जानिए कहां गुब्बारों के जरिए देश में हो रही थी बगावत की तैयारी?
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उत्तर कोरिया दुनिया में सबसे अलग-थलग पड़े देशों में से एक है जहां बाहरी दख़ल बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में क्या वहाँ सत्ता परिवर्तन संभव है, वो भी हीलियम से भरे गुब्बारों के ज़रिए?
कम से कम पार्क सैंग हैक तो मानते हैं कि ऐसा हो सकता है। इसीलिए पिछले कई सालों से उत्तर कोरिया के लोगों को बाक़ी दुनिया से जोड़ने में लगे हैं। लेकिन ये कैसे संभव है? उत्तर कोरिया में जन्मे, दक्षिण कोरियाई लोकतांत्रिक मूल्यों का दम भरने वाले पार्क शैंग हैक का इन कोशिशों में सैकड़ों कार्यकर्ता भी साथ दे रहे हैं।
बाहरी दुनिया की बातें पहुँचेंगी
उनके नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता हीलियम गैस से भरे गुब्बारों को दक्षिणा कोरिया की उत्तर कोरिया से लगी सीमा पर छोड़ते हैं।
इनके ज़रिए ये ग्रुप प्रोपागैंडा सामग्री, डीवीडी और यूएसबी स्टिक्स को उत्तर कोरिया के सीमावर्ती इलाकों में पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।
उन्हें उम्मीद है कि कुछ ना कुछ बैलून सीमा के उस पार के लोगों तक पहुंचेंगे और पैमफ़्लेट, पोस्टर, डीवीडी और यूएसबी स्टिक से उन तक बाहरी दुनिया की बातें पहुँचेंगी। हालांकि दक्षिण कोरिया की सरकार इन गतिविधियों को रोकनी की कोशिश भी करती है ताकि दोनों देशों के बीच तनाव हद से ज़्यादा न बढ़ जाए।
'एनिमी ज़ीरो' का निकनेम
पार्क इन कोशिशों के चलते उत्तर कोरिया में 'एनेमी ज़ीरो' के नाम से जाने जाते हैं। इन पर दो बार कातिलाना हमले हो चुके हैं और पार्क हमेशा अपने सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते हैं। उन्होंने बीबीसी फ़्यूचर से कहा, "उत्तर कोरिया के लोग तकनीक और विज्ञान के इस्तेमाल से दुनिया के संपर्क में आ रहे हैं।
सूचना तकनीक की मदद से ही जब वे अपने नेता किम जोंग उन के बारे में जानेंगे तो उन्हें समर्थन देना बंद कर देंगे।" वैसे उत्तर कोरिया से हर साल हज़ारों लोग बाहर निकल रहे हैं। इंटरनेट के ज़रिए वहां के लोग बाहर की कुछ फिल्में देख पाते हैं और दुनिया के सीमित संपर्क में आ रहे हैं।
तकनीक का इस्तेमाल
हाल ही उड़ाए गए बैलूनों में विवादास्पद फिल्म 'द इंटरव्यू' के डीवीडी मौजूद थे। पॉलिटिकल व्यंग्य वाली इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से इंटरव्यू के बहाने दो पत्रकार उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता की हत्या की साज़िश रचते हैं। इस फ़िल्म का उत्तर कोरिया ने न केवल विरोध किया था बल्कि पश्चिमी देशों को इस बारे में चेतावनी भी दी थी। एक ओर जहां लोकतांत्रिक कार्यकर्ता उत्तर कोरिया में तकनीक की मदद से किम जोंग उन के असर को कम करने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर किम जोंग उन भी इसी तकनीक के इस्तेमाल से दुनिया भर के लिए ख़तरा बनकर उभरे हैं।
साइबर-युद्ध की क्षमता
उत्तर कोरिया के प्योंगयांग में 23 साल तक वैज्ञानिक रहने के बाद किम योंग क्वेन दक्षिण कोरिया में रहने आए हैं। वो कहते हैं, "उत्तर कोरिया इसलिए दुनिया भर के देशों को धमकाता रहता है क्योंकि उसके पास साइबर युद्ध करने की क्षमता है। यह किसी सैन्य युद्ध जितना ही ख़तरनाक है। हज़ारों लोग मारे जा सकते हैं। शहरों को तबाह किया जा सकता है।"
पार्क की तरह उत्तर कोरिया में बैलून भेजने वाले दूसरे कार्यकर्ता ली बताते हैं कि उन्हें बैलून छोड़ने पर स्थानीय पुलिस लगातार चेतावनी देती रही है। लेकिन ये लोग जोखिम उठाकर रात के अंधेरे में ये काम करते रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके देश (उत्तर कोरिया) के लोगों के हालात एक दिन बदलेंगे।