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Rohingya Refugee Camp: इंडोनेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर रार, छात्रों ने निर्वासन की मांग

Thu, 28 Dec 2023 07:50 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, जकार्ता Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 28 Dec 2023 07:50 PM IST
सार

इंडोनेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर स्थानीय लोगों में खासा रोष हैं। इंडोनेशियाई छात्रों ने म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों के आवास सम्मेलन शिविर में घुसकर उनके निर्वासन की मांग की है। 

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Rohingya Refugee Camp: Ruckus over Rohingya refugees in Indonesia, students demand deportation
इंडोनेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर रार - फोटो : ANI

विस्तार

इंडोनेशियाई छात्रों ने म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों के आवास सम्मेलन शिविर में घुसकर उनके निर्वासन की मांग की है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इंडोनेशिया के बांदा आचे शहर के कन्वेंशन कैंप में सैंकडों रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे थे। रॉयटर्स की एक फुटेज का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में कहा गया कि हरे रंग की जैकेट पहने छात्रों को इमारत के बड़े बेसमेंट में भागते हुए दिखाया गया है, जहां रोहिंग्या पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की भीड़ जमीन पर बैठी थी और रो रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकारियों ने रोहिंग्याओं को बाहर निकाला। दावा किया गया कि कुछ लोगों ने अपना सामान बोरियों में डाला और दूसरे वैकल्पिक आश्रम में ले गए।  
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रोहिंग्या को लेकर स्थानीय लोगों में रोष- रिपोर्ट में दावा 
रिपोर्ट के मुताबिक, रोहिंग्या शरणार्थियों ने इंडोनेशिया में असुरक्षित महसूस किया है। दावा किया जा रहा है कि स्थानीय लोग जातीय अल्पसंख्यकों के आने से खासा रोष में हैं। बता दें रोहिंग्या म्यांमार में उत्पीड़न का शिकार हुए हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने मानव तस्करी, अस्थायी आश्रय की पेशकश के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करने का वादा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर और अप्रैल के बीच संख्या में वृद्धि हुई है। 
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इंडोनेशिया में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर रार
बांदा आचे में छात्रा वारिजा अनीस मुनांदर ने बुधवार को शहर में एक रैली में रोहिंग्या के निर्वासन का आह्वान किया है। वहीं अन्य छात्रों ने कहा कि वे हमारे देश बिन बुलाए आए है, जैसे मानों ये देश उनका हो। इस महीने की शुरुआत में यूएनसीएचआर ने कहा कि एजेंसी इंडोनेशिया में अस्वीकृति की रिपोर्टों से "चिंतित" थी। बता दें इंडोनेशिया 1951 के शरणार्थियों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, लेकिन शरणार्थियों के आने पर उन्हें स्वीकार करने का उसका इतिहास है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रोहिंग्याओं ने म्यांमार छोड़ दिया है, जहां उन्हें आम तौर पर "दक्षिण एशिया के विदेशी घुसपैठिए" माना जाता है। म्यांमार में उन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया जाता है। 
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