रिकॉर्ड एफडीआई के रूप में सामने आया, जिससे मौजूदा चुनौतियों से निपटने और चालू खाते के वित्तीय बोझ को कम करने में भी मदद मिली।
विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार के आकर्षित करने में ढांचागत सुधारों की बड़ी भूमिका होगी। इसमें भूमि सुधार, श्रम सुधार और प्रशासनिक सुधार जैसे कदम सराहनीय हैं। शिप्के ने कहा, सरकार की ओर से शुरू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का असर भी जल्द ही दिखना शुरू हो जाएगा। भारत उत्पादन बढ़ाकर वैश्विक निर्यात में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकता है।