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Russia-Ukraine Crisis: कैसे पुतिन बिना लड़े यूक्रेन को कमजोर कर रहे? किस तरह लड़खड़ाने लगी कीव की अर्थव्यवस्था?

Sat, 19 Feb 2022 06:59 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 19 Feb 2022 06:59 PM IST
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सार
यूक्रेन में रियल स्टेट और एयरलाइंस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। कई देशों ने यूक्रेन जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं और वाणिज्यिक शिपिंग पर खतरा मंडरा रहा है। 
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यूक्रेन और रूस की सीमा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस ने कुछ दिनों पहले एक वीडियो जारी कर क्रीमिया से अपने सैन्य अभ्यास को समाप्त करने की घोषणा तो जरूर की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को रूस पर कतई भरोसा नहीं है। उन्होंने शुक्रवार रात टीवी पर अपने संबोधन में कहा है कि रूस यूक्रेन पर हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि सहयोगी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत के बाद हमारे पास रूस की तैयारी के बारे में पुख्ता खुफिया सूचनाएं हैं।


वहीं एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि यूक्रेन की सीमा पर अभी भी 40 प्रतिशत रूसी सैनिक हमले की स्थिति में तैनात हैं। इस बीच रूस के हमले के आशंका के मद्देनजर यूक्रेन में आर्थिक संकट गहराने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी पुतिन एक बार फिर यूक्रेन को अस्थिर करने और यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने में लगे हैं। वहीं मध्य एशियाई देशों में आर्थिक, वित्तीय और सामाजिक दबाव बढ़ने की आशंका होने लगी है। 


यूक्रेन में आर्थिक संकट बढ़ने लगा
बॉर्डर पर रूसी सैनिकों की तैनाती से यूक्रेन में तनाव पसरा हुआ है। एक तरफ जहां देश पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, वहीं देश पर आर्थिक संकट भी छाने लगा है। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अध्यक्ष और पूर्व आर्थिक विकास मंत्री टिमोफिए मायलोवानोव के एक बयान के मुताबिक उनकी संस्था ने अनुमान लगाया है कि इस संकट की वजह से पिछल कुछ हफ्तों में ही यूक्रेन ने ‘कई अरब डॉलर’खर्च कर दिए हैं। यदि युद्ध हुआ या लंबी घेराबंदी हुई तो स्थिति और खराब हो सकती है।

यूूक्रेन की राजधानी कीव
यूूक्रेन की राजधानी कीव - फोटो : social Media
रियल स्टेट पर सबसे ज्यादा संकट
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के  मुताबिक यूक्रेन में रियल स्टेट और एयरलाइंस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की राजधानी कीव में एक फ्रीलांस प्रोपर्टी डीलर पावलो कलियुक अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और इजराइल के लोगों को संपत्ति बेचने और किराए पर दिलवाने का काम करते हैं। नवंबर में, जब रूस ने पहली बार देश की सीमा पर सैनिकों की तैनात करनी शुरू उनके डील रद्द होने लगे। कलियुक के बयान के मुताबिक कीव में मध्यम या बड़े अपार्टमेंट के अधिकांश सौदे रुके हुए हैं क्योंकि हम वास्तव में सुनिश्चित ही नहीं हैं कि कल क्या होगा? 

अंतरराष्ट्रीय उडानों पर रोक
कई देशों ने यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय एयरलायंस की उड़ानें रोक दी हैं। इस सेक्टर को पहला बड़ा झटका बीते सोमवार को तब लगा जब यूक्रेन की दो एयरलाइनों ने कहा कि वे अपनी उड़ानों के लिए बीमा हासिल करने में असमर्थ हैं। इससे पहले 11 फरवरी को, लंदन स्थित बीमा कंपनियों ने विमानन कंपनियों को चेतावनी दी थी कि वे यूक्रेन या उसके हवाई क्षेत्र से ऊपर उड़ान भरने वालों को उड़ानों के लिए बीमा नहीं दे सकते हैं। हालात के मद्देनजर यूक्रेन सरकार को विमानों के उड़ान भरने के लिए 592 मिलियन डॉलर का बीमा कोष बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

ओडेसा पोर्ट
ओडेसा पोर्ट - फोटो : Social Media
बंदरगाहों की नाकेबंदी का भी खतरा
यूक्रेन प्रति वर्ष लगभग 300,000 टन सूरजमुखी तेल का निर्यात करता है और यूक्रेन के दक्षिणी तट पर ब्लैक सागर में रूसी नौसेना के अभ्यास करने से कीव को बंदरगाहों की नाकेबंदी का भी खतरा नजर आने लगा है। फिलहाल रूस ने कॉरिडोर को वाणिज्यिक शिपिंग के लिए खुला रहने दिया है और यूक्रेन के बंदरगाहों के संचालन में कोई बाधा नहीं आई है। लेकिन हमले की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां डर में हैं। लंदन के समुद्री बीमा बाजार ने इसी मंगलवार को ब्लैक सागर और आजोव सागर में रूसी और यूक्रेनी जल सीमा को उच्च जोखिम के रूप में सूचीबद्ध कर दिया है जिससे बंदरगाहों से माल भेजना और महंगा हो गया है। इससे यूक्रेन पर और अधिक आर्थिक दबाव पड़ेगा क्योंकि अनाज निर्यात करने के लिए यूक्रेन ब्लैक सागर के बंदरगाहों पर निर्भर है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब सोवियत सेना ने इसे नाजियों से वापस लेने के लिए संघर्ष किया था तो यूक्रेन के बंदरगाह भयंकर लड़ाई का गवाह बने थे। रिपोर्टस के मुताबिक इसका एक हिस्सा भारी बमबारी की वजह से टूट गया जिसकी अभी तक मरम्मत नहीं हुई है। ओडेसा बंदरगाह, देश का सबसे बड़ा तेल और गैस टर्मिनल और अनाज निर्यात का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है जिसे संभावित लक्ष्य माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुछ सैन्य विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर रूसी सेना ने हमला किया तो पुतिन ओडेसा को लेने की कोशिश कर सकते हैं।

नई नौकरियां नहीं मिलने का सवाल
कहा जाने लगा कि युद्ध के भय से आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पड़ने लगा है। इससे नई नौकरियों पर खतरा मंडराएगा और प्रबंधन नए लोगों काम पर रखने से पीछे हट सकता है। इससे कोई नया उद्यम भी शुरू नहीं हो सकता है। एक क्रिएटिव एजेंसी, मोगजी ग्रूप की मुख्य कार्यकारी गोरोवाया के बयान के मुताबिक लोग घर बैठे सोच रहे हैं कि कल क्या होगा?

एक निवेश फर्म ड्रैगन कैपिटल की मुख्य अर्थशास्त्री ओलेना बिलन ने अपने एक बयान में कहा कि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के इस साल लगभग चार प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन सैन्य संकट ने उस भविष्यवाणी को लगभग आधा कर दिया है।
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