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Russia on US Elections: ट्रंप की जीत पर रूस की चौंकाने वाली प्रतिक्रिया, राष्ट्रपति भवन का बयान- अभी इंतजार...
Wed, 06 Nov 2024 05:16 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 06 Nov 2024 05:16 PM IST
सार
रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम पर चौंकाने वाली प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की सुनिश्चित जीत को लेकर क्रेमलिन ने कहा कि फिलहाल वे अंतिम नतीजों की घोषणा का इंतजार करेंगे। बता दें कि कई राज्यों में मतगणना जारी है। डेमोक्रेट प्रत्याशी कमला हैरिस की हार पक्की हो चुकी है। रिपब्लिकन खेमे के प्रत्याशी और पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे निकल चुके हैं।
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कमला हैरिस, व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
फरवरी, 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए युद्ध के कारण रूस और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति निर्वाचित हो चुके हैं। इस अहम घटनाक्रम पर रूस ने चौंकाने वाला बयान दिया है। रूस के राष्ट्रपति भवन- क्रेमलिन की तरफ से जारी बयान के मुताबिक व्लादिमीर पुतिन ट्रंप को बधाई देंगे, फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने सतर्क रूख अपनाया है। सरकारी टीवी पर जारी बयान के मुताबिक ट्रंप की जीत की सराहना की गई है। राष्ट्रपति भवन की तरफ से जारी बयान के अलावा रूस के विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया है कि यूक्रेन साथ जारी जंग पर व्हाइट हाऊस की सत्ता में बदलाव से फर्क नहीं पड़ता।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से अमेरिका की 'रूस को रोको की नीति' में बदलाव की संभावना नहीं है। रूस किसी भ्रम में नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा, रूसी हितों को ध्यान में रखते हुए नए अमेरिकी प्रशासन के साथ संपर्क कायम रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप राष्ट्रपति बनते ही यूक्रेन और रूस संघर्ष को बंद करवा देंगे यह दुष्प्रचार फैलाया गया। लेकिन रूस के लिए जमीनी हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने साफ किया कि रूस विशेष सैन्य अभियान के उद्देश्यों के पूरा होने तक अपने अभियान को रोकेगा, इसका कोई सवाल ही नहीं उठता।
अमेरिका के प्रस्ताव पर क्या रूख अपनाएगा रूस
जखारोवा ने कहा,अगर अमेरिकी नीति में कुछ भी बदलाव होता है और हमारे पास कोई प्रस्ताव आता है, तो हम रूस के हितों को ध्यान में रखते हुए उन पर विचार करने को तैयार रहेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा समेत तमाम परिस्थितियों में रूस अपने हितों की रक्षा करेगा। वैसे भी यह बेहतर होगा कि अगला अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दे।
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चुनाव में कौन से विदेशी मुद्दे हावी हुए
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में ट्रंप रूस यूक्रेन युद्ध को रुकवाने के वादे करते रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर वे राष्ट्रपति होते तो युद्ध शुरू ही नहीं होता। यह भी रोचक है कि अमेरिका के चुनावी दंगल में रूस-यूक्रेन युद्ध और इस्राइल-हमास जंग के कारण बढ़ी महंगाई बड़ा मुद्दा था।
यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर क्रेमलिन का बयान
क्रेमलिन से जारी बयान के मुताबिक अमेरिका में ट्रंप की जीत के बाद यूक्रेन के साथ 30 महीने से अधिक समय से जारी युद्ध समाप्त होता है या नहीं, यह देखना बेहद दिलचस्प रहेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बयान दिए थे। लेकिन यह तो समय ही बताएगा कि इन बयानों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
क्या पुतिन ट्रंप को उनकी जीत पर बधाई देंगे?
अमेरिका में चुनाव परिणाम निश्चित होने के बाद पेस्कोव ने कहा, अमेरिका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई में शामिल है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ट्रंप को उनकी जीत पर बधाई देंगे, फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। वाशिंगटन के साथ रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से निम्नतम स्तर पर हैं।
क्या जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथग्रहण के बाद बदलाव होगा?
रूस ने यूक्रेन के साथ जारी हिंसक संघर्ष के बीच कहा, हमने बार-बार कहा है कि अमेरिका इस संघर्ष को समाप्त करने में योगदान दे सकता है। भले ही ऐसा रातों-रात नहीं हो सकता, लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपनी विदेश नीति की दिशा बदलने में सक्षम है। अगर हां तो ऐसा कैसे होगा, ये जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथग्रहण के बाद ही पता चलेगा।
क्यों तनावपूर्ण हैं अमेरिका और रूस के संबंध
रूस ने कहा कि अमेरिका अभी भी एक शत्रुतापूर्ण बर्ताव करने वाला राज्य है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच टकराव का इतिहास कई दशक पुराना है। 1962 में क्यूबा में उपजे मिसाइल संकट के समय भी तत्कालीन सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी। इसके लगभग 60 साल के बाद जब रूस ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर 'विशेष सैन्य कार्रवाई' की आड़ में हमले किए तो भारत समेत कई देशों ने हिंसक संघर्ष को लेकर चिंता जताई। दोनों देशों के टकराव के कारण अब तक 70 हजार से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं, जबकि 10 हजार से अधिक आम लोगों की भी मौत हुई है। कई अपुष्ट रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 5-6 लाख तक भी बताई गई है। युद्ध की विभीषिका के दौरान अमेरिका यूक्रेन के साथ खड़ा रहा और रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इसी समय से दोनों देशों के संबंध अधिक तनावपूर्ण हैं।
भारत और ब्रिटेन ने भेजा बधाई संदेश
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर भारत, ब्रिटेन समेत कई देशों की प्रतिक्रिया सामने आई। भारत से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में वैश्विक शांति समेत कई अहम मुद्दों पर काम करने को लेकर आशान्वित हैं। ब्रिटिश सरकार ने भी अमेरिकी को बधाई संदेश भेजा।
इनपुट- प्रणय उपाध्याय
संबंधित वीडियो-
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से अमेरिका की 'रूस को रोको की नीति' में बदलाव की संभावना नहीं है। रूस किसी भ्रम में नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा, रूसी हितों को ध्यान में रखते हुए नए अमेरिकी प्रशासन के साथ संपर्क कायम रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप राष्ट्रपति बनते ही यूक्रेन और रूस संघर्ष को बंद करवा देंगे यह दुष्प्रचार फैलाया गया। लेकिन रूस के लिए जमीनी हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने साफ किया कि रूस विशेष सैन्य अभियान के उद्देश्यों के पूरा होने तक अपने अभियान को रोकेगा, इसका कोई सवाल ही नहीं उठता।
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अमेरिका के प्रस्ताव पर क्या रूख अपनाएगा रूस
जखारोवा ने कहा,अगर अमेरिकी नीति में कुछ भी बदलाव होता है और हमारे पास कोई प्रस्ताव आता है, तो हम रूस के हितों को ध्यान में रखते हुए उन पर विचार करने को तैयार रहेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा समेत तमाम परिस्थितियों में रूस अपने हितों की रक्षा करेगा। वैसे भी यह बेहतर होगा कि अगला अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दे।
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चुनाव में कौन से विदेशी मुद्दे हावी हुए
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में ट्रंप रूस यूक्रेन युद्ध को रुकवाने के वादे करते रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर वे राष्ट्रपति होते तो युद्ध शुरू ही नहीं होता। यह भी रोचक है कि अमेरिका के चुनावी दंगल में रूस-यूक्रेन युद्ध और इस्राइल-हमास जंग के कारण बढ़ी महंगाई बड़ा मुद्दा था।
यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर क्रेमलिन का बयान
क्रेमलिन से जारी बयान के मुताबिक अमेरिका में ट्रंप की जीत के बाद यूक्रेन के साथ 30 महीने से अधिक समय से जारी युद्ध समाप्त होता है या नहीं, यह देखना बेहद दिलचस्प रहेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बयान दिए थे। लेकिन यह तो समय ही बताएगा कि इन बयानों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
क्या पुतिन ट्रंप को उनकी जीत पर बधाई देंगे?
अमेरिका में चुनाव परिणाम निश्चित होने के बाद पेस्कोव ने कहा, अमेरिका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई में शामिल है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ट्रंप को उनकी जीत पर बधाई देंगे, फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। वाशिंगटन के साथ रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से निम्नतम स्तर पर हैं।
क्या जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथग्रहण के बाद बदलाव होगा?
रूस ने यूक्रेन के साथ जारी हिंसक संघर्ष के बीच कहा, हमने बार-बार कहा है कि अमेरिका इस संघर्ष को समाप्त करने में योगदान दे सकता है। भले ही ऐसा रातों-रात नहीं हो सकता, लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपनी विदेश नीति की दिशा बदलने में सक्षम है। अगर हां तो ऐसा कैसे होगा, ये जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथग्रहण के बाद ही पता चलेगा।
क्यों तनावपूर्ण हैं अमेरिका और रूस के संबंध
रूस ने कहा कि अमेरिका अभी भी एक शत्रुतापूर्ण बर्ताव करने वाला राज्य है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच टकराव का इतिहास कई दशक पुराना है। 1962 में क्यूबा में उपजे मिसाइल संकट के समय भी तत्कालीन सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी। इसके लगभग 60 साल के बाद जब रूस ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर 'विशेष सैन्य कार्रवाई' की आड़ में हमले किए तो भारत समेत कई देशों ने हिंसक संघर्ष को लेकर चिंता जताई। दोनों देशों के टकराव के कारण अब तक 70 हजार से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं, जबकि 10 हजार से अधिक आम लोगों की भी मौत हुई है। कई अपुष्ट रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 5-6 लाख तक भी बताई गई है। युद्ध की विभीषिका के दौरान अमेरिका यूक्रेन के साथ खड़ा रहा और रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इसी समय से दोनों देशों के संबंध अधिक तनावपूर्ण हैं।
भारत और ब्रिटेन ने भेजा बधाई संदेश
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर भारत, ब्रिटेन समेत कई देशों की प्रतिक्रिया सामने आई। भारत से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में वैश्विक शांति समेत कई अहम मुद्दों पर काम करने को लेकर आशान्वित हैं। ब्रिटिश सरकार ने भी अमेरिकी को बधाई संदेश भेजा।
इनपुट- प्रणय उपाध्याय
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