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G 20: फिर शुरू होगी भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान? चीनी विदेश मंत्री से जयशंकर ने की मुलाकात
Tue, 19 Nov 2024 10:12 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जेनेरियो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जेनेरियो
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 19 Nov 2024 10:12 PM IST
सार
S Jaishankar: विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, विदेश मंत्रियों की चर्चा मतभेद दूर करने, संदेह मिटाने वाले और एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने वाले कदम उठाने पर केंद्रित थी।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की
- फोटो : ANI
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विस्तार
विदेश मंत्री जयशंकर ने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ एक बैठक की, जिसमें एलएसी से सैन्य वापसी के बाद द्विपक्षीय रिश्तों को और आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने पांच वर्ष के बाद सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक शीघ्र बुलाने का फैसला किया। दोनों देश सीधी उड़ान और कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर भी सहमति के करीब पहुंच गए हैं।
विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, विदेश मंत्रियों की चर्चा मतभेद दूर करने, संदेह मिटाने वाले और एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने वाले कदम उठाने पर केंद्रित थी। इस दौरान कैलास मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानें शुरू करने, सीमा पार नदियों पर डेटा साझा करने और मीडिया आदान-प्रदान आदि पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान पिछले माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक में बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। वांग यी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि दोनों पक्षों ने सीमा पर सैनिकों की वापसी में प्रगति पर गौर किया। उन्होंने मोदी-शी बैठक के संदर्भ में कहा, हमारे नेताओं ने कहा है कि विदेश मंत्रियों और विशेष प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है।
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वार्ता का अगला दौर होगा अहम
विशेष प्रतिनिधियों और विदेश सचिव-उप मंत्री तंत्र की बैठक जल्द बुलाने पर बनी सहमति पर भारत-चीन संबंधों में नवीनतम घटनाक्रमों से परिचित जानकारों कहना है कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल हैं, जबकि वार्ता में चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, सैनिकों की वापसी पूरी होने के बाद, भारतीय और चीनी सेनाएं देपसांग और डेमचोक में एक-एक दौर की गश्त कर रही हैं। अब ध्यान समग्र स्तर पर तनाव घटाने पर होगा।
चीन ने कहा-सकारात्मक कदमों में तेजी लाने की जरूरत
चीन की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्राध्यक्षों की बनाई सहमतियों को लागू करने, एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करने, बातचीत और संचार के माध्यम से आपसी विश्वास बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द पटरी पर लाने पर जोर दिया। वांग ने कहा कि दोनों पक्षों को अधिक सकारात्मक संकेत भेजने चाहिए और सीधी उड़ानें फिर शुरू करने, पत्रकारों को एक दूसरे के यहां भेजने और वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक प्रगति करनी चाहिए।
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विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, विदेश मंत्रियों की चर्चा मतभेद दूर करने, संदेह मिटाने वाले और एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने वाले कदम उठाने पर केंद्रित थी। इस दौरान कैलास मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानें शुरू करने, सीमा पार नदियों पर डेटा साझा करने और मीडिया आदान-प्रदान आदि पर चर्चा हुई।
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बैठक के दौरान पिछले माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक में बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। वांग यी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि दोनों पक्षों ने सीमा पर सैनिकों की वापसी में प्रगति पर गौर किया। उन्होंने मोदी-शी बैठक के संदर्भ में कहा, हमारे नेताओं ने कहा है कि विदेश मंत्रियों और विशेष प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है।
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वार्ता का अगला दौर होगा अहम
विशेष प्रतिनिधियों और विदेश सचिव-उप मंत्री तंत्र की बैठक जल्द बुलाने पर बनी सहमति पर भारत-चीन संबंधों में नवीनतम घटनाक्रमों से परिचित जानकारों कहना है कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल हैं, जबकि वार्ता में चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, सैनिकों की वापसी पूरी होने के बाद, भारतीय और चीनी सेनाएं देपसांग और डेमचोक में एक-एक दौर की गश्त कर रही हैं। अब ध्यान समग्र स्तर पर तनाव घटाने पर होगा।
चीन ने कहा-सकारात्मक कदमों में तेजी लाने की जरूरत
चीन की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्राध्यक्षों की बनाई सहमतियों को लागू करने, एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करने, बातचीत और संचार के माध्यम से आपसी विश्वास बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द पटरी पर लाने पर जोर दिया। वांग ने कहा कि दोनों पक्षों को अधिक सकारात्मक संकेत भेजने चाहिए और सीधी उड़ानें फिर शुरू करने, पत्रकारों को एक दूसरे के यहां भेजने और वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक प्रगति करनी चाहिए।