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10 सालों से डर के साये में जी रहे हैं, उत्तर और दक्षिण कोरिया के लोग

Thu, 30 Nov 2017 10:35 AM IST
देवप्रकाश चौधरी, दक्षिण कोरिया
देवप्रकाश चौधरी, दक्षिण कोरिया Updated Thu, 30 Nov 2017 10:35 AM IST
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war is possible in south korea and north korea
के-9 तोप
दुनिया के न चाहने के बावजूद, उत्तर कोरिया ने जब फिर मिसाइल परीक्षण किया, तो दक्षिणी कोरिया की सैनिक गतिविधियां तेज हो गईं। सियोल से लगभग 45 किलोमीटर दूर इमजीन नदी के इलाकों में लोगों ने बुधवार सुबह टैंकों की आवाजाही देखी तो उन्हें आशंका हुई। क्या युद्ध होगा और आखिर उत्तरी कोरिया चाहता क्या है, ये दो सवाल ऐसे हैं जो एक दशक से सियोल में सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं।
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यही सवाल मैंने सेना के योंपियोंग स्टेशन में कर्नल यंग पिंग से की तो वह मुस्कुराते हुए बोले, ‘युद्ध हम नहीं चाहते, लेकिन 2010 को भी नहीं भूल पाते।’ नवंबर 2010 में उत्तरी कोरिया ने योंपियोंग इलाके पर हमला किया था। यह इलाका सीमा से सटा हुआ है और दोनों ओर बड़े-बड़े सैन्य ठिकाने हैं।
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29 नवंबर की सुबह मिसाइल परीक्षण की खबर आई, तो यहां हरकतें तेज हो गईं। कर्नल यंग पिंग तो युद्ध की बात टाल गए, लेकिन उन्होंने हमें वे सारे टैंक दिखाए, जो जरूरत पड़ने पर तबाही बरपा सकते हैं। उस बेड़े में ‘के-9’ जैसे टैंक भी थे, जिसे खरीदने के लिए हाल ही में भारत ने अपनी इच्छा जताई है। यह कम आबादी वाला जंगली और पहाड़ी इलाका है, लेकिन तोप के गोले छूटने पर मीलों दूर रह रहे लोग कांप जाते हैं। 
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पढ़ें:  मिसाइल परीक्षण के बाद कोरिया पर नए प्रतिबंधों की तैयारी, ट्रंप ने चीन से कहा- इसे समझाओ

पाजू के डीएमजे थर्ड टनल को देखने आए गुरी के किहियोन कहते हैं, ‘परमाणु संपन्न उत्तरी कोरिया कुछ भी कर सकता है।’ लेकिन लोगों की इस आशंका का जवाब देश के डेपुटी मिनिस्टर (रक्षा नीति) यो सक जू बड़े आत्मविश्वास के साथ देते हैं। उन्होंने कहा, ‘परमाणु बम बनाने में हमारा भरोसा नहीं रहा है, लेकिन हम भी जवाब देने की हैसियत रखते हैं।

उत्तरी कोरिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका के साथ हमारा संबंध अटूट है।’ जाहिर है, उत्तर कोरिया द्वारा मिसाइल परीक्षण की खबर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस परिस्थिति को हम संभाल लेंगे।

भारत-दक्षिणी कोरिया सैन्य सहयोग पर खुशी

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दक्षिणी कोरिया - फोटो : SELF
भारत से अपने रिश्ते को याद करते हुए जू यह बताते हुए बड़े खुश दिखे कि जल्द ही भारत और दक्षिणी कोरिया के बीच सैन्य गतिविधियों में एक दूसरे को सहयोग देने पर वार्ता होगी। देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक रिश्ते तो होते हीं, आत्मीय रिश्ता भी होता है, लेकिन दक्षिण कोरिया को लेकर उत्तरी कोरिया की जो हरकतें हैं, उसमें यह बताना सचमुच कठिन है कि यह रिश्ता कहलाता क्या है?

टैगोर को याद किया
क्या दक्षिणी कोरिया भी सुरक्षा के मामले में भारत जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। भारत का पड़ोसी पाकिस्तान है, और यहां उत्तरी कोरिया। इसके जवाब में यो सक जू ने कहा, ‘परिस्थितियां अलग-अलग हैं। भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं, इसलिए वहां समस्या कुछ और है, यहां कुछ अलग है।’

जू को भरोसा है कि दक्षिण कोरिया में होने वाला 2018 का विंटर ओलंपिक शानदार ढंग से संपन्न होगा। अपने देश के आत्मबल को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने रवींद्रनाथ ठाकुर के उस कथन को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दक्षिणी कोरिया पूर्वी एशिया का दीप है।
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