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रूस-यूक्रेन युद्ध: रूसी गैस का विकल्प ढूंढने में जुटा है यूरोप, लेकिन ये काम उतना आसान नहीं
Tue, 01 Mar 2022 08:53 PM IST
Atul Sinha
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कीव
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कीव
Published by: Atul Sinha
Updated Tue, 01 Mar 2022 08:53 PM IST
सार
जिस रोज रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, ईयू में प्राकृतिक गैस की कीमत तेजी से उछल कर लगभग डेढ़ गुना हो गई थी। उस रोज प्राकृतिक गैस की प्रति मेगावाट-घंटा कीमत 138 यूरो दर्ज की गई थी।
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रूस प्राकृतिक गैस
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
यूक्रेन मुद्दे पर रूस के साथ बढ़ते अपने टकराव के बीच यूरोपियन यूनियन (ईयू) के नेता रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता घटाने की कोशिशों में जुट गए हैं। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि ईयू के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा।
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गौरतलब है कि जिस रोज रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, ईयू में प्राकृतिक गैस की कीमत तेजी से उछल कर लगभग डेढ़ गुना हो गई थी। उस रोज प्राकृतिक गैस की प्रति मेगावाट-घंटा कीमत 138 यूरो दर्ज की गई थी। तब से विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के कारण यूरोप को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की रूसी सप्लाई पूरी तरह रुक सकती है।
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जर्मनी के चांसलर ओलफ शोल्ज ने पिछले 22 फरवरी को रूस से गैस सप्लाई के लिए बनी पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 को मंजूरी देने की प्रक्रिया रोकने का एलान किया था। उसके बाद कई रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम स्विफ्ट से बाहर करने का फैसला किया गया है। इन सबकी वजह से यूरोप में ऊर्जा संकट गहराने का अंदेशा पैदा हो गया है।
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इस बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने भरोसा जताया है कि अगर रूस से गैस सप्लाई बाधित हुई, तो उसका ईयू पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा ‘यूरोप दुनिया भर में मौजूद अपने दोस्तों के सहयोग से रूसी एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की कमी की भरपाई करने में सफल रहेगा।’ उन्होंने कहा- ‘इस संकट से जाहिर हुआ है कि यूरोप रूसी गैस पर अत्यधिक निर्भर है। इसलिए अब हमें अलग-अलग सप्लायर तलाशने होंगे, साथ ही अक्षय ऊर्जा के स्रोतों में अधिक निवेश करना होगा।’
कई यूरोपीय देशों में पहले से ही संकट गहराने लगा है। एस्तोनिया के राजनेताओं ने मंजूर किया है कि उनके यहां गैस का भंडार रिकॉर्ड स्तर तक घट गया है। एस्तोनिया गैस सप्लाई के लिए पूरी तरह रूस पर निर्भर है। ऐसे में अब यूरोप की आस अमेरिकी एलएनजी सप्लाई पर टिकी है। फरवरी में इस सप्लाई में काफी बढ़ोतरी हुई। गैस बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी रिफिनिटी के मुताबिक फरवरी में अमेरिका से जितनी गैस का निर्यात हुआ, उसका आधा हिस्सा यूरोप भेजा गया।
ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक ब्रुएगेल में सीनियर फेलॉ सिमी टैगलिपिएत्रा ने कहा है कि रूसी गैस की सप्लाई में आने वाली रुकावट को यूरोप वसंत तक झेल जाएगा लेकिन, अगली सर्दियों के बारे में सोचें, तो स्थिति जटिल लगती है। वैसे भी इस रुकावट के आर्थिक परिणाम तो हर हाल में गंभीर होंगे। लेकिन टैगलिपिएत्रा ने कहा कि चूंकि प्रतिबंधों से रूस के ऊर्जा संबंधी भुगतान को अलग रखा गया है, इसलिए इस बात की संभावना नहीं है कि रूस इस सप्लाई में जानबूझ कर रुकावट डालेगा।
पिछले महीने ब्रुएगेल के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च पेपर जारी किया था। उसमें कहा गया था कि अगर रूस ने गैस सप्लाई रोक दी, तो उसकी पूरी भरपाई संभव नहीं है। उस हालत में यूरोपियन यूनियन को मांग को नियंत्रित करना होगा। गौरतलब है कि यूरोप को 40 फीसदी गैस की सप्लाई रूस से होती है। जर्मनी अपनी 55 फीसदी गैस जरूरत के लिए रूस पर निर्भर है।