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यूक्रेन संकट: अपने घर और रेस्तरां तक दे आए भारतीय, लोगों से कहा- बच जाना तो इसे संभालना, क्या पता हम वापस आएं या नहीं?
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विस्तार
बड़े अरमानों से यूक्रेन गए थे। खूब मेहनत की। दौलत कमाई। घर खरीदा। गाड़ियां खरीदी। तीन रेस्तरां की चेन शुरू की। अब सब खत्म हो गया है। सब कुछ वही उसी कीव शहर में छोड़ आए हैं हम लोग। अपने पड़ोसियों से यह कह कर आए हैं कि अगर हम लोग फिर कभी वापस आए तो ठीक... वरना यह सब घर और कारोबार आप लोग संभालिएगा।
भारत के रहने वाले कई दोस्तों ने मिलकर यूक्रेन की राजधानी कीव में अपना धंधा शुरू किया था और वहीं बस गए थे। अब युद्ध शुरू हो गया है और हालात बदल गए हैं। जैसे तैसे बॉर्डर पार कर जब दोस्तों का यह समूह पोलैंड पहुंचा, तो उन लोगों ने अमर उजाला डॉट कॉम को फोन पर अपनी पूरी कहानी सुनाई।
विजयवाड़ा के रहने वाले श्रीकांत कहते हैं कि हम लोग अब पोलैंड में हैं। 36 घंटे यूक्रेन पोलैंड के बॉर्डर पर खड़े रहे। जैसे तैसे ट्रांजिट वीजा मिला है। हमारे पास महज एक कार है जो अब या तो इसको यहीं पोलैंड में ओने पौने दामों में बेच देंगे या फिर ऐसे ही छोड़कर फ्लाइट लेंगे और वापस इंडिया आ जाएंगे।
वह कहते हैं कि अपना घर छोड़ना सबसे मुश्किल होता है। श्रीकांत कहते हैं कि 8 साल पहले जब अपना वतन भारत छोड़कर यूक्रेन आए थे तो सोचा यही था कि अब ताउम्र यहीं पर अपने परिवार को पाल पोस कर एक अच्छी जिंदगी जी लूंगा, लेकिन क्या पता था कि अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी ऐसे ही छोड़कर एक रोज वापस अपने वतन इन हालातों में लौटना पड़ेगा।
श्रीकांत कहते हैं कि हमने अपने घर और सभी रेस्तरां की चाबियां अपने पड़ोसियों को दे दी हैं। वो कहते हैं कि हमारे सारे रेस्तरां बंकर हैं। इसलिए अपने यूक्रेनियन दोस्तों से यही कह कर आया हूं कि अपनी जिंदगी बचाने के लिए इन बंकरों में जाकर छिप जाओ। जब कभी हालात सामान्य हों और जिंदगी बचे तो आप लोग खुद कारोबार शुरू कर देना। श्रीकांत कहते हैं कि अब शायद ही संभव हो कि हम कभी वापस यूक्रेन जा सके।
श्रीकांत के साथ सफर कर रहे हैं उनके ही पड़ोसी और मुंबई के रहने वाले अभिनव कहते हैं कि वह तो अभी 3 साल पहले ही यूक्रेन में अपना कारोबार करने के लिए शिफ्ट हुए थे। अभिनव की यूक्रेन में बेकरी थी। वो कहते हैं कि उनके पास इतना वक्त नहीं था कि वह घर में रखा हुआ है कैश, बैंक में जमा अपना रुपये निकाल पाते।
अभिनव कहते हैं कि उनकी बेकरी में तीन-चार दिनों के लिए खाने पीने का सामान था। इसलिए उन्होंने अपनी बेकरी को ऐसे ही खुला लोगों के लिए छोड़ दिया, क्योंकि बेकरी उनकी एक बंकर में बनी हुई थी। उनके कई स्थानीय जानने वालों का परिवार उसी में आकर फिलहाल अपनी जान बचाने के लिए शिफ्ट हो गया है।
वो कहते हैं कि 36 घंटे का लंबा इंतजार करने के बाद यूक्रेन से पोलैंड के अंदर उनकी और उनके दोस्तों की एंट्री हुई है। उनके पास अब इतना पैसा भी नहीं है कि वह 56 दिन भी पोलैंड में ठहर सके। अभिनव भारत सरकार से गुजारिश कर रहे हैं कि उन लोगों को जितनी जल्दी हो मदद करके भारत बुलाया जाए, क्योंकि पोलैंड ने ट्रांजिट वीजा बहुत कम वक्त के लिए दिया है।