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पोप का पीछा नहीं छोड़ रहा 'डर्टी वॉर'
बीबीसी हिंदी
Updated Sun, 17 Mar 2013 02:50 PM IST
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अर्जेंटीना की ‘डर्टी वॉर’ का भूत पोप फ़्रांसिस का पीछा नहीं छोड़ रहा है। ऐसे लोगों की अर्जेंटीना में कमी नहीं है जो उन्हें कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे।
‘डर्टी वॉर’ के दौरान मानवाधिकार हनन रोकने में चर्च और पोप की भूमिका पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
लेकिन वेटिकन ने चर्च और पोप के ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
ग्रेसीला योरियो पादरी औरलैंडो योरियो की बहन हैं, जिनका अर्जेंटीना की अंतिम सैनिक सरकार ने मई 1976 को अपहरण कर पांच महीने तक यातना दी थी।
ग्रेसीला के अनुसार, 'सैन्य शासन का गुस्सा भड़काकर फ़ादर बैरगोगलियो ने उनके भाई और साथी पादरी प्रांसिस्को जैलिक्स को सरकार को सौंप दिया।'
डर्टी वॉर और फ़ादर बैरगोगलियो
अर्जेंटीना में सैन्य सरकार ने विरोधियों का क्रूरतापूर्वक दमन किया गया। उस समय को 'डर्टी वॉर' के नाम से जाना जाता है।
ग्रेसीला कहती हैं कि फ़ादर खोर्खे मारियो बैरगोगलियो ने ब्यूनस आर्यस की झुग्गी बस्ती में दोनों पादरियों द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। इससे सैन्य शासन को पादरियों पर शक करने का आधार मिल गया।
शपथ ग्रहण से पहले पोप फ्रांसिस को फ़ादर खोर्खे मारियो बैरगोगलियो के नाम से जाना जाता था।
ओरलैंडो योरियो की मृत्यु हो चुकी है लेकिन फ़ादर जैलिक्स ने कहा, 'वो घटनाओं के साथ सामंजस्य बना चुके हैं और अब उनकी तरफ़ से ये मामला ख़त्म माना जाए।'
वेटिकन लगातार पोप फ़्रांसिस के किसी ग़लत काम में शामिल होने से इनकार करता रहा है।
वेटिकन के प्रवक्ता फेडेरिको लोम्बार्डी ने रोम में पत्रकारों को कहा, 'उनके ख़िलाफ़ कभी तथ्यों पर आधारित, ठोस आरोप नहीं लगाए गए।'
चुराए गए बच्चे
एस्टेला दि ला कुएड्रा के लिए कार्डिनल बैरगोगलियो का पोप के रूप में चुनाव 'भद्दा और बर्बरतापूर्ण है'
उनकी बहन एलेना को 1978 में सेना ने तब उठा लिया था जब वो पांच महीने की गर्भवती थी। उनके पिता ने फ़ादर बैरगोगलियो से इस मामले में मदद की गुहार लगाई थी।
कुएड्रा कहती है, 'उन्होंने मेरे पिता को एक बिशप के नाम एक हस्तलिखित पत्र दिया और कहा कि वो हमारे खोए रिश्तेदार के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा देंगे।'
वो कहती हैं, 'जब मेरे पिता बिशप से मिले तो उन्हें बताया गया कि उनकी पोती एक अच्छे परिवार में है।'
तत्कालीन सैन्य शासन में ऐसे विरोधियों के बच्चों, जिनकी मां मर चुकी होती थी, को उपयुक्त सैन्य परिवारों को सौंप दिया जाता था।
सत्ता से सांठगांठ
वर्ष 2010 में तत्कालीन कार्डिनल बैरगोगलियो को ‘चुराए गए बच्चों’ पर गवाही देने के लिए बुलाया गया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की घटनाओं की जानकारी 1983 में हुई जब अर्जेंटीना में लोकतंत्र की वापसी हो चुकी थी।
कुएड्रा मानती हैं कि कार्डिनल का हस्तलिखित पत्र इस बयान के ख़िलाफ़ जाता है। उन्होंने इस मामले में मई 2011 में शपथ लेकर गवाही भी दी थी।
अर्जेंटीना के सैन्य शासन के दौरान ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारियों, प्रताड़ना, बच्चों की चोरी, और हत्या के मामलों में 600 लोगों को दोषी पाया गया।
पोप फ्रांसिस ने दो अलग मामलों में दो बार गवाही दी लेकिन कभी आधिकारिक रूप से उनकी जांच नहीं हुई।
ऐसे कोई सबूत भी नहीं मिले कि उनकी सत्ता से कोई सांठ-गांठ थी।
लेकिन 'डर्टी वॉर' के दौरान रोमन कैथोलिक चर्च की भूमिका को लेकर सवाल आज भी उठाए जाते हैं।
