फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Sri Lankan President Maithripala Sirisena his reshuffles Cabinet

श्रीलंका में राजनीतिक उथलपुथल के बीच राष्ट्रपति सिरिसेना ने किया मंत्रिमंडल में फेरबदल

Sun, 25 Feb 2018 08:26 PM IST
एजेंसी, कोलंबो
एजेंसी, कोलंबो Updated Sun, 25 Feb 2018 08:26 PM IST
विज्ञापन
Sri Lankan President Maithripala Sirisena his reshuffles Cabinet
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना - फोटो : फाइल फोटो

हालिया राजनीतिक उथलपुथल के बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने अपने मंत्रिमंडल में बदलाव किया है। श्रीलंकाई सरकार में हुए इस दूसरे मंत्रिमंडल फेरबदल में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कानून एवं व्यवस्था मंत्री बनाया गया।

विज्ञापन


श्री लंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) और यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की एकीकृत सरकार पर तब संकट के बादल मंडराने लगे जब पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे की नई पार्टी ने स्थानीय चुनावों में जोरदार जीत हासिल की। दरअसल विपक्ष की जीत को सत्ताधारी गठबंधन के कामों पर जनमत संग्रह माना जा रहा है। 
विज्ञापन


साल 2015 में पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के लगभग एक दशक के शासन को सिरिसेना ने खत्म कर दिया था। यूएनपी सदस्यों के बीच कई विभागों का फेरबदल किया गया है जिसमें से कुछ के मंत्रालय आपस में बदल दिए गए हैं। ट्वीट करते हुए सिरिसेना ने कहा कि हाल ही में स्थानीय सरकार के चुनाव में लोगों के संदेश को देखते हुए लोगों की सेवा करने के लिए सरकार को अपनी नीतियों, योजनाओं और गतिविधियों को सुधारने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजपक्षे की नई पार्टी श्री लंका पीपुल्स पार्टी (एसएलपीपी) ने एसएलएफपी और यूएनपी के गठबंधन को हराकर 340 में से काउंसिल की 225 सीटों पर कब्जा कर लिया। भारी जीत मिलने के बाद राजपक्षे ने अगस्त, 2020 में होने वाले चुनाव की जगह तुरंत आम चुनाव कराने की मांग कर दी। 

सिरिसेना के कमजोर होने से भारत चिंतित :
पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को चीन समर्थक माना जाता है। स्थानीय काउंसिल चुनाव में उनकी जीत से वहां चीनी दखल बढ़ने के आसार हैं। वहीं राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की गठबंधन सरकार को भारत समर्थक माना जाता है। इन चुनावों में राजपक्षे ने एसएलपीपी के साथ वापसी की है। 


राजपक्षे के कार्यकाल में चीन ने श्रीलंका में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। उनके शासनकाल में रणनीतिक रूप से अहम कई जगहों पर चीन के लोगों और सैनिकों की मौजूदगी ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। चुनाव नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि अब श्रीलंका में चीन की बड़ी भूमिका वापस लौटेगी जिससे भारत की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed