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मिस्र: अल-बारादेई बने अंतरिम प्रधानमंत्री
दुनिया
Updated Sun, 07 Jul 2013 01:49 AM IST
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मिस्र में प्रमुख उदारवादी नेता मोहम्मद अल-बारादेई नई अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री बना दिए गए हैं।
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मिस्र की सराकरी समाचार एजेंसी मिना के अनुसार बारादेई ने अंतरिम राष्ट्रपति अदली महमूद मंसूर से मुलाक़ात की जिसके बाद से उनका प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा था।
मिस्र में मुर्सी के विरोध में पिछले कई दिनों से हो रहे प्रदर्शनों और उनको पद से हटने की मांग के बीच तीन दिनों पहले सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को उनके पद से हटा दिया था।
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लेकिन सेना के इस क़दम के बाद मुर्सी के हज़ारों समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मोहम्मद अल-बारादेई संयुक्त राष्ट्र की संस्था आईएईए(अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के पूर्व प्रमुख हैं।
कार्यवाहक राष्ट्रपति मंसूर ने शनिवार को कई राजनेताओं की एक बैठक बुलाई थी जिसमें बारादेई भी शामिल हुए।
बारादेई उदारवादी और वामपंथी पार्टियों के समूह नेश्नल सैलवेशन फ़्रंट की अगुवाई करते हैं।
फ़्रंट के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि राष्ट्रपति मंसूर शनिवार देर शाम को ही बारादेई को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे।
गुरूवार को बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बारादेई ने सेना के क़दम को जायज़ ठहराते हुए कहा था कि मिस्र के मौजूदा हालात में काफ़ी कम विकल्प थे।
हिंसक प्रदर्शन जारी
बारादेई का कहना था, ''यह एक दुखदायी क़दम था जिसे कोई नहीं चाहता था। लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले कुछ महीने पहले मुर्सी ने ख़ुद को मिस्र के प्राचीन राजा फ़राओ की तरह आचरण करके अपनी ही वैधता को कम कर दिया। उससे पहली लड़ाई शुरू हो गई जो कि एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं थी।''
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मुर्सी के विरोधियों की संख्या भी कम नहीं।
शुक्रवार को अपदस्थ राष्ट्रपति मुर्सी के समर्थकों के ज़रिए किए गए विरोध प्रदर्शनों में देश भर में तीस से ज़्यादा लोग मारे गए और एक हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए।
मुर्सी के संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि उनके समर्थक उस वक़्त तक सड़कों पर रहेंगे जब तक कि मुर्सी को दोबारा उनके पद पर बहाल नहीं कर दिया जाता है।
शनिवार को भी मुर्सी के समर्थकों ने प्रदर्शन किए।
क़ाहिरा स्थित बीबीसी संवाददाता केविन कौनोली के अनुसार मिस्र इस समय मुर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच पूरी तरह विभाजित हो चुका है। मुर्सी विरोधियों ने रविवार को एक और प्रदर्शन करने को कहा है।
मुर्सी और उनकी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को सेना ने इस समय नज़रबंद कर रखा हैं।