छह महीने में 400 से अधिक एसिड अटैक, कड़े कानून की मांग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीते गुरुवार को पूर्वी लंदन में पांच लोगों पर तेजाब फेंकने की घटनाओं के बाद एसिड से संबंधित कड़े कानून की मांग तेज हो गई है। इन मांगों में एसिड की बिक्री पर पाबंदी की मांग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक एसिड फेंके जाने की घटनाओं में साल 2012 की तुलना में दो गुना वृद्धि हुई है और ऐसी घटनाएं ज्यादातर लंदन में हुई हैं।
एसिड अटैक के लिए पहले से ही इंग्लैंड में उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। गृहमंत्री एम्बर रड ने संडे टाइम्स ने कहा, "वो चाहती हैं एसिड अटैक के दोषियों को इस कानून की ताकत का एहसास हो।" राजनेता और एसिड अटैक से पीड़ित लोग इन हमलों में शामिल लोगों को और कठोर दंड देने की मांग कर रहे हैं।
एसिड अटैक में शामिल लोगों के खिलाफ मामले में मौजूदा कानून की समीक्षा की जाएगी और इस बात पर विचार किया जाएगा कि एसिड अटैक के पीड़ितों को कैसे मदद प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा किसी के पास एसिड बरामद होने या फिर किसी की मदद से हमले करने के इरादे साबित होने की स्थिति में चार साल तक कैद की सजा हो सकती है। नेशनल पुलिस चीफ कौंसिल (एनपीसीसी) का कहना है कि छह महीने के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में 400 से अधिक एसिड अटैक किए गए हैं।
एम्बर रड ने एसिड अटैक से प्रभावित लोगों के बारे में कहा, "एसिड अटैक एक भयानक अपराध हैं। इसमें पीड़ितों पर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।" उन्होंने कहा, "यह बहुत जरूरी है कि इस तरह के हमलों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।" एम्बर रड ने कहा है कि एसिड अटैक से संबंधित कानून पहले से ही काफी सख्त है। कई मामलों में एसिड अटैक के दोषी उम्र कैद तक की सजा काट रहे हैं, लेकिन हम अपनी जवाबदेही को और बेहतर कर सकते हैं और इसे करेंगे।
इंग्लैंड में मौजूदा कानून के तहत अगर पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को रोकती है जिसके पास एसिड है तो पुलिस को यह साबित करना पड़ता है कि एसिड का उपयोग गलत उद्देश्यों के लिए किया जाना था। एसिड अटैक की एक पीड़ित केटी पाइपर कहती हैं, "इन हमलों के पीड़ितों को ताउम्र इसके दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है। ऐसे हमलों में शामिल लोगों को इतने कड़े दंड मिलने चाहिए कि उनके अंदर डर पैदा हो।"
स्कार्स, बर्न्स और हीलिंग मेडिकल जर्नल में छपे एक खत में उन्होंने लिखा है, "मुझे हमेशा ऑपरेशन और थेरेपी से गुजरना पड़ता है। एसिड अटैक के पीड़ितों की ऐसी स्थिति हो जाती है जैसे कि वो उम्रकैद झेल रहे हों।"