फ़रवरी में पहली बार अर्जेटीना के न्यायालय ने अपने एक फ़ैसले में कहा कि चर्च ज़्यादतियों में सहयोगी रहा है और अब भी उन लोगों के ख़िलाफ़ जांच से इनकार कर रहा है जो इसके ज़िम्मेदार माने जाते हैं।
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‘डर्टी वॉर’ के दौरान मानवाधिकार हनन रोकने में चर्च और पोप की भूमिका पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
लेकिन वेटिकन ने चर्च और पोप के ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
ग्रेसीला योरियो पादरी औरलैंडो योरियो की बहन हैं, जिनका अर्जेंटीना की अंतिम सैनिक सरकार ने मई 1976 को अपहरण कर पांच महीने तक यातना दी थी।
ग्रेसीला के अनुसार, 'सैन्य शासन का गुस्सा भड़काकर फ़ादर बैरगोगलियो ने उनके भाई और साथी पादरी प्रांसिस्को जैलिक्स को सरकार को सौंप दिया।'
डर्टी वॉर और फ़ादर बैरगोगलियो
अर्जेंटीना में सैन्य सरकार ने विरोधियों का क्रूरतापूर्वक दमन किया गया। उस समय को 'डर्टी वॉर' के नाम से जाना जाता है।
ग्रेसीला कहती हैं कि फ़ादर खोर्खे मारियो बैरगोगलियो ने ब्यूनस आर्यस की झुग्गी बस्ती में दोनों पादरियों द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। इससे सैन्य शासन को पादरियों पर शक करने का आधार मिल गया।
शपथ ग्रहण से पहले पोप फ्रांसिस को फ़ादर खोर्खे मारियो बैरगोगलियो के नाम से जाना जाता था।
ओरलैंडो योरियो की मृत्यु हो चुकी है लेकिन फ़ादर जैलिक्स ने कहा, 'वो घटनाओं के साथ सामंजस्य बना चुके हैं और अब उनकी तरफ़ से ये मामला ख़त्म माना जाए।'
वेटिकन लगातार पोप फ़्रांसिस के किसी ग़लत काम में शामिल होने से इनकार करता रहा है।
वेटिकन के प्रवक्ता फेडेरिको लोम्बार्डी ने रोम में पत्रकारों को कहा, 'उनके ख़िलाफ़ कभी तथ्यों पर आधारित, ठोस आरोप नहीं लगाए गए।'
चुराए गए बच्चे
एस्टेला दि ला कुएड्रा के लिए कार्डिनल बैरगोगलियो का पोप के रूप में चुनाव 'भद्दा और बर्बरतापूर्ण है'
उनकी बहन एलेना को 1978 में सेना ने तब उठा लिया था जब वो पांच महीने की गर्भवती थी। उनके पिता ने फ़ादर बैरगोगलियो से इस मामले में मदद की गुहार लगाई थी।
कुएड्रा कहती है, 'उन्होंने मेरे पिता को एक बिशप के नाम एक हस्तलिखित पत्र दिया और कहा कि वो हमारे खोए रिश्तेदार के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा देंगे।'
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वो कहती हैं, 'जब मेरे पिता बिशप से मिले तो उन्हें बताया गया कि उनकी पोती एक अच्छे परिवार में है।'
तत्कालीन सैन्य शासन में ऐसे विरोधियों के बच्चों, जिनकी मां मर चुकी होती थी, को उपयुक्त सैन्य परिवारों को सौंप दिया जाता था।
सत्ता से सांठगांठ
वर्ष 2010 में तत्कालीन कार्डिनल बैरगोगलियो को ‘चुराए गए बच्चों’ पर गवाही देने के लिए बुलाया गया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की घटनाओं की जानकारी 1983 में हुई जब अर्जेंटीना में लोकतंत्र की वापसी हो चुकी थी।
कुएड्रा मानती हैं कि कार्डिनल का हस्तलिखित पत्र इस बयान के ख़िलाफ़ जाता है। उन्होंने इस मामले में मई 2011 में शपथ लेकर गवाही भी दी थी।
अर्जेंटीना के सैन्य शासन के दौरान ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारियों, प्रताड़ना, बच्चों की चोरी, और हत्या के मामलों में 600 लोगों को दोषी पाया गया।
पोप फ्रांसिस ने दो अलग मामलों में दो बार गवाही दी लेकिन कभी आधिकारिक रूप से उनकी जांच नहीं हुई।
ऐसे कोई सबूत भी नहीं मिले कि उनकी सत्ता से कोई सांठ-गांठ थी।
लेकिन 'डर्टी वॉर' के दौरान रोमन कैथोलिक चर्च की भूमिका को लेकर सवाल आज भी उठाए जाते हैं।
फ़रवरी में पहली बार अर्जेटीना के न्यायालय ने अपने एक फ़ैसले में कहा कि चर्च ज़्यादतियों में सहयोगी रहा है और अब भी उन लोगों के ख़िलाफ़ जांच से इनकार कर रहा है जो इसके ज़िम्मेदार माने जाते हैं।
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