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दुनिया का अकेला कब्रगाह जो तैरता है पानी में

Thu, 02 Jun 2016 08:16 PM IST
केली ग्रोवीयर/ बीबीसी
केली ग्रोवीयर/ बीबीसी Updated Thu, 02 Jun 2016 08:16 PM IST
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 It floats in the sea cemetery
cemetery - फोटो : BBC

किसी अपने का गुजर जाना बेहद तकलीफदेह वाकया होता है। किसी परिजन की मौत के बाद हम उसका अंतिम संस्कार करते है। उसकी याद में पत्थर लगाते है।

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मगर कई बार क़ुदरत हमें इसका मौका नही देती। बहुत से लोगों की समुद्र में डूबकर मौत हो जाती है। ऐेसे लोगों के लिए कोई कब्र नहीं बनती। उन्हें दफनाया नहीं जाता। उन्हें याद करने का कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता।
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मगर, अभी हाल ही में तुर्की में समुद्र तट के करीब लहरों के बीच कब्रिस्तान बनाया गया है। ये कब्रिस्तान उन चार हजार सीरियाई नागरिकों की याद में बनाया गया है। जो सीरिया से यूरोप जाते वक्त समुद्र में डूब गए।
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बिल्कुल संगमरमर जैसे दिखने वाले स्टाइरोफोम के ये पत्थर, एक कतार में लगाए गए है। इन्हें ऐसे बांधकर रखा गया है जिससे कतार न बिगड़े। ये यूं ही हमेशा तैरते रहेंगे। और समुद्र में डूब गए उन चार हजार
लोगों की याद दिलाते रहेंगे।

लहरों पर तैरता ये कब्रिस्तान, कभी न खत्म होनेवाले दर्द की याद दिलाता रहेगा। वैसे तो इन पत्थरों को ऐसे भी बनाया जा सकता था कि ये डूब जाते। मगर इन्हें जान-बूझकर तैरता रखा गया है। ताकि इस तकलीफ की यादें हमेशा ताजा रहें।

इसका एक और मकसद है। उन लोगों को श्रद्धांजलि देना जो समुद्र के खतरनाक सफर के दौरान अपनी जान गंवा बैठे। वैसे कला की दुनिया में ऐसी मौतों ने कई लोगों को प्रेरणा दी है।

जैसे ब्रिटिश कवि जॉन मिल्टन ने अपने स्कूल के दिनों के साथी की मौत की याद में 'लाइसिडस' नाम की कविता लिखी थी। इसी तरह पेंटर जे एम डब्ल्यू टर्नर ने अपने साथी कलाकार डेविड विल्की की याद में
'पीस-बरियल ऐट सी' नाम से पेंटिंग बनाई।

डेविड की मौत 1841 में जिब्राल्टर के करीब समुद्र में डूबने से हुई थी।

 It floats in the sea cemetery
cemetery - फोटो : BBC

डेविड की मौत 1841 में जिब्राल्टर के करीब समुद्र में डूबने से हुई थी। इसी तरह अंग्रेज कवि विलियम वर्ड्सवर्थ ने अपने भाई जॉन की याद में 'एलेजिक स्टैंजास' लिखे। जॉन की मौत आइरिश समुद्र में एक जहाज के साथ डूबने की वजह से हुई थी।

फ्रेंच पेंटर थियोडोर जेरीकाल्ट ने 'द राफ्ट ऑफ मेडुसा' नाम से एक पेंटिंग बनाई थी। ये भी 1816 में समुद्र में हुए एक हादसे से प्रेरित थी। जिसमें 132 लोग मारे गए थे।

इसी तरह 1823-24 में जर्मन कलाकार कैस्पर डेविड फ्रेडरिक ने 'द रेक ऑफ होप' के नाम से एक पेंटिंग बनाई थी। इसमें समुद्र के अंदर एक कब्रिस्तान की कल्पना की गई थी। वो आज तुर्की के तट पर साकार होती सी मालूम होती है। फ्रेडरिक की पेंटिंग में एक जहाज को आर्कटिक सागर में डूबता देखा जा सकता है।

इसकी वजह से समुद्र की तलहटी पर जमी बर्फ कुछ इस तरह उठी दिखती है जैसे किसी कब्र पर लगा पत्थर हो। फ्रेडरिक की ये पेंटिंग महज एक ख़्याल था।
तुर्की में बने समुद्री कब्रिस्तान के साथ ही ये पेंटिंग लगाई गई है। ये पेंटिंग टाइटैनिक जहाज़ के डूबने के हादसे की याद दिलाती है।

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