इटली के पोप सिखाएंगे जादू-टोना, लोगों को शैतानी ताकतों से बचाने का नया उपाय
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इटली के धार्मिक शहर वेटिकन सिटी में पादरियों को दी जाने वाली शिक्षा के पाठ्यक्रम में जादू-टोने को भी जोड़ दिया गया है। इसका मकसद दुनिया में पोर्नोग्राफी के बढ़ते इस्तेमाल के चलते इंसान में शैतानी ताकतों को बढ़ते असर को लेकर बातचीत के नए रास्ते खोलना है। वेटिकन सिटी ने दुनिया भर में कैथोलिक समाज की बढ़ती मांग को देखते हुए यह पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है।
कैथोलिक न्यूज एजेंसी के मुताबिक फादर पेड्रो बारजॉन ने कहा कि मानव कामुकता अपने आप में बहुमूल्य है लेकिन जब इसे खराब ढंग से इस्तेमाल किया जाता है तो अपने और दूसरों के लिए नुकसान पैदा होता है। इसका सीधा प्रभाव बच्चों पर भी पड़ता है।
वर्तमान में अश्लील साहित्य के इस्तेमाल का संदर्भ लेते हुए उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम के आयोजक इस बुराई की आधुनिक सांस्कृतिक घटना पर फोकस करना चाहते हैं। इससे पोर्नोग्राफी के राक्षसी प्रभाव को समझने में आसानी होगी। इसमें नशे की लत और पंथवाद को भी शैतानी ताकत का हिस्सा माना गया है।
इस नए पाठ्यक्रम में शैतानी ताकतों को पहचानना और पादरियों के अनुभव को सुनना व प्रेतात्माओं से निजात पाने के अनुष्ठानों का प्रशिक्षण भी शामिल हैं। दुनिया के करीब 50 देशों के 250 पादरी जादू-टोना सीखने के लिए रोम का रुख कर रहे हैं। यहां एक सप्ताह तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम का नाम है एंटाइटल्ड एक्जोर्टिज्म एंड द प्रेयर ऑफ लिबरेशन। इसमें जादू-टोने के धार्मिक, मनोवैज्ञानिक और मानव शास्त्रीय पहलुओं पर जोर दिया जाएगा। बारजॉन ने 13वें वार्षिक पाठ्यक्रम के पहले दिन मोक्ष की प्रार्थना पर पत्रकारों से बातचीत भी की।
भूत-प्रेत के वश में इंसान के होने की शिकायतें बढ़ीं
इस पाठ्यक्रम की मांग करने वाले कैथोलिक पादरियों का मानना है कि उनके पास ऐसी शिकायतें बढ़ी हैं जिनमें लोगों के भूत-प्रेत के वश में होने की बातें सामने आई हैं। अनुमान के मुताबिक इटली में हर साल करीब पांच लाख लोग जादू-टोने की मदद लेते हैं।पिछले एक दशक से जादू-टोनों द्वारा लोगों की मदद का दावा करने वाले अमेरिकी पादरी गैरी थॉमस ने कहा कि ईसाई धर्म में पतन का एक बड़ा कारण अंधविश्वास और कुरीतियां हैं जो लगातार बढ़ रही हैं।
ईसा मसीह का नाम लेकर भूतों से शरीर छोड़ने को कहते हैं
भूत पिशाचों से मुक्ति दिलाने के लिए पादरी ईसा मसीह का नाम लेकर उन्हें शरीर छोड़ने को कहते हैं। इसके लिए पादरी को सफेद चोगा और परपल रंग के स्टाल का एक खास लिबास पहनना पड़ता है। भूत के साये वाले व्यक्ति पर पवित्र जल का प्रयोग किया जाता है। पीड़ित पर कई बार पादरी क्रॉस का निशान बनाते हैं और बाइबिल के उन अंशों का पाठ करते हैं जिनमें ईसा मसीह ने लोगों के भीतर से शैतान को निकालने की कोशिश की थी।