इस्राइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज का निधन
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फलस्तीन के साथ एक सदी तक चले विवाद को खत्म करने के प्रयास के लिए 1994 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले इस्राइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज का बुधवार को निधन हो गया। दो सप्ताह पहले उन्हें मस्तिष्काघात हुआ था। मंगलवार को उनके महत्वपूर्ण अंगों ने भी काम करना बंद कर दिया था। दुनिया के हर कोने से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है। 93 वर्षीय पेरेज दो बार इस्राइल के प्रधानमंत्री रहे। बाद में वह देश के नौवें राष्ट्रपति बने थे।
वे भारत के बहुत बड़े प्रशंसक थे और इस देश को ‘धरती का सबसे महान लोकतंत्र’ बताते थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया था। शिमोन पेरेज की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ओस्लो शांति समझौते को अंजाम तक पहुंचाना शामिल है। इसके लिए उन्हें तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन के साथ शांति का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया था।
इस्राइल और फलस्तीन के बीच यह पहला शांति समझौता था। इस्राइली प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू ने पेरेज को ‘स्वप्नदर्शी’ बताते हुए कहा कि वे ‘इस्राइल की प्रतिरक्षा के सूरमा थे।’ उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत दुनियाभर के नेता शामिल हो सकते हैं।
ओबामा समेत दुनिया के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
पेरेज को अपना दोस्त बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, ‘रोशनी भले ही गुम हो गई है लेकिन उन्होंने हमें जो उम्मीदें दी हैं वे हमेशा जिंदा रहेंगी।’ ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने पेरेज को ऐसा मार्गदर्शक बताया जिससे वे ‘बेहद प्रेम करते थे।’ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरेज के निधन पर शोक व्यक्त किया।
मुखर्जी ने अपने संदेश में कहा, ‘पेरेज दूरदर्शी व्यक्ति थे जो ज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी की शक्ति में यकीन रखते थे।’ पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘पेरेज के रूप में हमने विश्व का एक महत्वपूर्ण नेता और भारत का दोस्त खो दिया। उनके निधन से दुखी हूं। ’
इस्राइल के वरिष्ठ राजनीतिक नेता और पूर्व राष्ट्रपति
जन्म : 2 अगस्त, 1923 को पोलैंड के विसजिन्यू में। (मौजूदा समय में यह बेलारूस का हिस्सा है)
बाद में उनका परिवार 1934 में फलस्तीन जाकर बस गया।
राजनीतिक करियर
- 1948 में इस्राइल के बनने के समय से सक्रिय रहे शिमोन दो बार इस्राइल के प्रधानमंत्री और एक बार राष्ट्रपति बने।
- 1952 में पहली बार डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ डिफेंस बनाए गए।
- 1953 में डायरेक्टर जनरल बने और इस पद पर वह 1959 तक रहे।
- 1959 में पहली बार इस्राइली संसद के सदस्य चुने गए।
- 1984-1986 में पहली बार और 1995-96 के बीच दूसरी बार प्रधानमंत्री रहे।
- जुलाई 2007 से 2014 तक इस्राइल के राष्ट्रपति रहे।
- वर्ष 2014 में जब वह रिटायर हुए थे तब वह दुनिया के सबसे वृद्ध राष्ट्राध्यक्ष थे।
- शुरुआत में उन्हें कट्टर विचारों के लिए जाना जाता था लेकिन बाद में उनके नजरिये में बदलाव आ गया था।
- उन्होंने इस्राइल के लिए फ्रांस से परमाणु तकनीक हासिल करने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी।
- शिमोन को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान इस्राइल और फलस्तीनियों के बीच हुई ऑस्लो संधि में अहम भूमिका निभाने के लिए याद किया
जाता है।