India-Russia: एस जयशंकर की रूस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें, आज होगी रूसी विदेश मंत्री से अहम बातचीत
रूस का रणनीतिक साझीदार होने के साथ रूस का पुराना और सच्चा दोस्त होने के अलावा विश्व राजनीति में बढ़ती धमक के बूते भारत ने आठ माह पुराने संघर्ष की समाप्ति की उम्मीद जगा दी है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर की रूस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई हैं। डॉ एस जयशंकर सोमवार को अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात करने के लिए रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच गए हैं। जयशंकर ने इससे पहले आखिरी बार जुलाई 2021 में रूस का दौरा किया था और उसके बाद अप्रैल 2022 में रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने नई दिल्ली की यात्रा की थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर जयशंकर की यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। रूसी संघ के विदेश मामलों के मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि आठ नवंबर को मॉस्को में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ बातचीत करेंगे।
दोनों देशों के बीच दशकों से खास रणनीतिक साझेदारी
इसमें कहा गया है कि रूस-भारत के बीच कुछ दशकों से खास तरह की रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों ने आर्थिक, वित्तीय, ऊर्जा, सैन्य-तकनीक, मानविकी, रिसर्च और डेवलपमेंट की दिशा में प्रभावी सहयोग की नीति तैयार की है। दोनों देशों के विदेश मंत्री आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत करेंगे। बातचीत के मुख्य मुद्दों में व्यापार, निवेश, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक, आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्रा के उपयोग, ऊर्जा परियोजना शामिल होंगे।
भारत और रूस एक संतुलित और समान दुनिया बनाने और पॉलिसेंट्रिक दुनिया बनाने की दिशा में काम करेंगे जो वैश्विक परिदृष्य में तानाशाही भरे वातावरण को पूरी तरह नकारता है। दोनों देश यूएन चार्टर के मुताबिक जरूरी मुद्दों और नियमों का समर्थन करते हैं। दोनों देश एक ऐसे एजेंडे की वकालत करते हैं और सभी देशों के बीच परिणामदायक संवाद पर जोर देते हैं।
यात्रा को यूक्रेन और रूस में तैनात रहे भारतीय दूतों ने अहम बताया
विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा से पहले यूक्रेन और रूस में तैनात रहे भारतीय दूतों ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है। इन्होंने इस तथ्य को भी अहम बताया कि यह वैश्विक ध्यान भी आकर्षित करेगा क्योंकि भारत जी-20 की कुर्सी संभालने की तैयारी कर रहा है। रूस में राजदूत रहे वेंकटेश वर्मा ने कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा है। डॉ. जयशंकर की मॉस्को यात्रा वैश्विक ध्यान आकर्षित करेगी क्योंकि भारत जी 20 की कुर्सी संभालने के लिए तैयार है। वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में भारत यूक्रेन संघर्ष के शीघ्र अंत के लिए व्यापक आकांक्षाओं को आवाज देगा और कूटनीति और वार्ता पर वापस लौटेगा। एक ऐसा बिंदु जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ अपनी बातचीत में बार-बार जोर दिया है।
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी पर जोर देते हुए दूसरे राजदूत का मानना है कि रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए नियमित आधार पर बातचीत महत्वपूर्ण है। यूक्रेन में पूर्व भारतीय राजदूत वीबी सोनी ने कहा कि रूस के साथ हमारे संबंध बहुत उच्च स्तर पर हैं। जब रणनीतिक स्तर पर आप बहुत आगे हों, तो आपको नियमित आधार पर बातचीत करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीजें इतनी तेजी से विकसित होती हैं कि आपको यह ध्यान में रखना होता है इसका प्रभाव क्या है? हमारे संबंध इससे कैसे प्रभावित होने वाले हैं? इसलिए, यह एक नियमित बातचीत सत्र है, जिसे दोनों पक्षों से जारी रखना है। हम इसे बारी-बारी से करते हैं जब हम विदेशी सरकार के प्रतिनिधि की मेजबानी करते हैं और अगली बार जब हम उसी उद्देश्य के लिए वहां जाते हैं।
भारत विशिष्ट रूप से मजबूत और प्रभावशाली स्थिति में
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए भारत विशिष्ट रूप से मजबूत और प्रभावशाली स्थिति में है। रूस का रणनीतिक साझीदार होने के साथ रूस का पुराना और सच्चा दोस्त होने के अलावा विश्व राजनीति में बढ़ती धमक के बूते भारत ने आठ माह पुराने संघर्ष की समाप्ति की उम्मीद जगा दी है। इन उम्मीदों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर दो दिवसीय रूस के दौरे पर हैं। इस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उप प्रधानमंत्री एवं व्यापार और उद्योग मंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ बातचीत करेंगे। जयशंकर के मॉस्को दौरे से राहत की खबर मिलने पर पूरी दुनिया की निगाह है।
युद्ध की शुरुआत से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सुलह के काफी प्रयास किए थे। यहां तक कि हमले से एक सप्ताह पहले वे पुतिन से मिलने मॉस्को पहुंचे थे। इसी दौरान मैक्रों ने अपने पश्चिमी साथियों के सामने प्रस्ताव रखा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शांति वार्ता का नेतृत्च और मेजबानी का अनुरोध किया जाए, लेकिन यह प्रयास कभी अमल में ही नहीं लाया गया। बहरहाल, न्यूक्लियर डिप्लोमेसी में पीएचडी कर चुके भारत के विदेश मंत्री जयशंकर रूसी अधिकारियों और नेतृत्व से मिलने मॉस्को पहुंचे हैं। वे इस वक्त भारत की विदेश नीति के प्रमुख सिद्धांतकार और उसे लागू भी करने वाले शख्स हैं। वे पूरी दुनिया में मौजूदा दौर के सबसे माहिर कूटनीतिज्ञों में शुमार हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वे वहां से पूरी दुनिया के लिए अच्छी खबर देंगे।