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नेपाल त्रासदी के जख्मः बच्चियों और महिलाओं का हो रहा यौन उत्पीड़न

Sun, 26 Jul 2015 08:17 AM IST
Updated Sun, 26 Jul 2015 08:17 AM IST
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nepal after earthquake

नेपाल में भूकंप के तीन महीने बीतने के बाद भी बदहाली का साम्राज्य है। इस बदहाली का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और महिलाएं हो रही हैं, जिनके सिर पर न तो ठीक से छत है, न ही पढ़ने के लिए स्कूल और पीने का साफ पानी भी मयस्सर नहीं है। यह तस्वीर है आपदा की अभी तक मार झेल रहे नेपाल की।

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भूकंप के तीन महीने बीतने के बाद आए राहत एजेंसियों के एक नए सर्वे में यह खुलासा हुआ है। 25 अप्रैल और 12 मई को आए दो भीषण भूकंपों में तकरीबन नौ हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
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हाल ही में आए संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कुल 28 लाख की आबादी वाले नेपाल में तकरीबन दस फीसदी लोगों को फौरी राहत की जरूरत है।

नेपाल के बच्चों ने सहायता एजेंसियों को अपनी दर्द भरी दास्तां बताई है। बच्चों ने बताया कि आपदा ने उनका रहने का सुरक्षित ठिकाना छीन लिया है। इस वजह से उन्हें जंगली जानवरों के हमलों का शिकार होना पड़ रहा है।
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सबसे खराब हालात तो बच्चियों और लड़कियों की है। जिन्हें छेड़छाड़, दुष्कर्म जैसे यौन उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ रहा है। नेपाल के सिंधुपाल चौक से एक किशोरी ने बताया, खुले आसमान के नीचे रहने से हमारे साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।’ नेपाल के करीब 2,000 बच्चों ने चार सहायता एजेंसियों को दिए साक्षात्कार में अपनी आपबीती सुनाई है।

राहत एजेंसियों के एक नए सर्वे में हुआ यह खुलासा

nepal after earthquake

सेव द चिल्ड्रन, प्लान इंटरनेशनल, यूनीसेफ और वर्ल्ड विजन द्वारा कराए गए सर्वे में कहा गया है, ‘हजारों बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। यह समय के खिलाफ एक दौड़ है, जहां रहने का ठिकाना, पीने का पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।’
तलाकशुदा महिलाओं की जिंदगी और मुश्किल में
इसी तरह का एक अध्ययन नेपाल के धादिंग जिले में ऑक्सफैम ने कराया है, जिसमें पता चला कि महिलाओं और किशोरियों को छत के अभाव में लगातार यौन उत्पीड़न से रूबरू होना पड़ रहा है।

यह समस्या अकेली महिलाओं के लिए और भी विकट है। खास तौर से विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए, जिन्हें समुदाय की ओर से भी सुरक्षा कम ही मिल पाती है।

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