फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   the Countries with the Shortest Life Expectancy

गरीबी के कारण जवानी में ही मर रहे हैं इन देशों के लोग

Fri, 26 Feb 2016 11:01 AM IST
अलखराम सिंह/अमर उजाला, दिल्ली
अलखराम सिंह/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 26 Feb 2016 11:01 AM IST
विज्ञापन
the Countries with the Shortest Life Expectancy

अगर सीधे तौर पर कहा कि जाए कि गरीबी इंसान को जवानी में ही मौत के मुह में धकेल देती है तो इस बात को यकीन करना मुश्किल होगा। लेकिन अगर आपके सामने इस बात के सबूत रख दिए जाएं तो आप एक बार सोंचने को मजबूर हो जाएंगे।

विज्ञापन


दुनिया में कोई कितने साल तक जिंदा रहेगा इस इस बात का निर्धारण दो बातों से होता है। एक- पूर्वजों से मिले आनुवंशिक लक्षण और दूसरा- स्वास्थ्य।

किसी का स्वास्थ्य निश्चित होता है उसके खान पान की दिनचर्या पर। जो व्यक्ति आर्थिक रूप से जितना ज्यादा मजबूत होगा वह उतना ही साफ पानी पी सकता है और उतना ही पौष्टिक भोजन ले सकता है। यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि आज खाने पीने की चीजें काफी ज्यादा महंगी हैं और गरीब आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश देशों के लोग औतस उम्र भी नहीं पार कर पाते।

विज्ञापन

गरीब देशों में से एक भारत भी

the Countries with the Shortest Life Expectancy

उपलब्‍ध आंकड़ों के ‌अनुसार, अंतरराष्ट्रीय औसत आयु 70.7 साल है जिसमें पुरुषों की औसत आयु 68.2 साल और महिलाओं की औसत आयु 73.2 यानी पुरुषों की तुलना में महिलाओं की जीवन क्षमता ज्यादा है। जबकि अरब देशों में इसका उल्टा है। वहां महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा दिनों तक जीते हैं।

लेकिन अगर हम भारत के लोगों की औसत आयु की बात करें तो 2012 के आंकड़ों के अनुसार देश के लोगों की औसत आयु 66.21 साल है जो अंतरराष्ट्रीय मानक आयु से करीब चार साल कम है।

वहीं अमीर देशों जैसे अमेरिका के लोगों की औसत आयु करीब 79 साल है, इटली के लोगों की औसत आयु करीब 83 साल है और 81.5 साल है। लेकिन बहुत से देशों के लोग ऐसी गरीबी में जीने को मजबूर हैं।

इन देशों में है भारी गरीबी

the Countries with the Shortest Life Expectancy

जिन देशों के लोग 50 से 55 की औसत आयु यानी जवानी में ही मौत का शिकार हो जाते हैं उनमें से अधिकांशतः अफ्रीकी देश हैं।

जिम्बाबवे 54 साल, कैमरून 53 साल, बरुंडी 53 साल, मोजाम्बिक 53 साल, नाईजीरिया 53 साल, चाड 51 साल, अंगोला 51 साल, माली 51 साल, ज्यूनिया बिसाऊ 50 साल, सोमालिया 50 साल और स्वाजीलैंड के लोगों की औसत आयु 50 साल है।

यह आंकड़े सिर्फ औसत आयु ही नहीं बताते बल्कि सबसे कम औसत आयु वाले देशों के 25 प्रतिशत नवजवान एड्स जैसी घातक बीमारियों से पीड़ित हैं। गरीबी की मार झेल रहे लोग जब खाने पीने की जरूरत नहीं पूरा कर पाते अपनी दवाई कैसे करा पाएंगे? इतना ही नहीं इन देशों में बच्चे भी भूख और कुपोषण के कारण बड़ी संख्या में मौत के मुह में समा जाते हैं। इतना ही नहीं यहां की अध‌िकांश आबादी अभी सिर्फ पशु पालन और शिकार जैसे कामों के भरोसे जी रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed