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चीनः लडकियां ना पढ़ें 'लडकों वाले' विषय

Sat, 19 Oct 2013 11:46 AM IST
Updated Sat, 19 Oct 2013 11:46 AM IST
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बीते 100 सालों को यदि मुड कर देखें तो दुनिया भर में महिलाओं ने ऊंची उडान भरी है। मगर अपनी असाधारण कोशिशों के बावजूद उन्हें राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मोर्चों पर पुरुषों की तुलना में भारी चुनौतियों का सामना भी करना पड रहा है।

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बीबीसी अपने '100 वूमेन सीजन' सीरिज के जरिए जमाने भर की  स्त्रियों की मौजूदा स्थिति की पडताल कर रहा है। इस कडी में इस बार चीन में स्त्रियों के हालात।
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ब्यूटीशियन या वकील? केक डेकोरेटर या रेडियो होस्ट? चीन में आजकल "आई हैव ए ड्रीम" थीम पार्क में बच्चों को बतौर करियर अलग-अलग विकल्पों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
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यहां छोटी बच्चियों को  एयरहोस्टेस की तरह कपडे पहनने के सलीके सिखाए जा रहे हैं तो इसके विपरीत लडकों को सुरक्षा गार्ड या कस्टम एजेंट बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

हकीकत तो ये है कि इस काल्पनिक दुनिया के बाहर चीन की असल दुनिया में भी स्त्री-पुरुष के बीच मौजूद लैंगिक भेदभाव देखे जा सकते हैं।

'मेन ओनली' पाठ्यक्रम

चीन में रूढिवादी सोच के लोग चाहते हैं कि लडकियां वे काम न करें जो लडकें अब तक करते आए हैं। चीन के कई विश्वविद्यालयों और दूसरे क्षेत्रों में भी महिलाओं के प्रति यही नजरिया है।

बीजिंग से 600 किमी दक्षिण जाने पर चीन के पूर्वी प्रांत जिआंसु में 'चीनी खनन और प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय' (चाइना माइनिंग एण्ड टेक्नोलोजी यूनिवर्सिटी) है। यहां माइनिंग इंजीनियरिंग के कुछ छात्र एक प्रोफेसर का लेक्चर बडे ध्यान से सुन रहे हैं।

ये छात्र विश्विद्यालय के दूसरे छात्रों के लिए ईर्ष्या का विषय हैं। क्योंकि वे एक खास पाठ्यक्रम 'ग्रीन कार्ड मेजर्स' पढ रहे हैं।

'ग्रीन कार्ड मेजर्स' पाठ्यक्रम खास है क्योंकि स्नातक के बाद यह रोजगार की तुरंत गारंटी देता है। मगर इससे भी बडी बात ये है कि ये पाठ्यक्रम 'मेन ओनली' है। यानि इसमें लडकियां प्रवेश नहीं ले सकतीं।

इस बारे में यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ प्रोफेसर से बात करने पर उन्होंने कहा, "चीन का श्रम कानून खनन कार्य को महिलाओं के लिए अनुपयुक्त मानता है। हमने इसीलिए माइनिंग इंजीनियरिंग को पुरुषों तक सीमित रखा है।"
सुरंग और नौपरिवहन

चीनी महिलाओं के साथ इस तरह का परंपरावादी रवैया अपनाने वाला यह अकेला विश्विद्यालय नहीं है। चीन में कई और विश्विद्यालय ऐसे हैं जो सुरक्षा का तर्क देते हुए महिलाओं को सुरंग और नौपरिवहन से जैसे विषयों से दूर रख रहे हैं।

उत्तरी चीन में स्थित डलियन विश्विद्यालय है। यहां लडकियां नेवल इंजीनियरिंग (समुद्री अभियांत्रिकी) नहीं पढ सकतीं। इस विश्विद्यालय के एडमिशन ऑफिसर ने बीबीसी को इसका कारण ये बताया कि महिलाओं के लिए महीनों समंदर में किसी जहाज पर रहना कठिन है।

