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इंडोनेशिया में जूझती ट्रांसजेंडर महिलाएं, जिहाद फ्रंट ने बंद करा दिया इकलौता स्कूल

Sun, 05 Feb 2017 06:14 AM IST
एजेंसी/ जकार्ता Inside world of transgender
एजेंसी/ जकार्ता Inside world of transgender Updated Sun, 05 Feb 2017 06:14 AM IST
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Inside world of Indonesia's transgender women
Indonesia's transgender - फोटो : dailymail

बीते साल इंडोनेशिया में दुनिया के इकलौते ट्रांसजेंडर स्कूल को रूढ़िवादी ग्रुप इस्लामिक जिहाद फ्रंट ने बंद करा दिया था। मुस्लिम बहुल देश में ट्रांसजेंडरों का इस तरह शिक्षा हासिल करना छोटी सोच रखने वालों को रास नहीं आया। समाज की मुख्य धारा से जुड़ने का उनका सपना अब उनकी शेल्टर नुमा सोसायटी में कैद होकर रह गया है। जहां से बाकी दुनिया से अलग हैं, लेकिन साथ। 

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यहां वह पढ़ सकती हैं, खुल कर जी सकती हैं और जो मर्जी चाहे कर सकती हैं। क्योंकि यह उनकी अपनी दुनिया है। इंडोनेशिया की जनता उन्हें वारिया कहती है। यह दो इंडोनेशियाई शब्दों वानिता और प्रिया से मिलकर बना है। जिसका अर्थ है महिला और पुरुष। बीते साल जब दुनिया के इकलौते ट्रांसजेंडर स्कूल को बंद करने की खबर आई तो सभी को गहरा धक्का लगा। हालांकि अच्छी बात यह है कि आज भी उनकी पढ़ाई जारी है। 
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कुछ दिलेर शिक्षक समय निकालकर उनके शेल्टर में पहुंचते हैं और महिलाओं को पढ़ाते हैं। ऐसी 42 ट्रांसजेंडर महिलाएं अब अपने आशियाने में ही शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इंडोनेशिया की इन वारिया की जिंदगी को योगयकार्ता नाम की कम्यूनिटी ने तस्वीरों में संजोया है। इन शेल्टर में अभी 300 से ज्यादा ट्रांसजेंडर महिलाएं रहती हैं। वारिया के लिए काम करने वाली एक्टिविस्ट स्निता रात्रि ‘पोनडोस पिसनत्रेन वारिया अल-फतह’ नाम से धार्मिक स्कूल चलाती हैं। 

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कई ऐसी भी हैं, जिन्होंने लिंग परिवर्तन कराया

Inside world of Indonesia's transgender women

ह्यूमन राइट वॉच से बातचीत में स्निता ने कहा कि उनका स्कूल वह जगह है, जहां सभी साथ प्रार्थना करते हैं और इस्लाम के बारे में पढ़ते हैं। स्कूल की बिल्डिंग को वह अब एक कम्यूनिटी सेंटर के तौर पर भी चला रही हैं, जहां हिंसा और गरीबी झेल रही ट्रांसजेंडर महिलाओं को मदद दी जाती है। इनमें कई ऐसी भी हैं, जिन्होंने लिंग परिवर्तन कराया है। स्निता के सेंटर से मदद लेकर कई ट्रांसजेंडर महिलाओं ने सिलिकॉन भरवाकर अपने स्तन तैयार करवाए और आज पुरुषों के साथ जिंदगी बिता रही हैं। 

हालांकि बीते एक साल से यह समुदाय निशाने पर है। इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा मंत्री तो एलजीबीटी समुदाय को कॉलेजों में बैन करने की पूरी कोशिश कर चुके हैं। वह इन्हें इंडोनेशिया के मूल्यों के खिलाफ मानते हैं। एलजीबीटी समुदाय की मदद करने को लेकर स्निता पर भी जानलेवा हमले हो चुके हैं। 

बीते साल इंडोनेशिया में एलजीबीटी समुदाय बहस का सबसे बड़ा विषय रहा। आखिरकार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडिडो को सामने आना पड़ा। उन्हें कहना पड़ा कि होमोसेक्सुलिटी को आपराधिक दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया था कि वह एलजीबीटी समुदाय पर होने वाले हमले रोके। इसके बावजूद भी देश में समुदाय की स्थिति चिंताजनक है। इनमें भी ट्रांसजेंडर सबसे ज्यादा निशाने पर हैं।

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