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श्रीलंका: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा राष्ट्रपति का संसद भंग करने का फैसला, मध्यावधि चुनावों पर भी रोक

Tue, 13 Nov 2018 08:14 PM IST
एजेंसी, कोलंबो
एजेंसी, कोलंबो Updated Tue, 13 Nov 2018 08:14 PM IST
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Sri Lanka supreme court overturns order of Maithripala Sirisena to sack parliament
मैत्रीपाल सिरिसेना
श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना को तगड़ा झटका देते हुए संसद भंग करने का फैसला पलट दिया। साथ ही कोर्ट ने 5 जनवरी को होने वाले मध्यावधि चुनावों की तैयारियों पर भी रोक लगा दी। बर्खास्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे देश की जनता की जीत बताया है।
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चीफ जस्टिस नलिन परेरा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में 18 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था और जजों ने कमांडों की घेरेबंदी में यह अहम निर्णय सुनाया। श्रीलंका की मुख्य राजनीतिक पार्टियों और चुनाव आयोग के सदस्य रत्नजीवन हुले ने संसद भंग करने के विवादित फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ 13 और इसके समर्थन में पांच याचिकाएं दायर की गई थीं। कोर्ट फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 4, 5 और 6 दिसंबर को सुनवाई करेगा।
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राष्ट्रपति सिरीसेना ने 26 अक्तूबर को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था। उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति चीनी समर्थक महिंदा राजपक्षे को नियुक्त किया था। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने में जरूरी बहुमत नहीं मिलने पर 9 नवंबर को उन्होंने संसद को भंग कर मध्यावधि चुनाव कराने का फैसला किया था।
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रानिल विक्रमसिंघे ने ट्वीट कर जताई खुशी 

‘जनता को पहली जीत मिली है। अभी और बढ़ना है और अपने प्यारे देश में लोगों को एक बार फिर से संप्रभुता की बहाली करनी है।’
- रानिल विक्रमसिंघे, बर्खास्त पीएम, श्रीलंका 

सिरीसेना ने किया था फैसले का बचाव 
श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने रविवार को संसद भंग करने के विवादित फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा था कि प्रतिद्वंद्वी सांसदों के बीच झड़पों से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कुछ खबरें आई थीं कि 14 नवंबर को होने वाले शक्ति परीक्षण में नेताओं के बीच झड़पें होंगी। 

संसद में बहुमत नहीं 
श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में सिरीसेना और राजपक्षे के पास 95 सीटें हैं और बहुमत साबित करने के लिए 113 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। वहीं, रानिल विक्रमसिंघे की पार्टी के पास 106 सीटें हैं और उन्हें महज सात सीटें कम पड़ रही हैं। 
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