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Hindi News ›   World ›   Ruchira Kamboj, Ambessador of India to UN, Speaks On Israel and Palestine at UNSC briefing on Middle East

Israel-Palestine: इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच कैसे सुलझेगा विवाद? संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दिया जवाब

Tue, 20 Dec 2022 10:58 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 20 Dec 2022 10:58 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने  सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की गारंटी के लिए केवल बातचीत का ही रास्ता है।

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Ruchira Kamboj, Ambessador of India to UN, Speaks On Israel and Palestine at UNSC briefing on Middle East
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद के मसले पर आज भारत ने अपना पक्ष रखा है। भारत ने बताया कि आखिर दोनों राज्यों के बीच मसला कैसे सुलझेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने  सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की गारंटी के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं। इस विवाद के समाधान के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है जो हमें वहां तक ले जा सकती है।

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यहां देखें वीडिया रुचिरा कंबोज ने क्या कहा...
बता दें कि इस्राइल और फिलिस्तीन दो ऐसे देश हैं, जिनका विवाद काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और मतभेद को खत्म करने के लिए कई बार समझौते हुए पर निष्कर्ष कुछ खास नहीं निकला। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से उन सभी वजहों के बारे में बताएंगे, जिसके कारण इन दोनों देशों के बीच का विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला गया।
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इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच के मतभेद ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ
इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच के मतभेद की शुरुआत ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ होती है। इस दौरान पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा था। कई देश टुकड़ों-टुकड़ों में बंटे थे। राष्ट्रवाद की लहर इन्हें एक कर रही थी। इटली और जर्मनी जैसे देश राष्ट्रवाद के नाम पर एक हो रहे थे। इसका प्रभाव यहूदियों के बीच भी देखने को मिला। राष्ट्रवाद की भावना यहूदी लोगों के बीच जगी। उन्हें अपने पवित्र स्थान पर दोबारा जाकर बसने की लालसा उठी।


यहीं से जियोनिष्ट आंदोलन की शुरूआत होती है। 19वीं शताब्दी में यहूदियों की यह पवित्र भूमि फिलिस्तीन के नाम से जानी जाती थी। इस दौरान पूरे यूरोप में यहूदी बिखरे हुए थे। उनके साथ यूरोप में काफी शोषण होता आया था। जियोनिष्ट आंदोलन के दौरान शुरूआत में छोटे स्तर पर यहूदियों का पलायन फिलिस्तीन की ओर हुआ। इसके बाद आता है प्रथम विश्व युद्ध का दौरा। 1917 में बेलफोर डिक्लेरेशन आया। कई लोगों का मानना है कि बेलफोर डिक्लेरेशन ही वह प्रमुख वजह थी, जिसने इस्राइल और फिलिस्तीन मतभेद को जन्म दिया।
 

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