इसी से मिलती जुलती वजह बीजिंग की 'पीपल्स पुलिस यूनिवर्सिटी' में महिलाओं के प्रवेश पर लगी गंभीर रोक के बारे में पूछने पर बताई गई। इस विश्वविद्यालय में लडकियों के लिए मात्र 10-15 फीसदी का कोटा है। जब एडमिशन ऑफिसर से वजह जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने पहले तो मिलने से इंकार कर दिया।

पुलिस महिला मंजूर नहीं
फिर 'पीपल्स पुलिस यूनिवर्सिटी' के एडमिशन ऑफिसर ने बीबीसी को फोन पर बताया कि बडी संख्या में महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए रोक लगाई गई है कि स्नातक के बाद उनके लिए काम के मौके बहुत कम हैं। इसके अलावा चीन में लोग पुलिस के रूप में किसी महिला को देखने के आदी नहीं हैं।

जिआंसु का खनन अभियांत्रिकी विभाग भी कुछ ऐसा ही सोचता है। वह मानता है कि महिलाएं खनन के भारी-भरकम मशीनों को उठाने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा खान में कोई गंभीर या आपात स्थिति आने पर तुरंत वहां से निकलने में भी वे सक्षम नहीं हैं।

जिआंसु विश्विद्यालय के प्रोफेसर शू तर्क देते हुए कहते हैं, "कुछ काम तो महिलाओं के लिए एकदम फिट नहीं बैठते। अगर उन्हें ऐसे कामों के लिए बाध्य किया गया तो यह उनकी ऊर्जा की बर्बादी होगी।"

महिलाओं के पक्ष में नेटवर्क

चीन के कई लोग महिलाओं को कुछ विषयों से दूर रखने के इन तर्कों से कतई  सहमत नहीं दिखते। छात्रों और वकीलों का छोटा मगर ताकतवर नेटवर्क महिलाओं पर लगी इन पाबंदियों के खिलाफ खडा है।

इस नेटवर्क के एक छात्र कार्यकर्ता का कहना है, "ये मुखर लैंगिक भेदभाव है। अगर कोई व्यक्ति खुद को कठिन काम में सक्षम समझता है, तो उसे वो काम करने देना चाहिए। "

वे आगे कहते हैं, "विश्विद्यालयों को महिलाओं पर इस तरह की पाबंदियां लगाने के बजाए उन्हें अपनी रुचि का काम करने देना चाहिए।"

कार्यकर्ताओं का यह नेटवर्क पुरुषों के पक्ष में बनाए गए जेंडर कोटा के लिए भी अपनी आवाज उठा रहा है।
रिजल्ट में लैंगिक संतुलन की नीति

हाल के कुछ वर्षों में चीन में सभी मुख्य शिक्षण संस्थानों में लडकियां लगातार टॉप कर रही हैं।

लडकों के पिछडने के अंदेशे और परीक्षा परिणामों में लैंगिक संतुलन बनाए रखने के लिए स्कूल-कॉलेजों ने प्रवेश में लडकियों के लिए ज्यादा नंबर और लडकों के लिए कम नंबर का प्रावधान रखा है।

मगर चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीन के शिक्षा मंत्री का कहना है कि एडमिशन में सबके लिए बराबर का कोटा है, सिवाय सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुडे संस्थानों और जनसुरक्षा विषय की पढाई पढाने वाले कॉलेजों के।


जबकि कार्यकर्ताओं के अनुसार अनाधिकारिक तौर पर कई स्कूलों, कॉलेजों में कोटा सिस्टम चल रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के खिलाफ छिपा हुआ पूर्वाग्रह अब एक बडी चुनौती बनता जा रहा है।

महिला कार्यकर्ता जिओ मेई कहती हैं, "लैंगिक भेदभाव चीन के चप्पे चप्पे में मौजूद है। परंपरावादी लोग मानते आए हैं कि पुरुष महिलाओं से बेहतर होते हैं। मगर जबसे महिलाओं ने आगे बढना शुरू किया है, वे अब उनके लिए समस्या नजर आती है।"

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