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जापान की बेटियों और गुड़ियों के लिए क्यों खास है आज का दिन

Thu, 03 Mar 2016 05:28 PM IST
Updated Thu, 03 Mar 2016 05:28 PM IST
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Why Japan is special Day (3 March) for Girls and Dolls

हर तीन मार्च को बेटियों वाले जापानी परिवार बेटियों के अच्छे स्वास्थ्य और खुशी के लिए हिना मस्तूरी नाम का एक त्योहार मनाते हैं, जिसे गुड़ियों और लड़कियों का त्योहार माना जाता है।

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इस दिन मांएं रंगीन किमोनो पहनाकर अपनी हिना गुड़ियों को दिखाने के लिए रखती हैं। पुरानी मान्यता है कि गुड़ियों में परिवार पर आने वाले किसी भी किस्म के दुर्भाग्य, बीमारी और बुरी आत्माओं को खुद पर झेलने की क्षमता होती है।
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इसलिए गुड़ियों को शरीर से रगड़कर नदी में फेंक दिया जाता है ताकि वो दुर्भाग्य को सोख लें। परिवार मानता है कि गुड़ियों को बहाने से उनका दुर्भाग्य भी दूर चला गया है।

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क्या है हिना मस्तूरी

Why Japan is special Day (3 March) for Girls and Dolls

इसी से एक अंधविश्वास भी जुड़ा है। जापान में लोग मानते हैं कि जैसे ही हिना मस्तूरी खत्म होता है, वैसे ही गुड़ियों को वापस कोठरी में बंद कर देना चाहिए। गुड़िया रखने में देरी से उनकी बेटियों की शादी होने में समस्या हो सकती है।

गुड़ियों के इस त्योहार का इतिहास करीब हजार साल पुराना है, जो इडो काल (1603-1868) से शुरू होता है, जब यह परंपरा शुरू हुई कि जापानी कैलेंडर के तीसरे महीने के तीसरे दिन गुड़िया दिखाने के लिए रखा जाएगा।

आज भी जापान के हर घर में हिना मस्तूरी मनाया जाता है। त्योहार से कुछ दिन पहले ही लड़कियां और उनकी मांएं हिना को बाहर निकाल लेती हैं और उन्हें एक लाल कपड़े पर सजा लेती हैं।

ये है परंपरा

Why Japan is special Day (3 March) for Girls and Dolls

इस ढांचे में करीब सात सीढ़ियां होती हैं। पहली सीढ़ी राजा-रानी को समर्पित होती है, जिसके बाद उनकी सेवा करने वाली तीन महिलाएं अगली सीढ़ी पर, फिर पांच या दस संगीतकार, हथियारों के साथ दो 'रक्षक' और तीन नौकर। इसके अलावा खिलौना पेड़ हो सकते हैं जिन्हें अर्थ-मूल्यवान पत्थरों से बनाया जाता है और बहुत से खिलौने दहेज को दिखाते हैं।

हालांकि जापान अपनी परंपराएं कायम रखे है, लेकिन एक ओर कोशिश लैंगिक भेदभाव बदलने की भी हो रही है और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अब देश की श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फ‌िलहाल जापान की श्रमशक्ति में महिलाओं का हिस्सा बहुत कम है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं शादी और बच्चों के बाद काम नहीं करतीं।

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