Israel-Palestine: इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच कैसे सुलझेगा विवाद? संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दिया जवाब
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की गारंटी के लिए केवल बातचीत का ही रास्ता है।
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद के मसले पर आज भारत ने अपना पक्ष रखा है। भारत ने बताया कि आखिर दोनों राज्यों के बीच मसला कैसे सुलझेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की गारंटी के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं। इस विवाद के समाधान के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है जो हमें वहां तक ले जा सकती है।
यहां देखें वीडिया रुचिरा कंबोज ने क्या कहा...
#WATCH | "...No alternative to the two-State solution to guarantee lasting peace b/w Israel & Palestine & direct negotiation the only path that can lead us there," says Ruchira Kamboj, Amb of India to UN, at UNSC briefing on Middle East.
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(Video: Permanent Mission of India to UN) pic.twitter.com/KLklKMHwwi — ANI (@ANI) December 20, 2022
बता दें कि इस्राइल और फिलिस्तीन दो ऐसे देश हैं, जिनका विवाद काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और मतभेद को खत्म करने के लिए कई बार समझौते हुए पर निष्कर्ष कुछ खास नहीं निकला। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से उन सभी वजहों के बारे में बताएंगे, जिसके कारण इन दोनों देशों के बीच का विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला गया।
इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच के मतभेद ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ
इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच के मतभेद की शुरुआत ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ होती है। इस दौरान पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा था। कई देश टुकड़ों-टुकड़ों में बंटे थे। राष्ट्रवाद की लहर इन्हें एक कर रही थी। इटली और जर्मनी जैसे देश राष्ट्रवाद के नाम पर एक हो रहे थे। इसका प्रभाव यहूदियों के बीच भी देखने को मिला। राष्ट्रवाद की भावना यहूदी लोगों के बीच जगी। उन्हें अपने पवित्र स्थान पर दोबारा जाकर बसने की लालसा उठी।
यहीं से जियोनिष्ट आंदोलन की शुरूआत होती है। 19वीं शताब्दी में यहूदियों की यह पवित्र भूमि फिलिस्तीन के नाम से जानी जाती थी। इस दौरान पूरे यूरोप में यहूदी बिखरे हुए थे। उनके साथ यूरोप में काफी शोषण होता आया था। जियोनिष्ट आंदोलन के दौरान शुरूआत में छोटे स्तर पर यहूदियों का पलायन फिलिस्तीन की ओर हुआ। इसके बाद आता है प्रथम विश्व युद्ध का दौरा। 1917 में बेलफोर डिक्लेरेशन आया। कई लोगों का मानना है कि बेलफोर डिक्लेरेशन ही वह प्रमुख वजह थी, जिसने इस्राइल और फिलिस्तीन मतभेद को जन्म दिया।