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बाप सरकारी कमांडर, बेटा तालिबानी लड़ाका, दुश्मनी भुलाकर हुए एक
न्यूयॉर्क न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
Updated Thu, 18 Aug 2016 12:43 AM IST
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तालिबान (सांकेतिक चित्र)
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अफगानिस्तान में एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने बाप और बेटे का मिलाप बेहद चमत्कारी रहा। अफगान सरकार की ओर से तालिबान के खिलाफ जंग लड़ने वाले मिलीशिया कमांडर अब्दुल बासिर महज तीन महीने पहले ही अपने बेटे सैय्यद मोहम्मद पर गोली चलाई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया था।
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सैय्यद मोहम्मद तालिबान का खूंखार लड़ाका है। उस समय बेटे को गोली नहीं मार पाने का अब्दुल को बेहद पछतावा था, लेकिन रविवार को बाप-बेटे ने आपसी दुश्मनी भुला दी और एक-दूसरे के गले गल गए। किसी समय एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने बाप-बेटे के मिलाप को देखकर लोग दंग रह गए। बेटे की वापसी पर अब्दुल ने लोगों को खास दावत भी दी। अब्दुल ने कहा कि सब कुछ होने के बावजूद सैय्यद मोहम्मद उनका बेटा है।
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दरअसल, 1990 के दशक में स्थानीय मौलवी सैय्यद हाफिज ने सैय्यद मोहम्मद को बहकाकर ले गया था और तालिबान में भर्ती करा दिया था। मौलवी खुद भी तालिबान का कमांडर है। उस वक्त अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था। वहीं, अब्दुल बासिर 15 साल की उम्र से सरकारी मिलीशिया के सेनापति अब्दुल राशिद दोस्तम के साथ तालिबान के खिलाफ जंग में शामिल हैं। राशिद अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं।
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जितना सैय्यद मोहम्मद अपने पिता की जान लेने को बेचैन था, उससे ज्यादा अब्दुल अपने बेटे की जान लेने को। कई दफा लड़ाई के दौरान सामना हुआ, तो एक-दूसरे पर गोलियां चलाई। जब सैय्यद को बताया गया कि उसके पिता ने तीन सौ से लेकर चार सौ तालिबान लड़ाकों को मौत के घाट उतार दिया है, तो उसने अपने पिता की हत्या करने की कसम तक खा ली।
हालांकि रविवार को दोनों ने आपसी दुश्मनी भुलाकर उत्तरी फरयाब प्रांत में एक हो गए। इसी प्रांत में बाप-बेटे के खिलाफ जंग की शुरुआत हुई थी। इसके अलावा अब्दुल के कई बेटे और पांच भाई सरकारी मिलीशिया में शामिल होकर तालिबान को धूल चटा रहे हैं।