चीनी जिहादियों की सीरिया में वृद्धि से बढ़ रही है चीन की चिंता
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सीरिया में हजारों चीनी जेहादी आए थे। मार्च 2011 में देश की गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से सरकारी बलों और उनके सहयोगियों के खिलाफ लड़ने के लिए सीरिया गए थे।
कुछ लोग पूर्वी देश में अल-कायदा की शाखा में शामिल हो गए जो पहले नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। अन्य इस्लामी स्टेट और कुछ अल्ट्रा कंजर्टिव अहर अल-शाम जैसे संगठनों में शामिल हो गए। लेकिन उनमें से ज्यादा चीनी जिहादी तुर्कीस्तान इस्लामिक पार्टी के साथ हैं जिसमें ज्यादातर संख्या चीन के मुसलमानों की है।
सीरिया में अधिकांश जिहादी समूहों का उद्देश्य सत्ता से असद की धर्मनिरपेक्ष सरकार को हटाना और सख्त इस्लामी शासन के साथ इसे बदलने की है। इस युद्ध में लगभग 400,000 लोग मारे गए थे। एक समय ऐसा था जब चीन की सरकार असद के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थकों में से एक थी। रूस के साथ-साथ चीन ने अपने अरब सहयोगियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को रोकने के लिए कई अवसरों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल किया है।
सीरिया में करीब 5,000 चीनी सैनिक
ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख रामी अब्दुर्रहमान ने कहा कि सीरिया में करीब 5,000 चीनी सैनिक हैं जिनमें से ज्यादातर उत्तरी सीरिया में तुर्किस्तान जिहादीयों के साथ हैं। इस चीनी जिहादियों के साथ उनका परिवार भी है जिसकी संख्या 20,000 हैं। आतंकवाद विशेषज्ञ ली ने अब्दुर्रहमान के दावों को गलत बताया और कहा कि केवल 300 चीनी जिहादी सीरिया में है, जो अपने 700 परिवारों के साथ रह रहे हैं।
साल 2015 में समूह के सदस्यों ने इडलीब के उत्तर-पश्चिमी प्रांत पर हमला किया था और लातकिया क्षेत्र में असद के गढ़ पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कथित तौर पर शहर में एक चर्च को क्षति पहुंचाई थी। ली ने कहा कि "जैसा कि तुर्की और सीरिया के बीच सीमाओं के साथ सीमाओं को नियंत्रित किया जा रहा है। सीरिया में तस्करी करने के लिए उन्हें और अधिक मुश्किल हो रहा है।"
वहीं, सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सरकारी मीडिया से कहा है कि कई टिप सेनानियों ने सरकारी बलों और उनके सहयोगियों के खिलाफ आत्मघाती हमले किए हैं और पिछले दो सालों से ज्यादातर देश के उत्तरी इलाकों में लड़ाइयों का नेतृत्व किया है।