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भारत को घेरने चला था चीन, अब खुद ही मुसीबत में घिरा
एजेंसी/ कोलंबो
Updated Sat, 07 Jan 2017 09:27 PM IST
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- फोटो : AP
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भारत को घेरने के मकसद से श्रीलंका के करीब आने की चीन की कोशिश अब नाकाम होती नजर आ रही है। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में चीनी निवेश के खिलाफ हिंसक संघर्ष शुरू हो गया है। इससे श्रीलंका में हालात बेहद बिगड़ गए हैं। शनिवार को हंबनटोटा बंदरगाह के समीप औद्योगिक जोन के उद्घाटन समारोह के दौरान हजारों की संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन और पत्थरबाजी की। इसके खिलाफ कोलंबो बंदरगाह, गाले और त्रिंकोमाली बंदरगाह में भी लोगों ने काले झंडे दिखाए गए और नारेबाजी की गई।
चीन के खिलाफ इस प्रदर्शन में विपक्षी मार्क्सवादी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के अलावा स्थानीय ग्रामीण और बौद्ध भिक्षु भारी संख्या में शामिल रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 10 लोगों के घायल हुए हैं। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि श्रीलंका सरकार उनकी जमीन को छीनकर चीन को नहीं दे सकती है। सरकार ने बंदरगाह को चीन के हाथों बेचने का करार किया है, जिसके पास चीन अपनी कॉलोनी बसाएगा।
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चीन के खिलाफ इस प्रदर्शन में विपक्षी मार्क्सवादी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के अलावा स्थानीय ग्रामीण और बौद्ध भिक्षु भारी संख्या में शामिल रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 10 लोगों के घायल हुए हैं। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी।
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि श्रीलंका सरकार उनकी जमीन को छीनकर चीन को नहीं दे सकती है। सरकार ने बंदरगाह को चीन के हाथों बेचने का करार किया है, जिसके पास चीन अपनी कॉलोनी बसाएगा।
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विरोध प्रदर्शन में विपक्ष, ग्रामीण और बौद्ध भिक्षु भारी संख्या में हुए शामिल
दरअसल, श्रीलंका सरकार ने चीन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत हंबनटोटा बंदरगाह का 80 फीसदी मालिकाना हक चीन को मिल जाएगा। साथ ही श्रीलंका सरकार बंदरगाह के समीप चीनी औद्योगिक जोन बनाने के लिए 15 हजार एकड़ जमीन चीन को लीज पर उपलब्ध करा रही है, जिसका शनिवार को उद्घाटन किया गया।
इस समझौते के खिलाफ जेवीपी, उससे जुड़े ट्रेड यूनियन सीलोन पोर्ट्स जनरल एंप्लॉइज यूनियन, ग्रामीण और बौद्ध भिक्षु सड़क पर उतर आए हैं। वहीं, श्रीलंका में चीनी राजदूत यी शिआनलिआंग ने कहा कि चीन अगले तीन से पांच साल में हंबनटोटा औद्योगिक जोन में पांच अरब डॉलर का निवेश कर सकता है। इससे श्रीलंका में एक लाख नौकरियां पैदा होंगी। इससे पहले शुक्रवार को जेवीपी ने अंबालांटोटा में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस पर श्रीलंका की एक अदालत ने निरोधक आदेश जारी कर दिया था, जिसमें कहा गया कि ऐसे विरोध प्रदर्शन से देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
इस समझौते के खिलाफ जेवीपी, उससे जुड़े ट्रेड यूनियन सीलोन पोर्ट्स जनरल एंप्लॉइज यूनियन, ग्रामीण और बौद्ध भिक्षु सड़क पर उतर आए हैं। वहीं, श्रीलंका में चीनी राजदूत यी शिआनलिआंग ने कहा कि चीन अगले तीन से पांच साल में हंबनटोटा औद्योगिक जोन में पांच अरब डॉलर का निवेश कर सकता है। इससे श्रीलंका में एक लाख नौकरियां पैदा होंगी। इससे पहले शुक्रवार को जेवीपी ने अंबालांटोटा में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस पर श्रीलंका की एक अदालत ने निरोधक आदेश जारी कर दिया था, जिसमें कहा गया कि ऐसे विरोध प्रदर्शन से देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
क्या है ड्रैगन की चाल?
भारत को चारो ओर से घेरने के लिए चीन श्रीलंका में अपना दखल बढ़ा रहा है। हंबनटोटा बंदरगाह के निर्माण को लेकर चीन की दलील है कि वह सामुद्रिक सिल्क रूट का जाल बिछाने के लिए बंदरगाहों को जोड़ने का काम कर रहा है। हालांकि भारत श्रीलंका में चीन के दखल को अपने खिलाफ मनाता है।
भारत के खिलाफ आतंकवाद का पनाहगाह बना पाकिस्तान पहले ही चीन का करीबी है। चीन पाक को न सिर्फ आर्थिक बल्कि सैन्य सहायता भी मुहैया कराता है। ड्रैगन बांग्लादेश को भी जंगी जहाज निर्यात करता है और अफगानिस्तान में शांतिवार्ता में दखल बढ़ा रहा है।
भारत के खिलाफ आतंकवाद का पनाहगाह बना पाकिस्तान पहले ही चीन का करीबी है। चीन पाक को न सिर्फ आर्थिक बल्कि सैन्य सहायता भी मुहैया कराता है। ड्रैगन बांग्लादेश को भी जंगी जहाज निर्यात करता है और अफगानिस्तान में शांतिवार्ता में दखल बढ़ा रहा है।