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चीन के कर्ज से बनने के बाद कंगाल हुए श्रीलंकाई हवाईअड्डे का कायाकल्प करेगा भारत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 07 Jul 2018 05:21 AM IST
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चीन के भारी-भरकम ब्याज वाले कर्ज से श्रीलंका के बंदरगाह शहर हंबनटोटा में बने हवाईअड्डे का परिचालन अब भारत करेगा। रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह हवाईअड्डा घाटे में है जबकि हंबनटोटा बंदरगाह का जिम्मा चीन के पास है। श्रीलंका के नागर विमानन मंत्री निमल सिरिपाल डी सिल्वा ने बृहस्पतिवार को संसद में कहा कि घाटे में चल रहे मताला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को भारत दोनों देशों के बीच एक संयुक्त उपक्रम के रुप में चलाएगा।
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डी सिल्वा ने संसद में कहा कि हमें घाटे में चल रहे इस हवाईअड्डे को सही करना होगा जिसके कारण 20 अरब रुपये का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अनुबंध की अंतिम शर्तें अभी तय की जानी हैं। विपक्षी सांसद कणक हेरत ने मंत्री से सवाल किया कि क्या इस हवाईअड्डे का परिचालन भारत को खुश करने के लिए दिया गया है। इसके जवाब में डी सिल्वा ने कहा कि सरकार ने इसके परिचालन के लिए 2016 में निविदा मंगवाई थी लेकिन हमें मदद की पेशकश सिर्फ भारत ने की।
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डी सिल्वा ने कहा कि अब हम भारत के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने की बातचीत कर रहे हैं। हवाईअड्डे के पास में ही स्थित बंदरगाह का नियंत्रण चीन के पास है। चीन को यह अधिकार उसका कर्ज चुकाने के क्रम में दिया गया है।
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विश्व का सबसे खाली हवाईअड्डा है यह
हंबनटोटा हवाईअड्डा राजधानी कोलंबो से 241 किमी दक्षिण-पूर्व में है। इसे 21 करोड़ डॉलर की लागत से बनाया गया है लेकिन वहां से ज्यादा उड़ान न होने के कारण यह घाटे में है। इसे विश्व का सबसे खाली हवाईअड्डा कहा जाता है।