नेपाल: सत्ताधारी गठबंधन में असंतोष के कारण शुरू हुई नए समीकरणों की चर्चा
जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उनकी पार्टी को गठबंधन से कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने कहा- ‘जहां हम अकेले लड़े, वहां हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा। जहां हम गठबंधन के रूप में लड़े, उनमें से ज्यादातर जगहों पर हम हार गए।’
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नेपाल के राजनीतिक हलकों में स्थानीय चुनावों के बाद अब फिर इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि पांच दलों के राष्ट्रीय सत्ताधारी गठबंधन का अब क्या भविष्य है। गठबंधन में शामिल नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनमोर्चा ने आपसी तालमेल के साथ स्थानीय चुनावों में उतरने का एलान किया था। हालांकि तालमेल में खींचतान रही, इसके बावजूद मोटे तौर पर इन पांचों दलों ने साथ मिल कर चुनाव लड़ा।
स्थानीय चुनाव के नतीजों से जाहिर हुआ है कि गठबंधन का सबसे ज्यादा फायदा नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर को मिला। माओइस्ट सेंटर के बारे में पहले अनुमान लगाया गया था कि इन चुनावों में उसे काफी नुकसान होगा। लेकिन असल में स्थानीय चुनावों के बाद वह बड़ी ताकत बन कर उभरी है। जबकि यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी का कमोबेश सफाया हो गया है। ये पार्टी कुल 19 स्थानीय इकाइयों में ही बढ़त बना पाई। बाकी दो पार्टियां भी कोई असर दिखा पाने में नाकाम रहीं।
गठबंधन से नहीं मिला फायदा
जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उनकी पार्टी को गठबंधन से कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने कहा- ‘जहां हम अकेले लड़े, वहां हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा। जहां हम गठबंधन के रूप में लड़े, उनमें से ज्यादातर जगहों पर हम हार गए।’ हालांकि यादव ने यह भी कहा है कि इन नतीजों के बावजूद राष्ट्रीय गठबंधन संभवतया कायम रहेगा। उन्होंने कहा- ‘अब गलतियां सुधारी जानी चाहिए। ज्यादातर जगहों पर नेपाली कांग्रेस ने अपने वोट दूसरे दलों को ट्रांसफर नहीं किए। इसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ा।’
नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए मतदान 13 मई को हुआ था। उसके चार दिन बाद यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी के नेता माधव कुमार नेपाल ने अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर खुलेआम असंतोष जताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल दूसरे दलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अब पार्टी के महासचिव बेदुराम भुसाल ने कहा है- ‘अब हम नतीजों की समीक्षा करेंगे और उसके बाद पार्टी की अगली रणनीति के बारे में निर्णय लेंगे। इस दौरान यह भी तय किया जाएगा कि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के प्रति हमारा क्या रुख हो।’
ओली स्वीकारें गलती तो बन सकती है बात
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक माओइस्ट सेंटर पार्टी में भी इस बात को लेकर असंतोष है कि जहां उनकी पार्टी ने अपने वोट गठबंधन सहयोगियों को ट्रांसफर कराए, वहीं नेपाली कांग्रेस ने ऐसा नही किया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य हरिबोल गुजारेल ने कहा है- ‘कुछ जगहों पर ऐसा लगा कि गठबंधन कारगर हुआ है। लेकिन ज्यादातर जगहों पर हमें नेपाली कांग्रेस के वोट नहीं मिले।’ माओइस्ट सेंटर ने इन चुनावों में 122 इकाइयों में बढ़त बनाई। 2017 में उसे कुल 106 जगहों पर ही जीत मिली थी।
सत्ताधारी गठबंधन में असंतोष की खबरों के बीच सियासी हलकों में माओइस्ट सेंटर और विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) में फिर से संपर्क बनने की चर्चा शुरू हो गई है। माओइस्ट सेंटर के नेताओं ने अखबारों से कहा है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार करें, तो दोनों पार्टियां फिर से करीब आ सकती हैँ। ऐसी चर्चाओं के कारण सत्ताधारी गठबंधन के टिके रहने को लेकर संशय पैदा हो गया है।